*दंतेवाड़ा में शिक्षा व्यवस्था पर खतरा: संकुल समन्वयकों की नियुक्ति में बड़ा घोटाला*
दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संकुल समन्वयकों (Cluster Coordinators) की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है, जिसके चलते बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिले के कुंवाकोंडा ब्लॉक में नियमों को ताक पर रखकर 3 से 4 संकुल समन्वयकों की नियुक्ति ऐसी जगह की गई है, जहां उनका मूल पदस्थापन स्कूल 20 से 40 किलोमीटर दूर है। इससे न केवल शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि बच्चों का भविष्य भी दांव पर लग रहा है।
*हीरोली संकुल मामला: घोटाले की शुरुआत*
हाल ही में हीरोली संकुल समन्वयक की नियुक्ति की पोल खुलने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। जांच में पता चला कि किरंदुल शहरी क्षेत्र के कुछ संकुल समन्वयकों की पदस्थापना अन्य संकुलों में है, लेकिन वे अपने मूल स्कूलों में न तो उपस्थित होते हैं और न ही बच्चों को निर्धारित तीन कक्षाएं पढ़ाते हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के साथ खिलवाड़ भी है।
*शिक्षा पर मंडराता खतरा*
इस अनियमितता का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। जिन शिक्षकों को संकुल समन्वयक बनाया गया है, वे अपने मूल स्कूलों में उपस्थित नहीं होते। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो रही है और बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यह स्थिति दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र में और भी गंभीर है, जहां शिक्षा पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
*क्या हैं नियम?*
शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार:
संकुल समन्वयक का मूल पदस्थापन और उनकी जिम्मेदारी एक ही संकुल में होनी चाहिए।
समन्वयकों को अपने स्कूल में कम से कम तीन कक्षाएं पढ़ाना अनिवार्य है।
समन्वयकों का कार्य स्कूलों की निगरानी और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर करना है, न कि अपने मूल दायित्वों से बचना।
*जिम्मेदार कौन?*
इस घोटाले ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आखिर कैसे इतने बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी हो रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक नहीं थी, या यह लापरवाही जानबूझकर की गई? स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि बच्चों की शिक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।
*आगे की राह*
इस मामले को लेकर तत्काल जांच की मांग उठ रही है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि:
सभी संकुल समन्वयकों की नियुक्ति की समीक्षा की जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
यह सुनिश्चित किया जाए कि शिक्षक अपने मूल स्कूलों में नियमित रूप से उपस्थित हों और पढ़ाई कराएं।
भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई जाए।
*निष्कर्ष*
दंतेवाड़ा जिले में संकुल समन्वयकों की नियुक्ति में अनियमितता न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ एक गंभीर अपराध भी है। शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, और इस अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल कदम उठाने होंगे। यदि इस घोटाले पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह दंतेवाड़ा की शिक्षा व्यवस्था पर और गहरा संकट ला सकता है।
