*किरंदुल में बिना लाइसेंस ड्राइवरों का खुला खेल: NMDC माइनिंग क्षेत्र में सवालों के घेरे में CISF और ठेका प्रथा*

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*किरंदुल में बिना लाइसेंस ड्राइवरों का खुला खेल: NMDC माइनिंग क्षेत्र में सवालों के घेरे में CISF और ठेका प्रथा*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 08 दिसंबर 2025

बस्तर के किरंदुल में इन दिनों चौंकाने वाला नजारा देखने को मिल रहा है। NMDC की विशाल खदानों और आसपास के इलाकों में सैकड़ों चार पहिया वाहन (जीप, बोलेरो, पिकअप आदि) बेखौफ दौड़ रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश वाहनों के ड्राइवरों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि ठेका प्रथा के चलते कम तनख्वाह पर बिना लाइसेंस वाले ड्राइवरों को रखा जा रहा है, जिससे बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा हो गया है।

खदानों के अंदर पुलिस की पहुंच से बाहर, CISF चेकपोस्ट पर सवाल

NMDC का माइनिंग क्षेत्र अर्ध-सैन्य बल CISF की सुरक्षा में है। हर वाहन को प्रवेश के लिए CISF का मुख्य गेट और कई चेकपोस्ट पार करना पड़ता है। फिर भी बिना लाइसेंस ड्राइवरों वाले वाहन बेरोकटोक अंदर-बाहर हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का सवाल है –

“क्या CISF सिर्फ गेट पर सलामी लेने के लिए तैनात है या वाहन और ड्राइवर की वास्तविक जांच भी होती है?”

अगर माइनिंग क्षेत्र में कोई बड़ा हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?

बिना लाइसेंस ड्राइवर की?

वाहन मालिक की?

या सुरक्षा में तैनात CISF की?

कम तनख्वाह का लालच और ड्राइवर यूनियन का दबाव

सूत्रों की मानें तो ठेका मालिक लाइसेंसधारी ड्राइवरों को 20-25 हजार रुपये तक तनख्वाह देते हैं, जबकि बिना लाइसेंस वाले ड्राइवर 10-12 हजार में ही तैयार हो जाते हैं। इसी लालच में मालिक जानबूझकर अनट्रेंड और बिना लाइसेंस वाले चालकों को रख रहे हैं।

दूसरी तरफ कुछ ड्राइवर यूनियन पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि यूनियन बिना लाइसेंस वालों से भी सदस्यता शुल्क वसूलकर उन्हें मेंबर बना रही है और ठेका मालिकों पर दबाव बनाती है कि “हमारे मेंबर को ही गाड़ी चलाने दो, वरना काम बंद”। इस दबाव की राजनीति में सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।

पुलिस का रवैया: शहर में तो चलान, माइनिंग क्षेत्र में खामोशी

किरंदुल शहर में पुलिस कभी-कभी बिना लाइसेंस वालों का चलान काटती है, लेकिन NMDC माइनिंग क्षेत्र में उसकी पहुंच न के बराबर है। नतीजा – बिना लाइसेंस ड्राइवर खदानों के अंदर खुलेआम गाड़ियां दौड़ा रहे हैं।

अब सवाल यह है:

क्या किरंदुल पुलिस NMDC के साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाएगी?

क्या CISF अपने चेकपोस्ट पर ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्य जांच शुरू करेगी?

क्या NMDC ठेका प्रथा में न्यूनतम योग्यता और लाइसेंस को अनिवार्य करेगी?

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से माइनिंग क्षेत्र में बिना लाइसेंस ड्राइवरों पर प्रतिबंध लगाया जाए, नहीं तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है – और उसकी कीमत पूरे क्षेत्र को चुकानी पड़ेगी।

किरंदुल की यह खबर अब सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं रही। यह ठेका प्रथा, सुरक्षा चूक और जिम्मेदारी से भागते सिस्टम की उस कड़वी सच्चाई का आईना है जो देश के कई खनन क्षेत्रों में दिखाई देती है।

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