*किरंदुल में बारिश के पानी से आंगनबाड़ी केंद्र और उचित मूल्य की दुकान में पानी रिसाव से बिगड़े हालात*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 1 में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र और उचित मूल्य की दुकान में बारिश के कारण पानी रिसाव की गंभीर समस्या ने स्थानीय निवासियों और बच्चों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस सरकारी भवन की जर्जर स्थिति के कारण न केवल बच्चों की शिक्षा और पोषण प्रभावित हो रहा है, बल्कि सरकारी राशन का सामान भी खराब हो रहा है, जिससे गरीब परिवारों को भारी नुकसान हो रहा है।
*आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए जगह नहीं*
आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता ने बताया कि बारिश की शुरुआत से ही छत और फर्श से पानी रिस रहा है। रातभर में कमरा पानी से भर जाता है, जिसके कारण बच्चों को बैठने की जगह तक नहीं मिलती। कार्यकर्ता ने कहा, “कुछ समय पहले सीजी संविधान न्यूज़ में खबर छपने के बाद अधिकारी आए, स्थिति देखी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।” बच्चों के लिए यह केंद्र न केवल शिक्षा, बल्कि पोषण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन पानी रिसाव के कारण यहाँ गतिविधियाँ चलाना मुश्किल हो गया है।
*उचित मूल्य की दुकान में खराब हो रहा राशन*
वहीं, उचित मूल्य की दुकान के संचालक ने बताया कि पिछले 2-3 सालों से बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने और फर्श से रिसाव के कारण चावल, नमक, शक्कर और चना जैसे राशन सामग्री बार-बार खराब हो रही है। संचालक ने बताया, “मैंने अपनी तरफ से झिल्ली खरीदकर सामान को ढकने की कोशिश की, लेकिन नीचे से रिसने वाले पानी से बचाव नहीं हो पाता। अधिकारियों को कई बार सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” यह दुकान गरीब परिवारों के लिए राशन का मुख्य स्रोत है, और सामान खराब होने से उनकी खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ रहा है।
*नागरिकों में आक्रोश, प्रशासन की उदासीनता पर सवाल*
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये भवन सरकारी हैं, फिर भी उनकी मरम्मत के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य खतरे में है, जबकि उचित मूल्य की दुकान में राशन खराब होने से गरीब परिवारों को रियायती दर पर अनाज नहीं मिल पा रहा। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने की मांग की है।
*विश्लेषण: समस्या का समाधान क्यों नहीं?*
यह स्थिति न केवल किरंदुल के वार्ड नंबर 1 की है, बल्कि कई ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में सरकारी भवनों की दुर्दशा का प्रतीक है। बारिश के मौसम में पानी रिसाव की समस्या पुरानी हो सकती है, लेकिन प्रशासन की ओर से समय पर मरम्मत और रखरखाव की कमी इसे और गंभीर बना देती है। आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के भविष्य और पोषण से जुड़ा है, जबकि उचित मूल्य की दुकान गरीबों के लिए जीवन रेखा है। इनके प्रति उदासीनता न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को भी ठेस पहुँचाती है।
*आगे की राह*
प्रशासन को चाहिए कि तत्काल इन भवनों का निरीक्षण कर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
तत्काल मरम्मत: छत और फर्श के रिसाव को रोकने के लिए विशेषज्ञों की टीम भेजी जाए।
नियमित रखरखाव: भवनों का समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत सुनिश्चित की जाए।
जवाबदेही: शिकायतों पर कार्रवाई न होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
जागरूकता और निगरानी: स्थानीय समुदाय को शामिल कर ऐसी समस्याओं की निगरानी और त्वरित शिकायत प्रणाली स्थापित की जाए।
किरंदुल के इस मामले ने एक बार फिर प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो बच्चों का भविष्य और गरीबों की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। यह खबर प्रशासन के लिए एक जागने का आह्वान है, ताकि सरकारी सुविधाएँ वास्तव में जनता के काम आ सकें।

