*नगरपालिका परिषद किरंदुल (दक्षिण बस्तर, दन्तेवाडा, छत्तीसगढ़) द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश (कमांक 1465/स्थापना/न.पा.परि./2025-26, दिनांक 23.01.2026) में विवादास्पद निर्देश दिया गया है, जिसमें वार्ड पार्षदों को अनिवार्य रूप से अपने-अपने वार्ड के शासकीय भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों या मंगल भवनों पर प्रातः 8:30 बजे ध्वजारोहण करने का आदेश दिया गया है।*

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*नगरपालिका परिषद किरंदुल (दक्षिण बस्तर, दन्तेवाडा, छत्तीसगढ़) द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश (कमांक 1465/स्थापना/न.पा.परि./2025-26, दिनांक 23.01.2026) में विवादास्पद निर्देश दिया गया है, जिसमें वार्ड पार्षदों को अनिवार्य रूप से अपने-अपने वार्ड के शासकीय भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों या मंगल भवनों पर प्रातः 8:30 बजे ध्वजारोहण करने का आदेश दिया गया है।*

यह आदेश राष्ट्रीय ध्वज संहिता, 2002 (Flag Code of India, 2002) के प्रावधानों के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में सामने आया है, क्योंकि संहिता में कहीं भी यह बाध्यता नहीं है कि लोकर्पित (सार्वजनिक उपयोग हेतु समर्पित) या शासकीय भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार केवल वार्ड पार्षद तक सीमित रहेगा।

मुख्य बिंदु जो नियमों का उल्लंघन दर्शाते हैं:

राष्ट्रीय ध्वज संहिता, 2002 (Ministry of Home Affairs द्वारा जारी) के भाग II, पैरा 2.1 और 2.2 के अनुसार:

हर भारतीय नागरिक, निजी संस्था, संगठन, शैक्षणिक संस्थान या कोई भी व्यक्ति 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहरा सकता है, बशर्ते संहिता का पालन हो।

इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है कि सार्वजनिक/शासकीय भवनों पर ध्वज केवल निर्वाचित प्रतिनिधि (जैसे पार्षद) ही फहराएंगे।

संहिता स्पष्ट रूप से कहती है:

“There shall be no restriction on the display of the National Flag by members of general public, private organisations, educational institutions etc.”

(सार्वजनिक, निजी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों आदि द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध नहीं।)

लोकर्पित/शासकीय भवनों पर ध्वजारोहण का अधिकार:

पार्षद

नगरपालिका अध्यक्ष

आमंत्रित अतिथि

स्थानीय संस्था/समिति

या कोई भी सम्मानजनक व्यक्ति

सभी कर सकते हैं। यह अधिकार केवल पार्षदों तक सीमित नहीं किया जा सकता।

नगरपालिका का यह आदेश “केवल पार्षद ही ध्वजारोहण करेंगे” जैसी बाध्यता थोपता है, जो:

मनमाना (Arbitrary) और संवैधानिक अधिकारों का हनन माना जा सकता है (अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ध्वज फहराने का अधिकार)।

राष्ट्रीय ध्वज संहिता के विपरीत है।

कानूनी रूप से चुनौती योग्य है।

प्रशासन समन्वय, अनुशासन या कार्यक्रम की सुविधा के लिए सुझाव दे सकता है (जैसे पार्षद को मुख्य अतिथि बनाना, आपसी सहमति से निर्णय लेना), लेकिन अनिवार्य आदेश जारी करना अवैध है।

सुझाव:

यह मामला स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और नागरिक अधिकारों से जुड़ा है। यदि कोई पार्षद या नागरिक इससे असहमत हैं, तो वे अनुविभागीय अधिकारी, जिला प्रशासन या उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं।

नगरपालिका किरंदुल को चाहिए कि वह अपने आदेश की समीक्षा करे और इसे राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुरूप बनाए, ताकि गणतंत्र दिवस का उत्सव सच्चे अर्थों में समावेशी और सम्मानजनक बने।

यह खबर नियमों की अनदेखी और स्थानीय प्रशासन की मनमानी का गंभीर उदाहरण है, जो पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन सकता है।

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