*दंतेवाड़ा में सत्ता का अहंकार चरम पर: भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता पर बुजुर्ग हार्ट पेशेंट सराफा व्यापारी की बेरहम पिटाई का गंभीर आरोप, जनाक्रोश उबाल पर, बाजार बंद, प्रदर्शन में हिंसा*

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*दंतेवाड़ा में सत्ता का अहंकार चरम पर: भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता पर बुजुर्ग हार्ट पेशेंट सराफा व्यापारी की बेरहम पिटाई का गंभीर आरोप, जनाक्रोश उबाल पर, बाजार बंद, प्रदर्शन में हिंसा*

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में इन दिनों सत्ता के मद में चूर एक भाजपा नेता की मनमानी ने पूरे क्षेत्र को आग के गोले में बदल दिया है। जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता पर गीदम क्षेत्र के एक बुजुर्ग सराफा व्यापारी चांडकमल सोनी के साथ घर बुलाकर क्रूर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। यह घटना मात्र व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग, अहंकार की पराकाष्ठा और आम जनता के स्वाभिमान पर हमले का प्रतीक बन गई है।

*सत्ता की हनक ने तोड़ी मर्यादा की सारी हदें*

पीड़ित चांडकमल सोनी, जो हृदय रोग से ग्रस्त बुजुर्ग हैं और गीदम के पुराने बस स्टैंड के निकट एक लॉज चलाते हैं, ने आरोप लगाया है कि संतोष गुप्ता ने उन्हें अपने घर बुलाया। वहां लेन-देन के छोटे-मोटे विवाद को बहाना बनाकर लात-घूंसे बरसाए, खूब पिटाई की और धमकाते हुए कहा, “सरकार मेरी है, सत्ता मेरी है, तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।” बुजुर्ग व्यापारी ने बताया कि गुप्ता खुद गीदम में एक रेस्टोरेंट चलाते हैं, और यह विवाद उसी से जुड़ा था। इतनी क्रूरता कि दिल के मरीज बुजुर्ग को बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई। यह घटना 2026 की शुरुआत में हुई, और जल्द ही पूरे जिले में आक्रोश की लहर दौड़ गई।

*व्यापारी वर्ग का एकजुट विद्रोह: बाजार बंद, सड़कें सुलग उठीं*

आरोप लगने के बाद सराफा व्यापारियों ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। पूरे जिले की सराफा दुकानें बंद कर दी गईं—यह केवल एक बंद नहीं था, बल्कि सत्ता के अत्याचार के खिलाफ सामूहिक चीख थी। व्यापारी वर्ग, जो हमेशा शांतिपूर्ण व्यापार करता आया है, अब भय और अपमान के साये में जीने को तैयार नहीं। उन्होंने साफ कहा कि यदि सत्ता के लोग ही कानून को ठेंगा दिखाएंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा और सम्मान का क्या होगा?

*गीदम बस स्टैंड पर भड़की आग: कांग्रेस और महिला विंग का धरना, पुतला दहन, पुलिस से झड़प*

आज गीदम बस स्टैंड पर कांग्रेस पार्टी, उसकी महिला विंग और स्थानीय जनता की भारी भीड़ जुट गई। यह कोई साधारण राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था—यह जनाक्रोश का ज्वालामुखी था, जो सत्ता पक्ष की मनमानी के खिलाफ फट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने संतोष गुप्ता का पुतला दहन किया, नारे लगाए—”सत्ता का मद मिटाओ, न्याय दो!” पुलिस ने पुतले को जलने से रोकने की कोशिश की, जिससे प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प हो गई। लाठीचार्ज की आशंका के बीच हिंसा की चिंगारियां बिखरीं, लेकिन जनता के दिलों में जल रही रोष की आग को कोई नहीं बुझा सका।

*प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल: रक्षक बन रहा भक्षक?*

पुलिस और प्रशासन पर पक्षपात का गंभीर आरोप लग रहा है। आरोप है कि सत्ता के चहेते नेता को बचाने के लिए कार्रवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। पिछले कई दिनों से जिले में तनावपूर्ण माहौल है—लोग सड़कों पर उतर आए हैं, बाजार ठप हैं, और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त। यदि न्याय में देरी हुई या पक्षपात साबित हुआ, तो स्थिति और विस्फोटक हो सकती है। दंतेवाड़ा जैसे संवेदनशील इलाके में, जहां पहले से नक्सल समस्या है, ऐसे अत्याचार सामाजिक सद्भाव को तहस-नहस कर सकते हैं।

*लोकतंत्र का अपमान या सत्ता का अंधेरा?*

राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि अहंकार का अखाड़ा। लेकिन दंतेवाड़ा में जो हो रहा है, वह लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है। एक जिम्मेदार पद पर बैठा नेता यदि बुजुर्ग नागरिक को पीटे, अपमानित करे और कहे “सत्ता मेरी है”, तो यह पूरे सिस्टम की नाकामी है। दंतेवाड़ा की जनता, व्यापारी और आम नागरिक एक ही सवाल चिल्ला रहे हैं—क्या लोकतंत्र में एक बुजुर्ग का सम्मान, एक आम आदमी की सुरक्षा किसी राजनीतिक पद से छोटी है?

सरकार और प्रशासन को चेतावनी है: आग अब घर की दहलीज पार कर सड़कों पर फैल चुकी है। पुतले छीनकर या बल प्रयोग से इसे नहीं बुझाया जा सकता। असली समाधान है—तत्काल निष्पक्ष जांच, दोषी पर कड़ी कार्रवाई और पीड़ित को न्याय का अहसास दिलाना। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह आग और भयानक रूप ले सकती है।

(सीज़ी संविधान न्यूज़)

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