फिर एक बार सी जी संविधान न्यूज़ छत्तीसगढ़ में लगी खबर का अशर किरंदुल में आये बाढ़ छेत्र में देखने को मिला हैं आज शाम लोक निर्माण विभाग के अधिकारी नगरपालिका अध्यक्ष सभी ने मिल कर छेत्र का दौरा किया और नालि को चौड़ी कारण के लिऐ नाली का जायजा लिया हैं
आप को बाता दे की 12 मार्च 2025 को सी जी संविधान न्यूज़ में बाढ़ प्रभावित छेत्र की खबरों को और लोगो के दर्द को प्रमुखता से चलाया था और नगरपालिका चुनाव के दौरान छत्तीसगढ़ साशन के वन मंत्री से भी बाढ़ सम्बंधित सवाल उठाया गया था बाढ़ से किरंदुल को राहत कब मिलेगी
बार बार खबरों को प्रमुखता से दिखाने और खबरों को जिला कलेक्टर तक बात रखने के बाद अब लोक निर्माण विभाग द्वारा बाढ़ प्रभावित छेत्र में छोटी नाली को तोड़ कर बड़ी नाली का निर्माण के लिऐ कल शाम गुरुवार 20 मार्च को अधिकारीयों और नगरपालिका अध्यक्ष ने दौरा किया हैं
*किरंदुल में बाढ़ की समस्या लंबे समय से चली आ रही है, और हाल ही में 20 मार्च 2025 को लोक निर्माण विभाग के* अधिकारियों और नगरपालिका अध्यक्ष ने क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरे का मकसद छोटी नालियों को तोड़कर बड़ी नालियों का निर्माण करना था, ताकि भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके। यह कदम तब उठाया गया जब सी जी संविधान न्यूज़ ने 12 मार्च को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की खबर को प्रमुखता से दिखाया और प्रशासन तक बात पहुंचाई।हालांकि, आपने जो सवाल
*क्या जिला प्रशासन बरसात से पहले लोगों को राहत दिला पाएगा?*
अभी मार्च का अंत चल रहा है, और मानसून आमतौर पर जून-जुलाई में छत्तीसगढ़ में शुरू होता है। यानी प्रशासन के पास करीब 2-3 महीने का वक्त है। बड़ी नालियों का निर्माण और बाढ़ से बचाव के लिए व्यापक तैयारी इतने कम समय में पूरी हो पाना चुनौतीपूर्ण है। अगर काम में तेजी नहीं लाई गई, तो इस बार भी लोगों को बाढ़ का डर सताता रहेगा।
*बारिश, बाढ़ और आपदा क्या लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाएगी?*
किरंदुल के वार्ड नंबर 1, 3, 4, 5, 6, 7 और कोडेनार पंचायत के निवासियों ने पिछले बाढ़ के दौरान भयावह स्थिति देखी है। अगर नालियों का निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था समय पर नहीं हुई, तो यह डर हकीकत बन सकता है। बाढ़ का खतरा हर साल लोगों के लिए एक स्थायी समस्या बन सकता है, खासकर जब प्राकृतिक और मानव-निर्मित कारण (जैसे NMDC का मलबा) मिलकर स्थिति को बदतर बनाते हैं।
*बाढ़ की स्थिति दोबारा हुई तो जिम्मेदार कौन होगा?*
यह सवाल बहुत अहम है। पिछले बाढ़ में नालियों की खराब स्थिति और NMDC के मलबे ने बड़ी भूमिका निभाई थी। अगर प्रशासन अब भी तैयारी में ढिलाई बरतता है या NMDC मलबे को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तो जिम्मेदारी इन दोनों की होगी। साथ ही, निरीक्षण करने वाले नेता, विधायक, सांसद और अधिकारी भी जवाबदेह होंगे, क्योंकि दौरे के बाद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
*क्या यह दौरा सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगा?*
पिछले बाढ़ के बाद भी नेताओं और अधिकारियों ने दौरा किया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। अगर इस बार भी निर्माण कार्य अधूरा रहा या मानसून से पहले पूरा नहीं हुआ, तो यह दौरा भी महज “घड़ियाली आंसू” साबित होगा। लोगों का भरोसा तभी बनेगा जब वास्तव में राहत मिलेगी।
प्रशासन को तुरंत नाली निर्माण में तेजी लानी चाहिए और समयसीमा तय करनी चाहिए।NMDC को मलबे के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए।बाढ़ से बचाव के लिए आपातकालीन योजना बनाई जाए, जैसे अस्थायी बांध या जल निकासी के वैकल्पिक रास्ते।लोगों को जागरूक करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समितियां बनाई जाएं।अंत में, यह सच है कि किरंदुल के लोग हर बरसात में डर के साये में जीने को मजबूर हैं। प्रशासन और सरकार के पास अब मौका है कि वे इस समस्या का स्थायी हल निकालें, वरना यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि “अगली बाढ़ का जिम्मेदार कौन?
