*किरंदुल-बचेली में NMDC की नीतियों से स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों पर संकट, बाहरी कंपनियों की बेरोकटोक एंट्री ने बढ़ाई मुश्किलें*

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*किरंदुल-बचेली में NMDC की नीतियों से स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों पर संकट, बाहरी कंपनियों की बेरोकटोक एंट्री ने बढ़ाई मुश्किलें*

दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल-बचेली क्षेत्र में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की परियोजनाओं में बाहरी कंपनियों को बेरोकटोक काम देने की नीति ने स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों के समक्ष गंभीर रोजगार संकट पैदा कर दिया है। स्थानीय ठेकेदारों का कहना है कि बाहरी कंपनियों के बढ़ते दबदबे और उनके द्वारा अपने साथ मशीनरी और मजदूर लाने के कारण उनकी रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है। इस स्थिति ने न केवल ठेकेदारों को आर्थिक तंगी की ओर धकेला है, बल्कि हजारों स्थानीय मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है।

*स्थानीय ठेकेदारों की बदहाली: बाहरी कंपनियों का दबदबा*

दंतेवाड़ा जिले में 250 से अधिक ठेकेदार कार्यरत हैं, जिनमें से 130 से ज्यादा अकेले किरंदुल-बचेली क्षेत्र में हैं। इन ठेकेदारों का कहना है कि NMDC की परियोजनाओं में बाहरी कंपनियों, जैसे कोलकाता की एलएंडटी, कल्पतरु और हाल ही में समता जैसी कंपनियों को बेरोकटोक काम मिल रहा है। ठेकेदारों के अनुसार, नई कंपनी समता अपने साथ हाइवा, 380 मशीनें और अन्य भारी उपकरण लेकर आई है, जिसने स्थानीय ठेकेदारों की आजीविका को और भी संकट में डाल दिया है।

स्थानीय ठेकेदार ने बताया, “हमारे पास पहले से ही एलएंडटी और कल्पतरु जैसी बड़ी कंपनियों की वजह से काम कम हो गया था। अब समता जैसी नई कंपनी ने अपने साथ सारी मशीनें और गाड़ियां लाकर हमारी कमर तोड़ दी है। हमारी मशीनें और गाड़ियां खाली पड़ी हैं, मजदूर बेकार बैठे हैं। अगर यही हाल रहा तो हम दिवालिया हो जाएंगे।”

*रोजगार का संकट: स्थानीय मजदूरों की अनदेखी*

किरंदुल-बचेली क्षेत्र में वर्तमान में 3,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं, जिनमें ज्यादातर बाहरी राज्यों से आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर NMDC स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दे और उनके माध्यम से स्थानीय मजदूरों को काम दे, तो दंतेवाड़ा जिले में रोजगार की कोई कमी नहीं होगी। इसके विपरीत, बस्तर और दंतेवाड़ा के ग्रामीण रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं, जहां उनका शोषण होता है।

एक स्थानीय मजदूर, लखन मंडावी ने कहा, “हमारे जिले में इतना काम है, फिर भी हमें बाहर जाना पड़ता है। अगर NMDC स्थानीय ठेकेदारों को काम दे, तो हम जैसे हजारों मजदूरों को यहीं रोजगार मिल सकता है। लेकिन बाहरी कंपनियां अपने मजदूर और मशीनें लाती हैं, जिससे हमें कुछ नहीं मिलता।”

स्थानीय ठेकेदारों के अनुसार, अगर किरंदुल-बचेली के 130 ठेकेदारों को प्रति ठेकेदार 100-200 मजदूरों को रोजगार देने का अवसर मिले, तो कम से कम 13,000 स्थानीय परिवारों का चूल्हा जल सकता है। लेकिन बाहरी कंपनियों को प्राथमिकता देने की नीति ने इस संभावना को खतरे में डाल दिया है।

*रहस्यमयी शव और बाहरी मजदूरों की पहचान का सवाल*

हाल ही में किरंदुल के वार्ड नंबर 8 के मटन मार्केट नाले में एक अज्ञात शव मिलने की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने इस शव की पहचान के लिए सभी संभव प्रयास किए, लेकिन कोई भी कंपनी या स्थानीय व्यक्ति इस व्यक्ति को पहचान नहीं सका। इस घटना ने बाहरी मजदूरों की बढ़ती संख्या और उनकी पहचान के अभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय पुलिस के अनुसार, बाहरी कंपनियां अपने मजदूरों की पूरी जानकारी स्थानीय थानों में दर्ज नहीं करातीं, जिससे ऐसी घटनाओं की जांच में मुश्किलें आती हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम बार-बार कंपनियों से उनके कर्मचारियों की जानकारी मांगते हैं, लेकिन कई कंपनियां पूरी सूची उपलब्ध नहीं करातीं। इससे न केवल सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ती हैं, बल्कि ऐसी घटनाओं का समाधान करना भी मुश्किल हो जाता है।”

*NMDC का दावा और हकीकत का फासला*

NMDC, जो कि एक नवरत्न कंपनी है, अपने आधिकारिक बयानों में दावा करती है कि वह स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देती है। लेकिन स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों का कहना है कि यह दावा हकीकत से कोसों दूर है। बाहरी कंपनियों को बड़े ठेके और उनके द्वारा अपने साथ लाए गए मजदूरों और मशीनों ने स्थानीय लोगों के लिए अवसरों को सीमित कर दिया है।

स्थानीय निवासी और ठेकेदार संजय ठाकुर ने गुस्से में कहा, “NMDC के अधिकारी कहते हैं कि वे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन हकीकत में वे बाहरी कंपनियों को लाकर हमारे मुंह से निवाला छीन रहे हैं। अगर यही हाल रहा, तो दंतेवाड़ा के लोग कहां जाएंगे?”

*स्थानीय निवासियों का सवाल: हमारा हक कहां गया?*

दंतेवाड़ा जिले के स्थानीय निवासियों का कहना है कि NMDC की परियोजनाएं इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ हैं, लेकिन इनका लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा। बाहरी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी और उनके द्वारा लाए गए मजदूरों ने न केवल स्थानीय ठेकेदारों को आर्थिक संकट में डाला है, बल्कि हजारों स्थानीय मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है।

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि NMDC अपनी नीतियों में बदलाव करे और स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दे। साथ ही, बाहरी कंपनियों को अपने मजदूरों की पूरी जानकारी स्थानीय प्रशासन के साथ साझा करने के लिए बाध्य किया जाए।

*निष्कर्ष: एक अनसुलझा सवाल*

किरंदुल-बचेली में NMDC की परियोजनाओं में बाहरी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी ने स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। एक तरफ स्थानीय लोग रोजगार के लिए तरस रहे हैं, तो दूसरी तरफ बाहरी मजदूरों की बढ़ती संख्या और उनकी पहचान का अभाव सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा कर रहा है। मटन मार्केट नाले में मिला अज्ञात शव इस समस्या की गंभीरता को और उजागर करता है।

दंतेवाड़ा के स्थानीय निवासियों का सवाल अब भी अनुत्तरित है: अगर NMDC जैसी नवरत्न कंपनी अपने ही क्षेत्र के लोगों को प्राथमिकता नहीं देगी, तो स्थानीय लोग कहां जाएंगे? इस सवाल का जवाब NMDC के अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को जल्द से जल्द देना होगा, ताकि इस क्षेत्र के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी को बचाया जा सके।

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