*किरंदुल नगरपालिका में अतिक्रमण का खुला खेल: नालियों और सड़कों पर कब्जा, प्रशासन की चुप्पी*
किरंदुल, छत्तीसगढ़: किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। नालियों और अब सड़कों पर अवैध निर्माण का खुला खेल बेरोकटोक जारी है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नगरपालिका का पिछला सत्र कांग्रेस के शासन में था, जिसमें नालियों पर दो-तीन मंजिला इमारतों का निर्माण धड़ल्ले से हुआ। अब, 25 साल बाद भाजपा ने नगरपालिका में अपना अध्यक्ष स्थापित किया है, लेकिन महज पांच महीनों में ही स्थिति और चिंताजनक हो गई है। नालियों पर तीन मंजिला इमारतें बन रही हैं, कुछ स्थानों पर तो पूरी नाली ही कब्जा ली गई है। इतना ही नहीं, अब वार्ड नंबर 4 की गली और सड़क पर भी अवैध निर्माण शुरू हो गया है, जिससे आम जनता में रोष बढ़ रहा है।
*वार्ड नंबर 4 में सड़क पर कब्जा*
, पार्षद की चुप्पी वार्ड नंबर 4 में सड़क पर मकान का निर्माण तेजी से हो रहा है, जो न केवल यातायात को बाधित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं को भी प्रभावित कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस वार्ड के पार्षद कांग्रेस से हैं, और स्थानीय लोगों का कहना है कि “सैंया भये कोतवाल, तो डर काहे का” वाली कहावत यहाँ चरितार्थ हो रही है। आरोप है कि पार्षद और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। नालियों के अतिक्रमण से जल निकासी की समस्या पहले ही गंभीर थी, और अब सड़कों पर कब्जा होने से आवागमन में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।
*नगरपालिका की निष्क्रियता पर सवाल*
किरंदुल नगरपालिका में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती दिख रही है। कांग्रेस शासन में नालियों पर हुए अवैध निर्माण को रोकने में नाकामी के बाद, भाजपा के नए सत्र में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगरपालिका के अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मामले में मौन साधे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में सड़क चौड़ीकरण के लिए अवैध निर्माण हटाने के मामले में सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं, जिसमें नोटिस जारी करने और उचित प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया गया है। लेकिन किरंदुल में ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
स्थानीय लोगों का आक्रोश स्थानीय निवासियों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण नालियों में जलजमाव और सड़कों पर जाम की स्थिति आम हो गई है। एक निवासी ने बताया, “नालियों पर बनी इमारतों की वजह से बारिश में पानी सड़कों पर भर जाता है। अब सड़क पर भी मकान बन रहे हैं, तो हम कहाँ जाएँ?” लोगों का आरोप है कि नगरपालिका और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अतिक्रमणकारी बेखौफ हो गए हैं।
*कानूनी प्रावधान और प्रशासन की जिम्मेदारी*
भारतीय दंड संहिता की धारा 441 और 447 के तहत अवैध अतिक्रमण अपराध है, जिसमें जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। इसके बावजूद, किरंदुल में न तो नोटिस जारी करने की प्रक्रिया दिख रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई। अन्य शहरों जैसे देहरादून और सोनीपत में नगर निगम और प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाए हैं, जिनमें सड़कों और फुटपाथों से कब्जा हटाया गया। लेकिन किरंदुल में ऐसी कोई पहल नजर नहीं आती।
*आगे की राह*
किरंदुल नगरपालिका को इस समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अतिक्रमण हटाने के लिए सर्वेक्षण, नोटिस जारी करना और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। साथ ही, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किरंदुल में अतिक्रमण का यह खेल न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित करेगा, बल्कि नागरिकों के जीवन को भी और कठिन बना देगा।
निष्कर्ष किरंदुल नगरपालिका में अतिक्रमण का मुद्दा अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। नालियों और सड़कों पर हो रहे अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं के लिए भी खतरा हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई करे, ताकि किरंदुल को अतिक्रमण मुक्त बनाया जा सके। स्थानीय लोगों की माँग है कि इस “खुले खेल” पर लगाम लगे, और शहर में सुव्यवस्था बहाल हो।

