*किरंदुल में पार्किंग संकट: ट्रक-बसों की अव्यवस्था से बढ़ते हादसे, ट्रांसपोर्ट नगर की मांग वर्षों से अधर में*
किरंदुल (छत्तीसगढ़), 19 अगस्त 2025: किरंदुल शहर में ट्रकों और बसों के लिए समुचित पार्किंग स्थल की कमी ने आम जनता को त्रस्त कर रखा है। मुख्य सड़कों पर वाहनों की अंधाधुंध पार्किंग से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा मंडरा रहा है, जबकि ट्रांसपोर्ट नगर की वर्षों पुरानी मांग अब भी अधूरी पड़ी है। हाल ही में हुए दो हादसों ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है, जहां चालक बाल-बाल बच गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बड़े हादसे अपरिहार्य हैं।
*हादसों की बढ़ती श्रृंखला: सड़कों पर अराजकता*
किरंदुल के बस स्टैंड चौक से बीटीएओ (बैलाडिला ट्रांसपोर्ट ऑफिस) तक बचेली मार्ग पर दोनों ओर ट्रकों की लंबी कतारें आम बात हो गई हैं। इसी तरह गौरव पथ पर बसें मुख्य सड़क पर खड़ी रहती हैं, जिससे यातायात अवरुद्ध होता है और दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। कल सुबह ही दो घटनाएं सामने आईं, जो इस समस्या का जीवंत उदाहरण हैं।
पहली घटना में एक दोपहिया वाहन चालक बचेली से किरंदुल की ओर आ रहा था। सड़क पर खड़े ट्रकों के कारण सामने से आ रही पिकअप वैन नजर नहीं आई और दोनों वाहनों में टक्कर होते-होते बची। दूसरी घटना में एक कार किरंदुल से दंतेवाड़ा जा रही थी, जब ट्रकों की वजह से घुमावदार सड़क पर सामने से आ रही ट्रक से टकराने से बची। दोनों मामलों में ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग ने दृश्यता बाधित की, जो हादसों का प्रमुख कारण बनी।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं अब रोजमर्रा की हो गई हैं। एक चालक ने बताया, “ट्रकों को कहीं और पार्क करने की जगह नहीं है, इसलिए मुख्य मार्ग पर ही खड़ा करना पड़ता है। लेकिन इससे न सिर्फ हमारी जान जोखिम में है, बल्कि राहगीरों की भी।”
*बस स्टैंड की दुर्दशा: अस्थाई व्यवस्था भी फेल*
बसों की पार्किंग की समस्या और भी जटिल है। किरंदुल बस स्टैंड में पहले 5 से 7 बसें आसानी से खड़ी हो जाती थीं, लेकिन अब एक भी बस अंदर नहीं खड़ी होती। कारण? बस स्टैंड के अंदर लगी दुकानें और बुकिंग काउंटर वाले विरोध करते हैं, क्योंकि बसों के खड़े होने से उनकी दुकानें ढक जाती हैं। नतीजतन, बस चालक मुख्य सड़क पर वाहन खड़े करने को मजबूर हैं, जो हादसों को न्योता देता है।
कुछ दिन पहले नगर पालिका ने बसों के लिए एक अस्थाई जगह पर मिट्टी डाली थी, लेकिन अब वहां बसें फंसने लगी हैं। इससे चालकों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। एक बस ड्राइवर ने शिकायत की, “न बस स्टैंड में जगह मिलती है, न अस्थाई जगह काम की रही। अब कहां जाएं?”
*ट्रांसपोर्ट नगर की अधूरी कहानी: चुनावी वादों का जाल*
यह समस्या नई नहीं है। वर्षों से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग की जा रही है, जो ट्रकों और बसों के लिए एक समर्पित पार्किंग और लॉजिस्टिक्स हब प्रदान कर सकता है। लेकिन हर चुनाव में राजनेता वोटों के लिए झूठे वादों की झड़ी लगा देते हैं। चुनाव खत्म होते ही सब भूल जाते हैं। परिणामस्वरूप, जनता हादसों के डर में जीने को मजबूर है, जबकि चालक पार्किंग की तलाश में भटकते रहते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि किरंदुल जैसे खनन-आधारित शहर में ट्रांसपोर्टेशन की मांग बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव विकास को बाधित कर रहा है। एक यातायात विशेषज्ञ ने विश्लेषण करते हुए कहा, “ट्रांसपोर्ट नगर न सिर्फ पार्किंग समस्या हल करेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी से यह मांग अधर में लटकी है। यदि बस स्टैंड को फिर से व्यवस्थित किया जाए और दुकानदारों से समझौता किया जाए, तो तत्काल राहत मिल सकती है।”
*क्या है समाधान का रास्ता?*
स्थानीय प्रशासन को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। ट्रांसपोर्ट नगर की योजना को अमलीजामा पहनाना, बस स्टैंड को पुनर्गठित करना और मुख्य सड़कों पर नो-पार्किंग जोन लागू करना कुछ तात्कालिक उपाय हो सकते हैं। जनता की मांग है कि चुनावी वादों से ऊपर उठकर स्थायी समाधान निकाला जाए।
अगर स्थिति यूं ही रही, तो किरंदुल की सड़कें और खतरनाक हो जाएंगी। सवाल यह है कि जनता और चालक कहां जाएं? प्रशासन को अब जागना होगा, वरना हादसों की यह श्रृंखला थमने वाली नहीं।

