*एनएमडीसी क्षेत्र में सब्जी बाजार की अवैध अराजकता: साफ-सुथरी कॉलोनी अब कचरे और सड़ांध की बदबू से जूझ रही, स्वास्थ्य संकट की घंटी बज रही!*

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*एनएमडीसी क्षेत्र में सब्जी बाजार की अवैध अराजकता: साफ-सुथरी कॉलोनी अब कचरे और सड़ांध की बदबू से जूझ रही, स्वास्थ्य संकट की घंटी बज रही!*

किरंदुल, छत्तीसगढ़ (विशेष संवाददाता): एनएमडीसी की प्रतिष्ठित कॉलोनी, जो कभी अपनी स्वच्छता और व्यवस्थित जीवनशैली के लिए जानी जाती थी, अब अवैध सब्जी और मांसाहारी दुकानों के कारण कचरे के ढेर में तब्दील हो चुकी है। किरंदुल का पारंपरिक सब्जी बाजार छोटा पड़ने से व्यापारियों ने एनएमडीसी क्षेत्र के डीएवी स्कूल, सिविल कार्यालय और फुटबॉल ग्राउंड के आसपास घुसपैठ कर ली है। सुकमा के झींगा मछली व्यापारी और किरंदुल के मंशाहार व सब्जी विक्रेताओं ने यहां दुकानें सजा ली हैं, लेकिन शाम ढलते ही ये ‘व्यापारी’ रोड पर सब्जी का कचरा और मांस का अपशिष्ट बेरहमी से फेंक देते हैं। नतीजा? सड़न की घिनौनी बदबू से वातावरण जहरीला हो गया है, और एनएमडीसी कर्मचारियों के घरों में रहना नर्क जैसा हो चला है। यह न केवल स्वास्थ्य आपदा का खतरा पैदा कर रहा है, बल्कि कॉलोनी की साफ-सुथरी छवि को धूल चटा रहा है। गांधीनगर का हाट बाजार खाली पड़ा सड़ रहा है, जबकि यहां अवैध बाजार फल-फूल रहा – क्या यह प्रशासन की लापरवाही का नंगा नजारा नहीं?

एनएमडीसी कर्मचारियों की चीखें अब हवा में गूंज रही हैं। जिन घरों की दहलीज इन अवैध दुकानों से सटे हैं, वहां रोजाना शाम को सड़ते कचरे की बदबू घरों में घुस आती है, जिससे रहना असहनीय हो गया है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह बदबू इतनी घातक है कि सांस लेना दूर्णिम हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है – संक्रमण, एलर्जी और श्वसन रोगों का डर सताने लगा है। हमारी कॉलोनी, जो हमेशा मिसाल बनी रहती थी, अब कचरा बीनने वालों का अड्डा बन गई है।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रही है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

कहानी और भी शर्मनाक है। किरंदुल का पुराना डबल स्टोरी डीएवी स्कूल के सामने और फुटबॉल ग्राउंड के ठीक सामने अब यह अवैध बाजार पनप रहा है, जो कभी खेलकूद और शिक्षा का केंद्र था। वह बाजार जो कभी समृद्धि का प्रतीक था, अब इतना छोटा हो गया है कि व्यापारी बाहर भाग रहे हैं। दूसरी ओर, गांधीनगर का हाट बाजार – जो एक विकसित बाजार के रूप में तैयार किया गया था – सुनसान पड़ा सड़ रहा है। यह प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण है: क्या स्थानीय निकाय और एनएमडीसी प्रबंधन सो रहे हैं? अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? व्यापारियों की मनमानी से न केवल सड़कें गंदी हो रही हैं, बल्कि कॉलोनी की संपत्ति मूल्य भी गिरने का खतरा मंडरा रहा है।

एनएमडीसी को अब जागने की सख्त जरूरत है! यह उनकी जिम्मेदारी है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कॉलोनी की गरिमा की रक्षा करें। स्थानीय प्रशासन से मांग की जा रही है कि अवैध दुकानों पर तत्काल छापा मारें, कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करें और गांधीनगर हाट बाजार को पुनर्जीवित करें। अगर यह अराजकता जारी रही, तो कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर हो सकते हैं। एनएमडीसी क्षेत्र की स्वच्छता, जो कभी गौरव का विषय थी, अब बदनामी का कारण बन रही है – समय आ गया है कि जिम्मेदार लोग कड़े कदम उठाएं, वरना यह घाव और गहरा हो जाएगा!

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