*दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग: गुणवत्ता की पोल खोलता धसता रोड और दरारों से जर्जर पुल*

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*दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग: गुणवत्ता की पोल खोलता धसता रोड और दरारों से जर्जर पुल*

दंतेवाड़ा से किरंदुल को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह है सड़क और पुल की बदहाल स्थिति, जो ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रही है। भांसी के समीप हाल ही में बने डामर रोड का हिस्सा महज एक महीने में धस गया है, और इसके साथ बने पुल में भी दरारें उभर आई हैं। यह स्थिति न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, बल्कि क्षेत्रवासियों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रही है।

*एक महीने में धस गया नया रोड*

दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग पर भांसी के पास बना डामर रोड, जिसे बने अभी एक महीना भी नहीं हुआ, अब धसने की कगार पर है। ठेकेदार ने क्षतिग्रस्त हिस्से को स्टॉपर लगाकर बंद कर दिया है, लेकिन यह महज तात्कालिक उपाय है। सवाल यह है कि इतने कम समय में सड़क की ऐसी हालत क्यों हो गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी इसके लिए जिम्मेदार है। इस सड़क का धसना न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि बड़े हादसों को भी न्योता दे सकता है।

*पुल में दरारें: भ्रष्टाचार का खुला सबूत*

सड़क के साथ बने पुल की स्थिति और भी चिंताजनक है। निर्माण के तुरंत बाद ही पुल में दरारें दिखाई देने लगी हैं, जो ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं। यह पुल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दंतेवाड़ा और किरंदुल के बीच आवागमन का प्रमुख जरिया है। दरारों की वजह से भारी वाहनों का आवागमन पहले ही प्रतिबंधित हो चुका है, जिससे स्थानीय व्यापार और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

*पिछले पांच वर्षों में बार-बार विवाद*

पिछले पांच वर्षों (2020-2025) में दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग कई बार विवादों के केंद्र में रहा है। इस दौरान सड़क निर्माण और रखरखाव में कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

*1:-2020:* सड़क निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग की शिकायतें स्थानीय लोगों ने दर्ज की थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

*2:-2021:* भांसी के पास सड़क के कुछ हिस्सों में गड्ढे और दरारें उभरने की खबरें आईं, जिसके बाद ठेकेदार ने मामूली मरम्मत कर मामले को दबाने की कोशिश की।

*3:-2022-2023:* बारिश के मौसम में सड़क के कई हिस्से धसने की घटनाएं सामने आईं, जिससे यातायात बार-बार बाधित हुआ।

*4:-2024:* हाल ही में बनी सड़क और पुल में दरारें और धसाव की समस्या ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे को उजागर किया है। इन पांच वर्षों में बार-बार सामने आई शिकायतों के बावजूद न तो ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई।

*भ्रष्टाचार और लापरवाही का खेल*

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस मार्ग के निर्माण में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण की अनदेखी, और अधिकारियों की मिलीभगत ने इस सड़क को मौत का रास्ता बना दिया है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह सड़क और पुल हमारी जिंदगी का आधार हैं, लेकिन ठेकेदार और अधिकारी इसे खिलौना समझ रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत निर्मित सड़कों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण के कड़े दिशा-निर्देश हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) के अनुसार, प्रत्येक ठेकेदार को फील्ड प्रयोगशाला स्थापित कर सामग्री और कारीगरी की गुणवत्ता की जांच करनी होती है। इसके अलावा, स्वतंत्र राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर (NQM) द्वारा भी निर्माण कार्यों की निगरानी की जाती है। लेकिन दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग के मामले में ये सभी व्यवस्थाएं कागजी साबित हुई हैं।

*नेताओं और अधिकारियों की चुप्पी*

इस मामले में सबसे निराशाजनक पहलू है नेताओं और अधिकारियों की चुप्पी। न तो स्थानीय विधायक और न ही जिला प्रशासन ने इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी शिकायतों को बार-बार अनसुना किया गया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को भी उजागर करती है।

*विश्लेषण:* भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी?दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग की स्थिति क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण की कमी, और ठेकेदारों-अधिकारियों की मिलीभगत ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, कानपुर देहात में सेंगुर नदी पर बने एक पुल की सड़क भी दो साल में धस गई थी, जिसकी लागत 15 करोड़ रुपये थी। ऐसी घटनाएं देश भर में सड़क निर्माण परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की गहरी पैठ को दर्शाती हैं।

*आगे की राह*

इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है:

स्वतंत्र जांच: सड़क और पुल के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। ठेकेदारों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

गुणवत्ता नियंत्रण: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े गुणवत्ता नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं।

स्वतंत्र मॉनिटरिंग एजेंसियों की भूमिका को और मजबूत करना होगा।

जिम्मेदारी तय करना: दोषी ठेकेदारों पर जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग जैसी सख्त कार्रवाई हो।

स्थानीय भागीदारी: सड़क निर्माण और रखरखाव में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी शिकायतों पर तुरंत ध्यान दिया जाए।

*निष्कर्ष* दंतेवाड़ा-किरंदुल मार्ग का धसता रोड और दरारों से जर्जर पुल न केवल निर्माण की गुणवत्ता की पोल खोलता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी उजागर करता है। यह समय है कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह मार्ग किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदारों और अधिकारियों की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की होगी।

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