*किरंदुल से गुमियापाल-अरनपुर मार्ग की बदहाली: शिक्षक कीचड़ में गिरकर घायल, NMDC अस्पताल की लापरवाही उजागर*
दंतेवाड़ा 11 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में किरंदुल से गुमियापाल, अरनपुर, और कुट्रेम को जोड़ने वाली सड़क की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। यह मार्ग, जो क्षेत्र के दर्जनों स्कूलों के शिक्षकों और ग्रामीणों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है, अब कीचड़ और गड्ढों का पर्याय बन चुका है। इस बदहाल मार्ग ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि एक गंभीर घटना के रूप में एक शिक्षक के घायल होने की खबर ने प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को भी उजागर कर दिया है।
*घटना का विवरण: शिक्षक कीचड़ में गिरकर घायल*
आज सुबह गुमियापाल के एक स्कूल में पढ़ाने जा रहे एक शिक्षक इस बदहाल मार्ग पर कीचड़ में फिसलकर गिर गए। इस दुर्घटना में शिक्षक की पैर की हड्डी टूट गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। साथ चल रहे अन्य शिक्षकों ने तत्काल NMDC (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के किरंदुल अस्पताल में संपर्क कर एम्बुलेंस की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से जवाब मिला कि “एम्बुलेंस का टेंडर खत्म हो गया है, इसलिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकती।” इस जवाब ने शिक्षकों को हताश और परेशान कर दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्थानीय पत्रकार और खबर फास्ट के जिला संवाददाता किशोर कुमार रामटेके को सूचित किया गया। किशोर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकारी अस्पताल से एम्बुलेंस की व्यवस्था की और स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर घायल शिक्षक को अस्पताल पहुंचाया। इस घटना ने न केवल सड़क की बदहाली, बल्कि NMDC अस्पताल की संवेदनहीनता को भी सामने ला दिया।
*मार्ग की बदहाली: एक गंभीर समस्या*
किरंदुल से पेरपा चौक, मॉडकामीराल, गुमियापाल, हीरोली, अरनपुर, और कुट्रेम को जोड़ने वाला यह मार्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। बारिश के मौसम में यह सड़क कीचड़ और गड्ढों से भर जाती है, जिससे दोपहिया वाहनों का चलना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार वाहनों को धक्का मारकर या पैदल पार करना पड़ता है। इस मार्ग पर रोजाना दर्जनों शिक्षक और शिक्षिकाएं स्कूलों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इस मार्ग की बदहाली का असर न केवल शिक्षकों, बल्कि स्कूली बच्चों और ग्रामीणों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच पहले ही सीमित है, और इस तरह की सड़कें स्थिति को और जटिल बना देती हैं।
*NMDC अस्पताल की लापरवाही: सवालों के घेरे में*
NMDC, जो दंतेवाड़ा क्षेत्र में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाना जाता है, इस घटना में अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहा। शिक्षकों को एम्बुलेंस उपलब्ध न कराने का कारण “टेंडर खत्म होना” बताना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन आपातकालीन सेवाओं के प्रति कितना गैर-जिम्मेदार है। यदि यह घटना एक शिक्षक के साथ हुई, तो ग्रामीणों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार आपात स्थिति में मरीजों को 12 किलोमीटर पैदल चलकर किरंदुल अस्पताल पहुंचना पड़ता है, जो एक गंभीर मानवीय संकट को दर्शाता है।
*पिछली घटनाओं से सबक नहीं*
यह पहली बार नहीं है जब बस्तर क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं या स्वास्थ्य सेवाओं की कमी ने सुर्खियां बटोरी हैं। हाल ही में, 22 नवंबर 2024 को कोण्डागांव जिले में बस्तर ओलंपिक से लौट रहे दो PTI शिक्षकों की बाइक दुर्घटना में हड्डियां टूट गई थीं। उस घटना में भी स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया था। इसके अलावा, क्षेत्र में बारिश और खराब सड़कों के कारण कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
*ग्रामीणों और शिक्षकों की मांग*
इस घटना के बाद स्थानीय शिक्षकों और ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि सड़क की मरम्मत और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। शिक्षकों ने मांग की है कि:किरंदुल-गुमियापाल-अरनपुर मार्ग की तत्काल मरम्मत की जाए।NMDC अस्पताल में एम्बुलेंस सेवाओं को नियमित और निर्बाध रूप से उपलब्ध कराया जाए।ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए।
*पत्रकार की त्वरित कार्रवाई: एक उम्मीद की किरण*
इस पूरी घटना में पत्रकार किशोर कुमार रामटेके की भूमिका सराहनीय रही। उनकी त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक शिक्षक की जान बचाई, बल्कि यह भी दिखाया कि सामुदायिक सहयोग और जागरूकता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। किशोर ने बताया, “यह बेहद दुखद है कि एक शिक्षक को इस तरह की स्थिति से गुजरना पड़ा। प्रशासन को तुरंत इस मार्ग और स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देना चाहिए।”
*निष्कर्ष: प्रशासन की जवाबदेही जरूरी*
यह घटना दंतेवाड़ा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करती है। शिक्षक, जो समाज के भविष्य को संवारने का काम करते हैं, अगर उन्हें ही इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मार्ग की मरम्मत और NMDC अस्पताल की सेवाओं में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जाएं।
अगर ऐसी घटनाओं से बचा जाना है, तो स्थानीय प्रशासन, NMDC, और राज्य सरकार को मिलकर इस क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। यह न केवल एक सड़क की मरम्मत का सवाल है, बल्कि उन हजारों लोगों के जीवन और भविष्य का सवाल है, जो इस क्षेत्र में रहते और काम करते हैं।

