*किरंदुल में मकर संक्रांति का रंगारंग उत्सव: पतंगबाजी ने बांधे सांस्कृतिक धागे, सागर बने चैंपियन*
किरंदुल, 16 जनवरी 2026: लोह नगरी किरंदुल, जो मिनी इंडिया के नाम से प्रसिद्ध है, मकर संक्रांति के महापर्व पर हर्षोल्लास से सराबोर हो गया। विभिन्न प्रांतों से आए निवासियों ने इस अवसर पर एकजुट होकर परंपराओं को निभाया, जहां मंदिरों में गंगा स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना के साथ-साथ आकाश में उड़ती पतंगों ने सांस्कृतिक समरसता का अनोखा चित्र उकेरा। पर्व सेवा समिति द्वारा आयोजित पतंग प्रतियोगिता ने युवा पीढ़ी को भारतीय विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।
सुबह से ही स्थानीय मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने तिल, चावल और अन्य सामग्री का दान किया, जबकि घर-घर में रंग-बिरंगे फटाकों की गूंज से वातावरण उत्साहपूर्ण हो गया। तमिलनाडु के पोंगल से लेकर गुजरात के उत्तरायण तक की झलक यहां देखने को मिली, जो किरंदुल की विविधता को दर्शाती है। इस पर्व को खिचड़ी उत्सव के रूप में भी मनाया गया, जहां सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को पुण्यकारी माना गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय फुटबॉल ग्राउंड पर मकर संक्रांति सेवा समिति द्वारा आयोजित पतंग प्रतियोगिता ‘2026’ रही। संस्कृति और विरासत को संजोने तथा युवाओं को पर्वों के महत्व से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस इवेंट में बैलाडीला और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों प्रतिभागी शरीक हुए। बच्चों से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक ने पतंग उड़ाकर आकाश को सजाया, जिससे मिनी इंडिया की एकता की मिसाल कायम हुई।
प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर सागर ने पहला स्थान हासिल किया, उन्हें 3,100 रुपये नकद और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। दूसरे स्थान पर मुकुंद (2,100 रुपये) और तीसरे पर डीकांत (1,100 रुपये) रहे। इसके अलावा 17 अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया। पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि एएम/एनएस स्टील इंडिया लिमिटेड के महाप्रबंधक वाय. राघवेलु ने कहा, “ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूत करते हैं और हमारी पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखते हैं।”
समिति के अध्यक्ष मनोज छालीवाल, सचिव चंचल देवांगन, उपाध्यक्ष सिंगासन गुप्ता, कोषाध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता सहित निर्माण बघेल, रूपेश मंडल और बैलाडीला व्यापारी कल्याण संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। मंच संचालन दिनेश कुमार साहू ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि निर्णायक मंडल में निर्मल बघेल और रूपेश मंडल शामिल थे।
अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम त्योहारों की गरिमा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किरंदुल के निवासियों ने इस महापर्व को यादगार बनाते हुए सूर्य देव को नमन किया और नई उम्मीदों के साथ वर्ष की शुरुआत की।

