*किरंदुल में ट्रांसपोर्ट नगर का झूठा जुमला: नेताओं की बेशर्मी और जनता की बदहाली*

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*किरंदुल में ट्रांसपोर्ट नगर का झूठा जुमला: नेताओं की बेशर्मी और जनता की बदहाली*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 18 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के किरंदुल शहर की जनता नगरपालिका अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह के झूठे दावों और  दिखावे से त्रस्त हो चुकी है। अखबारों में अपनी तस्वीरें छपवाकर यह दावा करना कि “20 साल पुरानी ट्रांसपोर्ट नगर की मांग पूरी हो गई” और रेलवे की जमीन पर इसका चयन हो चुका है, न सिर्फ जनता के साथ धोखा है, बल्कि नेताओं की जीता -जागता सबूत है। सड़कों पर ट्रकों की अव्यवस्था, बसों का बेतरतीब खड़ा होना और बढ़ते हादसों के बीच यह झूठा प्रचार जनता की जान से खिलवाड़ है। आइए, इस  सियासत और नेताओं के झूठे वादों का कड़ा विश्लेषण करें।

*ट्रांसपोर्ट नगर: वादा नहीं, वोट की साजिश*

किरंदुल की जनता दो दशकों से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग कर रही है, ताकि सड़कों पर ट्रकों की अव्यवस्था और हादसों से निजात मिले। लेकिन नगरपालिका अध्यक्ष रूबी शैलेंद्र सिंह ने इस मांग को सिर्फ वोट बटोरने का हथियार बनाया। उनका दावा कि रेलवे की जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बनने जा रहा है, पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। बीटीओ कार्यालय से बचेली मार्ग पर मोड़ नंबर 1 से 4 तक सड़कें ट्रकों की लंबी कतारों से अटी पड़ी हैं। चार पहिया वाहनों के लिए जगह नहीं बचती, और तेज रफ्तार में आने वाला कोई भी वाहन बड़ा हादसा कर सकता है।

किरंदुल बस स्टैंड से बचेली मार्ग पर अब लोग डर-डरकर चलते हैं। फिर भी, नगरपालिका अध्यक्ष   अखबारों में अपनी तस्वीरें छपवाकर “20 साल पुरानी मांग पूरी” का ढोल पीट रही हैं। सवाल उठता है: अगर जगह का चयन हो चुका, तो निर्माण क्यों शुरू नहीं हुआ? यह झूठा प्रचार सिर्फ जनता को मूर्ख बनाने और अगले चुनाव में वोट हथियाने की साजिश नहीं तो और क्या है?

*झूठ की मिसाल: मंत्री से रूबी सिंह तक*

यह कोई नई कहानी नहीं है। नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस नेता और  मंत्री  ने भी जनता को झूठे सपने दिखाए थे। उनका वादा था कि हर निवासी को भूमि स्वामी का हक (पट्टा) दिया जाएगा। लेकिन सालों बाद भी यह वादा हवा में लटका हुआ है। अब रूबी शैलेंद्र सिंह उसी राह पर चलते हुए जनता को झूठ परोस रही हैं। इसे स्थानीय लोग “गुरु तो गुरु, चेला उससे चार कदम आगे” कहकर तंज कस रहे हैं। यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि किरंदुल की जनता की त्रासदी का सच है, जहां नेता झूठ बोलकर सत्ता हासिल करते हैं और जनता की जान जोखिम में डालते हैं।

*विश्लेषण: झूठे वादों की गंदी सियासत*

नेताओं की यह बेशर्मी सिर्फ किरंदुल तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों की आम कहानी है। आइए, इस सियासत के कुछ पहलुओं पर गौर करें:

वोट की भूख: चुनाव जीतने के लिए नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद न तो संसाधन होते हैं, न इच्छाशक्ति। ट्रांसपोर्ट नगर जैसे प्रोजेक्ट में रेलवे जमीन का मसला जटिल हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल झूठे प्रचार के लिए करना घोर अनैतिक है।

जनता की जान से खिलवाड़: सड़कों पर अव्यवस्थित ट्रक और बसें हादसों को न्योता दे रही हैं। छत्तीसगढ़ में हर साल सड़क हादसों में सैकड़ों लोग जान गंवाते हैं, और किरंदुल में यह खतरा और बढ़ गया है। फिर भी, नेताओं को सिर्फ अपनी तस्वीरें छपवाने की चिंता है।

जवाबदेही का अभाव: झूठे वादों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। रूबी शैलेंद्र सिंह और राजनितिक दलों के नेता बिना किसी डर के जनता को ठगते रहते हैं।

*जनता की पुकार: अब और नहीं!*

किरंदुल की जनता अब इन झूठे नेताओं के वादों से तंग आ चुकी है। लोग मांग कर रहे हैं कि:

ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण तुरंत शुरू हो, और सड़कों पर ट्रकों की अव्यवस्था पर सख्त कार्रवाई हो।

नेताओं के झूठे दावों की जांच हो, और अगर वादे खोखले साबित हों, तो उनकी जवाबदेही तय की जाए।

किरंदुल की सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि लोग बिना डर के सफर कर सकें।

*निष्कर्ष: झूठ की सियासत का अंत कब?*

रूबी शैलेंद्र सिंह का ट्रांसपोर्ट नगर का दावा और घोसणा  पट्टे का वादा किरंदुल की जनता के लिए सिर्फ छलावा साबित हुए हैं। यह वक्त है कि जनता इन  नेताओं को सबक सिखाए और सवाल पूछे: आखिर कब तक झूठे जुमलों से जनता को ठगा जाएगा? अगर ट्रांसपोर्ट नगर बनता है, तो यह जनता की जीत होगी। लेकिन अगर यह भी एक और खोखला वादा साबित हुआ, तो यह किरंदुल की जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा। समय जवाब मांगेगा, और नेताओं को जवाब देना होगा।

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