*सत्ता का नशा चढ़ा, चौकीदार की बात भूल गए! किरंदुल में बीजेपी युवा मोर्चा के सुनील गुप्ता ने सरकारी पर्ची पर ही लूट मचा दी – 50 रुपये की जगह 250 रुपये जबरन वसूले, गुजरात के ट्रक ड्राइवरों को धमकी देकर लूटा*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 22 अप्रैल 2026 – प्रधानमंत्री कहते है – “मैं देश का चौकीदार हूँ!” लेकिन उनकी ही पार्टी के प्यादे, खासकर किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र सत्ता के नशे में चूर बीजेपी कार्यकर्ता सुनील गुप्ता इस बात को तिलांजलि दे चुके हैं। सत्ता का गर्म नशा ऐसा चढ़ा कि सरकारी पर्ची पर ही फर्जीवाड़ा कर गुजरात से आने वाले ट्रकों से अवैध वसूली का खेल खेला जा रहा था। 50 रुपये का अस्थाई दखल शुल्क 250 रुपये में बदल दिया गया। मना करने वाले ड्राइवर को गाड़ी खड़ा करने और पुलिस-नगरपालिका की धमकी दी गई।
ट्रक मालिक हिरिकेश वर्मा ने फोन पर खुलासा किया – “हमारी कंपनी की 24-25 गाड़ियाँ रेगुलरली किरंदुल-दंतेवाड़ा आती हैं। हर बार 250 रुपये जबरन वसूले जाते थे। कोई ड्राइवर मना करता तो उसे धमकाया जाता – ‘गाड़ी खड़ी कर दो, नहीं तो पुलिस बुला लेंगे!’” ड्राइवरों ने बताया कि पैसे वसूलने वाला शख्स खुद को नगरपालिका अध्यक्ष बताता था। ड्राइवर से जब नाम पूछा गया तो ड्राइवरों ने ऑनलाइन पेमेंट की स्क्रीनशॉट और फोटो दिखाकर साफ पहचान दी – सुनील गुप्ता, किरंदुल मेन मार्केट निवासी और बीजेपी युवा मोर्चा जिला कार्यसमिति सदस्य।
ये वही सुनील गुप्ता हैं जो सत्ता के नशे में इतने अंधे हो गए कि सरकारी पर्ची को भी हथियार बना लिया। 50 रुपये की जगह 250 रुपये लिखकर पैसे वसूलना, ट्रक ड्राइवरों को धमकाना, पुलिस-नगरपालिका का नाम लेकर लूटना – ये सब सत्ता के नशे का सीधा नतीजा है। बीजेपी की केंद्र से लेकर नगरपालिका तक की सत्ता इनके जैसे कार्यकर्ताओं को ऐसा नशा दे रही है कि चौकीदार वाली बातें हवा में उड़ रही हैं।
सुनील गुप्ता का बचाव? उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाला खेल!
जैसे ही ये घोटाला सामने आया, सुनील गुप्ता ने उल्टा हमला बोल दिया। जिला-स्थानीय स्तर पर खुद को साफ-सुथरा दिखाने की कोशिश की और खुलासा करने वाले पत्रकार पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं। लेकिन किरंदुल छोटा कस्बा है। पब्लिक सब जानती है। ड्राइवरों के पास स्क्रीनशॉट, फोटो और गवाही हैं। नगरपालिका मुख्य अधिकारी को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। जांच चल रही है। जल्द ही पूरा सच सामने आने वाला है।
विश्लेषण:
ये मामला सिर्फ 200 रुपये एक्स्ट्रा वसूलने का नहीं है। ये सत्ता के नशे का जीता-जागता सबूत है। बीजेपी कार्यकर्ता सुनील गुप्ता ने दिखा दिया कि जब सत्ता हाथ लग जाती है तो सरकारी नियम ‘चौकीदार’ वाला भाषण और नैतिकता सब धरी रह जाती है। गुजरात से आने वाले गरीब ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाना, धमकाना और लूटना – ये बीजेपी की ‘सेवा’ वाली राजनीति का असली चेहरा है।
अब देखना यह है कि नगरपालिका की जांच कितनी निष्पक्ष होती है और बीजेपी इस ‘अपने आदमी’ को बचाने के लिए कितना खेल खेलती है। फिलहाल तो एक बात साफ है – नशा शराब का हो या सत्ता का, दोनों में गर्मी तो रहती ही है… और किरंदुल में सत्ता का नशा सुनील गुप्ता के रूप में पूरी तरह बेनकाब हो चुका है!
पब्लिक जाग रही है। अब इंतजार है – कार्रवाई का या फिर सत्ता के नशे में और बढ़ोतरी का?

