दंतेवाड़ा में आयोजित बस्तर पोंदुम कार्यक्रम में प्रशासन द्वारा पास जारी करने में दोहरा रवैया बरती गई है।
भाजपा के पार्षदों और अध्यक्ष को VIP दीर्घा का पास दिया गया, जबकि कांग्रेस के पार्षदों और उपाध्यक्ष को केवल सामान्य आमसभा का पास प्रदान किया गया। यह स्थिति विपक्षी नेताओं के साथ सौतेले व्यवहार का संकेत देती है।
यह असमानता राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को जन्म देती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता के सिद्धांत के खिलाफ मानी जा रही है।
क्या प्रशासन ने इस अंतर के लिए कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है? यदि नहीं, तो यह विपक्ष के लिए एक जायज शिकायत का मुद्दा हैं
बस्तर पोंदुम एक सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन है, जो छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थानीय परंपराओं और समुदायों से जुड़ा हैं ऐसे आयोजनों में आमतौर पर स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दलों की भागीदारी होती है। —
भाजपा के पार्षदों और अध्यक्ष को VIP दीर्घा का पास और कांग्रेस के पार्षदों व उपाध्यक्ष को सामान्य पास—यह संकेत देती है कि पास वितरण में कोई स्पष्ट समानता हैं
पक्षपात: यदि जिला प्रशासन या आयोजन समिति पर सत्तारूढ़ दल (इस मामले में भाजपा) का प्रभाव है, तो यह संभव है कि पास वितरण में उनकी प्राथमिकता को तरजीह दी गई हो।
सुरक्षा या प्रोटोकॉल: कभी-कभी प्रशासन कुछ नेताओं को उनकी सुरक्षा जरूरतों या पद के आधार पर अलग-अलग श्रेणी के पास देता है। हालांकि, अगर कांग्रेस के उपाध्यक्ष को भी सामान्य पास दिया गया है, तो यह तर्क कमजोर पड़ता है, क्योंकि उपाध्यक्ष का पद भी महत्वपूर्ण होता है।

