*नगरपालिका की लापरवाही से शंखनी-डंकनी नदी का प्रदुषण: माँ दंतेश्वरी की आस्था पर प्रहार*

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*नगरपालिका की लापरवाही से शंखनी-डंकनी नदी का प्रदुषण: माँ दंतेश्वरी की आस्था पर प्रहार*

दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़: दंतेवाड़ा जिले की पवित्र शंखनी-डंकनी नदी, जो माँ दंतेश्वरी मंदिर के तट पर बहती है, आज नगरपालिका किरंदुल की घोर लापरवाही के कारण प्रदूषण की चपेट में है। इस नदी का जल, जो हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का प्रतीक है, मल-मूत्र और गंदगी से दूषित हो रहा है। यह नदी न केवल स्थानीय लोगों के लिए पवित्र है, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी स्नान और पूजा-अर्चना का महत्वपूर्ण केंद्र है। पिछले वर्ष से गंगा आरती की तर्ज पर शुरू की गई महा आरती ने इस नदी को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है, लेकिन नगरपालिका की उदासीनता ने इस आध्यात्मिक स्थल की पवित्रता पर गहरा आघात पहुँचाया है।

*शंखनी-डंकनी नदी: आस्था का केंद्र*

शंखनी और डंकनी नदियों का संगम दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी मंदिर के पास होता है, जो इस क्षेत्र की आराध्य देवी का पवित्र धाम है। यह नदी हिंदू धर्मावलंबियों के लिए श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु नदी में स्नान कर माँ दंतेश्वरी के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। पिछले वर्ष से शुरू हुई महा आरती, जो गंगा आरती की तर्ज पर आयोजित की जाती है, ने इस नदी को और भी विशेष बना दिया है जिससे इस स्थान का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया है।

लेकिन इस पवित्र नदी की स्थिति आज चिंताजनक है। किरंदुल नगरपालिका की लापरवाही के कारण इस नदी का जल मल-मूत्र और अन्य गंदगी से दूषित हो रहा है, बल्कि हिंदू धर्म की आस्था के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

*नगरपालिका की लापरवाही: प्रदूषण का मूल कारण*

जानकारी के अनुसार, किरंदुल के कई घरों ने अपने सीवरेज सिस्टम को नगरपालिका के मुख्य नाले से जोड़ रखा है। इन नालों में घरों का मल-मूत्र और अन्य अपशिष्ट बहता है, जो आगे जाकर कड़मपाल के नाले में मिलता है। यह नाला अंततः शंखनी नदी में जाकर मिलता है, जो दंतेवाड़ा की ओर बहती है। इस प्रक्रिया में नदी का जल पूरी तरह से दूषित हो रहा है, जिसका उपयोग श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए करते हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगरपालिका ने इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। न ही सीवरेज सिस्टम को व्यवस्थित करने या नालों के पानी को ट्रीट करने की कोई योजना लागू की गई है। यह स्थिति न केवल नदी की पवित्रता को नष्ट कर रही है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रही है।

*आस्था पर प्रहार: श्रद्धालुओं में रोष*

शंखनी-डंकनी नदी के दूषित होने से स्थानीय लोग और श्रद्धालु बेहद आहत हैं। माँ दंतेश्वरी मंदिर में आने वाले भक्तों का कहना है कि नदी में स्नान करने से अब उन्हें डर लगता है, क्योंकि पानी दूषित हो रहा है। एक स्थानीय निवासी, रमेश कुमार, ने बताया, “यह नदी हमारी आस्था का केंद्र है। हम यहाँ स्नान करते हैं, पूजा करते हैं, लेकिन अब किरंदुल मे शिवरेज की गन्दगी से पानी दूषित हो रहा है नगरपालिका को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”

महा आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा आरती की तर्ज पर शुरू की गई यह परंपरा अब पुरे छत्तीसगढ़ मे चर्चा पर है। एक श्रद्धालु, अनिता साहू, ने कहा, “हम यहाँ माँ दंतेश्वरी की आरती करने आते हैं, लेकिन किरंदुल नगरपालिका की कहानी से मन दुखी हो जाता है। यह हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ है।”

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा

नदी के दूषित होने का असर केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। नदी में मल-मूत्र और अन्य अपशिष्टों के मिलने से जल प्रदूषण बढ़ रहा है

*नगरपालिका की जवाबदेही पर सवाल*

किरंदुल नगरपालिका की इस लापरवाही ने कई सवाल खड़े किए हैं। आखिर क्यों नगरपालिका ने नालों मे सिवरेज की गन्दगी करने वालों पर कारवाही नहीं करता और रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया? 

*सीवरेज सिस्टम को व्यवस्थित* 

करने के लिए कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगरपालिका इस मुद्दे पर पूरी तरह से उदासीन है और जनता की शिकायतों को अनसुना कर रही है।

*समाधान की आवश्यकता*

इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। कुछ संभावित उपाय निम्नलिखित हो सकते हैं:

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना: नालों के पानी को नदी में मिलने से पहले ट्रीट करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाना चाहिए।

नालों का पुनर्निर्देशन: घरों से निकलने वाले मल-मूत्र को नदी में मिलने से रोकने के लिए नालों को पुनर्निर्देशित किया जाए।

जागरूकता अभियान: स्थानीय लोगों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएँ।

*नगरपालिका की जवाबदेही:*

नगरपालिका को इस मामले में जवाबदेह बनाया जाए और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

*निष्कर्ष*शं

खनी-डंकनी नदी का दूषण न केवल पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, बल्कि यह हिंदू धर्म की आस्था और सांस्कृतिक विरासत पर भी गहरा प्रहार है। किरंदुल नगरपालिका की लापरवाही ने इस पवित्र नदी की गरिमा को ठेस पहुँचाई है। यह समय है कि स्थानीय प्रशासन, सरकार और समाज एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करें, ताकि माँ दंतेश्वरी के भक्तों की आस्था और इस नदी की पवित्रता को संरक्षित किया जा सके। यदि इस दिशा में तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो यह नदी और इसके साथ जुड़ी आस्था हमेशा के लिए खतरे में पड़ सकती है।

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