किरंदुल मुख्य बाजार में अतिक्रमण का दोहरा मापदंड! वर्षों से मुख्य सड़क पर कब्जा जमाए बैठे व्यापारी ही बने दूसरे व्यापारियों के रास्ते का रोड़ा, साप्ताहिक बाजार में बाहरी सब्जी विक्रेताओं को खदेड़ने का आरोप
एक तरफ खुद मुख्य सड़क और आदिवासी ग्रामीणों के लिए बने टीन शेड पर कारोबार, दूसरी तरफ कुछ घंटों के लिए बाजार में दुकान लगाने आए व्यापारियों को सड़क से हटाने की कोशिश! आखिर यह कैसा नियम और किसका अधिकार?
किरंदुल। लौह नगरी किरंदुल के मुख्य बाजार में अतिक्रमण को लेकर व्यापारियों के बीच विवाद सामने आया है। रविवार सुबह करीब 6 बजे साप्ताहिक बाजार के दौरान कुछ स्थानीय व्यापारियों द्वारा ओडिशा एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जियां लेकर पहुंचे बाहरी सब्जी विक्रेताओं को मुख्य सड़क पर दुकान लगाने से रोकने और वहां से हटाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम ने बाजार में अतिक्रमण, व्यापारिक अधिकारों और नगरपालिका प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, किरंदुल के साप्ताहिक बाजार में ओडिशा सहित आसपास के गांवों से सब्जी विक्रेता वर्षों से अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं और कुछ घंटों तक व्यापार कर वापस लौट जाते हैं। वहीं स्थानीय व्यापारी बाजार के अंदर अपनी दुकानों में कारोबार करते हैं। लेकिन बाजार के प्रवेश द्वार पर ही स्थिति कुछ अलग दिखाई देती है। यहां एनएमडीसी किरंदुल परियोजना द्वारा आसपास के आदिवासी ग्रामीणों की सुविधा के लिए टीन शेड का निर्माण कराया गया था। आरोप है कि कुछ स्थानीय व्यापारियों ने इस टीन शेड और उससे लगी मुख्य सड़क के हिस्से पर कब्जा जमाकर स्थायी रूप से अपना कारोबार जमा रखा है।
सवाल यह है कि जब मुख्य बाजार के प्रवेश द्वार पर ही सड़क और टीन शेड का उपयोग अतिक्रमण के आरोपों के बीच हो रहा है, तो कुछ घंटों के लिए सब्जी बेचने आए ग्रामीण और बाहरी व्यापारियों को किस आधार पर रोका जा रहा है?
खुद सड़क पर कब्जा, दूसरों को सड़क पर बैठने से मना!
रविवार सुबह हुए घटनाक्रम के दौरान बाहरी सब्जी विक्रेता दबी जुबान में अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आए। उनका कहना था कि जो स्थानीय व्यापारी खुद वर्षों से बाजार के प्रवेश मार्ग पर बैठकर व्यापार कर रहे हैं, वही उन्हें कुछ घंटों के लिए सड़क पर दुकान लगाने से रोक रहे हैं। व्यापारियों का सवाल था कि यदि सड़क पर दुकान लगाना गलत है तो नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल बाहर से आने वाले छोटे व्यापारियों को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जोर-जबरदस्ती वहां से हटाया गया और बाजार के अंदर जाकर दुकान लगाने को कहा गया। उनका तर्क था कि जब मुख्य प्रवेश मार्ग पर ही दुकानें और कब्जे जैसी स्थिति बनी हुई है, तो ग्राहक बाजार के अंदर पहुंचेंगे कैसे?
17 नवंबर तक अतिक्रमण हटाने का लिखित आश्वासन, फिर यह विवाद क्यों?
इस पूरे मामले में कुछ स्थानीय व्यापारियों की ओर से एक अलग तर्क भी सामने आया। उनका कहना था कि सभी व्यापारियों ने नगरपालिका अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) को लिखित रूप में आश्वासन दिया है कि 17 नवंबर 2026 तक मुख्य बाजार से पूरा अतिक्रमण स्वेच्छा से हटा लिया जाएगा।
उनका कहना है कि जब तक सभी व्यापारी अपना अतिक्रमण नहीं हटाते, तब तक साप्ताहिक बाजार के दिन बाहरी सब्जी विक्रेताओं को भी मुख्य सड़क पर कुछ घंटों के लिए व्यापार करने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही 17 नवंबर तक बाजार के दिन मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद रखने की बात भी कही गई।
लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी लिखित आश्वासन के आधार पर सार्वजनिक सड़क पर अतिक्रमण को 17 नवंबर तक जारी रखने की अनुमति मिल गई है? क्या नगरपालिका ने इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी किया है? और यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है, तो सड़क पर कब्जे और व्यापार को लेकर अलग-अलग नियम किस आधार पर लागू किए जा रहे हैं?
दीपावली के बाजार में आगजनी या आपातकालीन घटना हुई तो जिम्मेदार कौन?
मामला केवल बाहरी सब्जी व्यापारियों को हटाने तक सीमित नहीं है। दीपावली का समय नजदीक है और किरंदुल के मुख्य बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। कुछ व्यापारियों ने बाजार के अंदर दुकानों के सामने लगभग 7 से 8 फीट ऊंचाई तक टेंट और तिरपाल लगाकर गलियों एवं रास्तों को संकरा करने पर भी आपत्ति जताई है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि दीपावली के दौरान पटाखों, आतिशबाजी या किसी अन्य कारण से आगजनी जैसी अप्रिय घटना हो जाती है, तो बाजार के अंदर दमकल वाहन तो दूर, एम्बुलेंस और दोपहिया वाहन का पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नगरपालिका प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही बाजार की सड़कों और गलियों को अतिक्रमण मुक्त कराने की सुध लेगा? क्या त्योहारों के दौरान अग्निशमन, एम्बुलेंस और आम नागरिकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
दीपावली में मुख्य सड़क ही बन जाता है असली बाजार!
किरंदुल की बाजार व्यवस्था की एक और तस्वीर सामने आती है। दीपावली के समय मुख्य बाजार के अंदर की कई गलियां दुकानों, टेंट और तिरपाल से घिर जाती हैं। ऐसे में ग्राहकों की भीड़ मुख्य सड़क की ओर बढ़ती है और मुख्य सड़क पर ही बाजार सजा हुआ दिखाई देता है। जब त्योहारों में मुख्य सड़क पर व्यापारिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं, तब कुछ घंटों के लिए साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों को ही हटाने की कोशिश पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बाहरी सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि वे वर्षों से किरंदुल आकर व्यापार करते हैं। उनका उद्देश्य केवल कुछ घंटों तक अपनी सब्जियां बेचकर वापस लौटना है। ऐसे में उन्हें हटाने से पहले प्रशासन को स्पष्ट और समान नियम लागू करने चाहिए।
नगरपालिका अध्यक्ष और CMO से सीधे सवाल
क्या एनएमडीसी द्वारा आदिवासी ग्रामीणों के लिए निर्मित टीन शेड पर किसी व्यापारी को स्थायी कब्जा या व्यापार करने की अनुमति दी गई है?
मुख्य बाजार की सड़क पर वर्षों से दुकान लगाकर बैठे व्यापारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई हुई?
17 नवंबर 2026 तक अतिक्रमण हटाने के लिखित आश्वासन पर नगरपालिका ने क्या निर्णय लिया है?
क्या साप्ताहिक बाजार के दिन बाहरी सब्जी विक्रेताओं को मुख्य सड़क पर दुकान लगाने से रोकने का कोई आधिकारिक आदेश है?
दीपावली के दौरान बाजार की गलियों में लगाए जा रहे टेंट और तिरपाल से अग्निशमन वाहन एवं एम्बुलेंस की आवाजाही बाधित होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या नगरपालिका सभी व्यापारियों के लिए एक समान व्यवस्था लागू करेगी या कार्रवाई केवल कमजोर और बाहर से आने वाले छोटे व्यापारियों पर ही होगी?
सबसे बड़ा सवाल: अतिक्रमण यदि गलत है तो वह चाहे वर्षों से बैठा स्थानीय व्यापारी करे या कुछ घंटों के लिए दुकान लगाने आया बाहरी सब्जी विक्रेता, नियम सभी के लिए एक समान क्यों नहीं?
किरंदुल का मुख्य बाजार किसी एक व्यक्ति या व्यापारी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि आम जनता और व्यापारियों के उपयोग का सार्वजनिक स्थान है। आदिवासी ग्रामीणों के लिए बने टीन शेड का उद्देश्य भी उन्हीं को सुविधा देना था। ऐसे में बाजार की व्यवस्था किसी की मनमर्जी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष नियमों और प्रशासनिक पारदर्शिता से चलनी चाहिए।
अब देखना यह है कि नगरपालिका अध्यक्ष और CMO 17 नवंबर की समयसीमा तक अतिक्रमण हटाने के मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या साप्ताहिक बाजार में छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए एक समान नियम लागू हो पाते हैं?
