*किरंदुल-बचेली मुक्तिधाम की दयनीय स्थिति: सफाई और रखरखाव की अनदेखी से खतरे में लोग*

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*किरंदुल-बचेली मुक्तिधाम की बदहाली: कचरे और अव्यवस्था का अंबार, प्रशासन की उदासीनता*

किरंदुल-बचेली, छत्तीसगढ़: भारत की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी और छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका किरंदुल-बचेली के बीच पड़ापुर में स्थित एकमात्र मुक्तिधाम की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। यह स्थान, जहां लोग अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करते हैं, कचरे, गंदगी और बिखरी पड़ी पूजा सामग्री से अटा पड़ा है। देखने से प्रतीत होता है कि यहां वर्षों से कोई सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण यह पवित्र स्थल उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार हो गया है।

मुक्तिधाम की छत पर लगी एम्बेस्टर शीट पूरी तरह टूट चुकी है और जगह-जगह से गिरी हुई है। लोहे के चैनल से बना शेड भी जर्जर होकर एक तरफ झुक गया है, जो किसी भी समय गिर सकता है। यह स्थिति न केवल असुरक्षित है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान की अनदेखी से अंतिम संस्कार जैसी पवित्र प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश किरंदुल-बचेली क्षेत्र के निवासियों ने इस बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। एक स्थानीय निवासी, रमेश साहू (बदला हुआ नाम), ने बताया, “यह हमारी आस्था और संस्कृति का स्थान है, लेकिन इसकी हालत देखकर दुख होता है। एनएमडीसी और नगरपालिका, जो इतने संसाधनों से संपन्न हैं, फिर भी इस जगह की सुध नहीं ले रहे।” कई लोग इस बात से भी चिंतित हैं कि टूटा हुआ शेड और गंदगी के कारण अंतिम संस्कार के दौरान असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

संसाधनों की कमी या प्राथमिकता का अभाव? एनएमडीसी, जो देश की अग्रणी खनन कंपनी है, और किरंदुल-बचेली नगरपालिका, जिसे छत्तीसगढ़ की सबसे धनी नगरपालिका माना जाता है, के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। फिर भी, इस मुक्तिधाम की उपेक्षा सवाल खड़े करती है। क्या यह प्राथमिकता की कमी है या प्रशासनिक लापरवाही? स्थानीय लोगों का मानना है कि दोनों संस्थानों को इस पवित्र स्थल के रखरखाव और सौंदर्यीकरण के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

स्वच्छ भारत अभियान से दूरी स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर में सफाई और स्वच्छता को बढ़ावा देने की बात की जाती है, लेकिन यह मुक्तिधाम उस अभियान से कोसों दूर नजर आता है। कचरे का ढेर, बिखरी पूजा सामग्री और जर्जर संरचना न केवल स्वच्छता के अभाव को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन की उदासीनता को भी उजागर करती है।

आवश्यकता है त्वरित कार्रवाई की मुक्तिधाम की इस स्थिति को सुधारने के लिए निम्नलिखित कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए:

नियमित सफाई व्यवस्था: कचरे और बिखरी पूजा सामग्री को हटाने के लिए नियमित सफाई अभियान शुरू किया जाए।

संरचनात्मक मरम्मत: टूटी एम्बेस्टर शीट और जर्जर शेड की मरम्मत या प्रतिस्थापन तत्काल किया जाए।

सुरक्षा उपाय: संरचना को मजबूत कर हादसों की संभावना को रोका जाए।

सौंदर्यीकरण: मुक्तिधाम को स्वच्छ और सम्मानजनक बनाने के लिए पौधरोपण और बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए।

निष्कर्ष किरंदुल-बचेली का मुक्तिधाम, जो लोगों की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, आज उपेक्षा का शिकार है। एनएमडीसी और नगरपालिका की जिम्मेदारी है कि वे इस पवित्र स्थल को स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाएं। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वह तुरंत इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि यह स्थान न केवल स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्यों को प्रतिबिंबित करे, बल्कि लोगों की भावनाओं का भी सम्मान कर सके।

आवाज उठाएं, बदलाव लाएं स्थानीय निवासियों से अपील है कि वे इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर है

 

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