*किरंदुल में NMDC क्षेत्र: स्वच्छ भारत के सपने को चुनौती देता कबाड़ का अंबार कचरा और धूल का गुबार*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 28 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित किरंदुल, जिसे ‘कुबेर नगरी’ कहा जाता है, NMDC की लौह अयस्क खदानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां भारत की सबसे बड़ी आयरन ओर माइनिंग होती है, लेकिन इसी क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। NMDC के किरंदुल परियोजना के वार्ड नंबर 9 और 10 में कबाड़ के वाहनों का अंबार और धूल की समस्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को खुली चुनौती दे रही है।
स्थानीय निवासियों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मुख्य सड़क पर 20-25 से अधिक कबाड़ दोपहिया और चारपहिया वाहन वर्षों से पड़े हैं। कुछ जगहों पर तो कबाड़ियों ने अपना स्थायी ‘जुगाड़’ बना रखा है, जहां पुराने वाहनों और स्क्रैप को रखा जाता है। यह न केवल क्षेत्र की सुंदरता को खराब कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा भी बन रहा है।
हाल ही में NMDC के CMD के किरंदुल दौरे के दौरान पूरे क्षेत्र को ‘दुल्हन की तरह’ सजाया गया था। बस स्टैंड के आसपास खड़ी बसों को हटाने के लिए 6 गार्ड्स की ड्यूटी लगाई गई और उन्हें सफलतापूर्वक हटा लिया गया। लेकिन इसी जगह खड़ी एक कबाड़ चारपहिया गाड़ी को हटाने की हिम्मत किसी ने नहीं की। शिकायतकर्ता पूछते हैं कि क्या उच्च अधिकारियों के दौरे के समय दिखावटी सफाई काफी है, जबकि स्थायी समाधान नहीं अपनाया जा रहा?
किरंदुल शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है—एक NMDC का टाउनशिप क्षेत्र, जहां सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है, और दूसरा नगर पालिका क्षेत्र। NMDC की खदानों से निकलने वाली लौह अयस्क की धूल ने नगर पालिका वाले हिस्से को ‘धूल का गुबार’ बना दिया है। सड़कों पर पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा, जिससे स्थानीय लोग धूलजनित बीमारियों से जूझ रहे हैं। पुरानी रिपोर्ट्स में भी बैलाडिला खदानों से निकलने वाली ‘लाल धूल’ और टेलिंग्स के कारण शंकिनी-दंकिनी नदियों के प्रदूषण की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित करती हैं।
NMDC देश की सबसे बड़ी आयरन ओर उत्पादक कंपनी है और किरंदुल-बचेली कॉम्प्लेक्स से इसका बड़ा हिस्सा आता है। कंपनी उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है—2030 तक 100 मिलियन टन का लक्ष्य—और स्लरी पाइपलाइन, नई स्क्रीनिंग प्लांट्स जैसी परियोजनाएं चला रही है। लेकिन स्थानीय स्तर पर स्वच्छता और कबाड़ प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान की कमी दिख रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश में सफाई अभियान चल रहे हैं, लेकिन किरंदुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इसे प्रभावी बनाने की जरूरत है। स्थानीय लोग और NMDC अधिकारियों से अपील है कि कबाड़ हटाओ अभियान चलाकर और नियमित धूल नियंत्रण उपाय अपनाकर इस ‘कुबेर नगरी’ को स्वच्छ और सुंदर बनाया जाए। क्या NMDC और स्थानीय प्रशासन इस चुनौती को स्वीकार करेंगे? यह देखने वाली बात होगी।

