*किरंदुल में विवादों का अड्डा बना वार्ड नंबर 7: पार्षद बी रूपा रानी की ‘अक्षमता’ ने वार्डवासियों को बना दिया दुश्मन!*

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*किरंदुल में विवादों का अड्डा बना वार्ड नंबर 7: पार्षद बी रूपा रानी की ‘अक्षमता’ ने वार्डवासियों को बना दिया दुश्मन!*


किरंदुल (छत्तीसगढ़), 21 जनवरी 2026: छोटे से शहर किरंदुल में राजनीति का एक काला अध्याय लिखा जा रहा है, जहां वार्ड नंबर 7 की पार्षद बी रूपा रानी का नाम अब ‘विवादों की रानी’ बन चुका है। फरवरी 2025 से शुरू हुए नए सत्र में शपथ लेते ही यह पार्षद विवादों के जाल में फंस गईं, और महज एक साल भी पूरा नहीं होने से पहले उनके घर के 10-50 मीटर के दायरे में कोई न कोई झगड़ा, मारपीट या हंगामा मचा रहता है। क्या ऐसी होती हैं चुनी हुई प्रतिनिधि, जो अपने वार्ड को शांति की बजाय अराजकता की आग में झोंक दें? शहरवासी आज यही सवाल पूछ रहे हैं, और जवाब मिल रहा है – एक शर्मनाक ‘नाकामी’ का!
विवादों की जड़: पार्षद का घर बना ‘झगड़ों का केंद्र’
पार्षद बी रूपा रानी के घर के आसपास का इलाका अब किरंदुल का ‘हॉटस्पॉट’ बन गया है, जहां हर दिन नई कहानी लिखी जाती है। शपथ ग्रहण के बाद से ही उनके ऊपर तीन अलग-अलग परिवारों से मारपीट के आरोप लग चुके हैं। दो मामलों में थाने में शिकायत की गयी है, जबकि एक मामले में एक बेवा महिला ने जिला कलेक्टर तक इंसाफ के लिऐ गुहार लगाई है , आरोप लगाते हुए कि पार्षद के परिवार ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। क्या यह लोकतंत्र का मजाक नहीं? एक चुनी हुई पार्षद, जिसका काम वार्ड की समस्याओं को सुलझाना है, खुद विवादों में उलझी हुई है – और वह भी अपने परिवार की मिलीभगत से! वार्डवासी कहते हैं, “पार्षद का घर शांति का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन यहां तो यह झगड़ों का अड्डा बन गया है।”

*नया विवाद: अधूरा रोड बना मौत का जाल, पार्षद की ‘लापरवाही’ उजागर*

अब ताजा मुद्दा वार्ड नंबर 7 और 8 के बीच की नाली, सफाई और अधूरे गली-रोड निर्माण का है। पार्षद के घर से महज 20 मीटर दूर यह इलाका अब वार्डवासियों के बीच रोजाना लड़ाई का कारण बन रहा है। रोड निर्माण को बीच में ही छोड़ दिया गया, जिससे रात के अंधेरे में लोग ठोकर खाकर गिर रहे हैं, दोपहिया वाहन चलाना नामुमकिन हो गया है, और बारिश में पानी का भराव आसपास के घरों को तबाह कर रहा है। नतीजा? लोग आपस में भिड़ रहे हैं, गालियां दे रहे हैं, और छोटी-छोटी बातों पर हाथापाई तक पहुंच जा रही है। पार्षद बी रूपा रानी इस समस्या को सुलझाने में पूरी तरह ‘अक्षम’ साबित हुई हैं – न रोड पूरा करा सकीं, न सफाई की व्यवस्था! क्या यह उनकी ‘अक्षमता’ नहीं, बल्कि ‘अनदेखी’ है, जो वार्ड को नर्क बना रही है?

*विश्लेषण: एक साल में इतने विवाद – क्या इतिहास रचेगा यह वार्ड?*

किरंदुल में आज हर जुबान पर यही चर्चा है: क्या ऐसी पार्षद चुनी जाती हैं, जो महज एक साल में तीन मारपीट के मामलों और अनगिनत विवादों से घिर जाएं? आरोप तो पार्षद के उपर ये भी है की वार्ड मे स्थिति AM/NS इंडिया द्वारा निर्मित भवन जहाँ मोह्हले के बाचे युवा कैरेम खेला करते थे इस भवन मे भी अपने घर का निजी समान रख कर कब्ज़ा जमाये बैठी है वार्ड नंबर 7 अब ‘विवाद मुक्त’ होने की बजाय ‘इतिहास का सबसे विवादित वार्ड’ बनने की राह पर है। अगर एक साल में इतनी अराजकता है, तो बाकी चार सालों में क्या होगा? वार्डवासी चिंतित हैं – उनकी आंखों में डर साफ झलकता है। यह सिर्फ एक पार्षद की नाकामी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है, जहां चुने हुए नेता जनता की सेवा की बजाय खुद के झगड़ों में व्यस्त रहते हैं। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो यह वार्ड न सिर्फ विवादों का, बल्कि विकास से वंचित रहने का प्रतीक बन जाएगा। क्या प्रशासन सो रहा है? या पार्षद की ‘मनमानी’ को बढ़ावा दे रहा है?
वार्डवासियों की अपील: अब बस, बहुत हुआ!
वार्ड के लोग अब थक चुके हैं। वे मांग कर रहे हैं कि पार्षद अपनी जिम्मेदारी निभाएं, या इस्तीफा दें। जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए – अधूरे रोड को पूरा कराएं, विवादों की जांच कराएं, और पार्षद पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। किरंदुल जैसे छोटे शहर में अगर राजनीति इतनी गंदी हो गई है, तो बड़े शहरों का क्या हाल होगा? यह खबर एक चेतावनी है: लोकतंत्र में ‘अक्षम’ नेताओं का कोई स्थान नहीं। वार्ड नंबर 7 को विवाद मुक्त बनाने का समय आ गया है, वरना इतिहास इसे ‘विवादों का कब्रिस्तान’ के रूप में याद रखेगा!

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