*किरंदुल का ‘गौरव पथ’ अब ‘कचरा पथ’ बन गया स्वच्छ भारत मिशन को ठेंगा दिखाता किरंदुल नगरपालिका का काला सच*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 4 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ की खनिज नगरी किरंदुल, जिसे कभी ‘कुबेर नगरी’ कहा जाता था, आज अपने ही गौरव पथ पर कचरे के ढेर और झाड़-झंखाड़ के जंगलों से शर्मसार हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ यहाँ धूल-मिट्टी और कचरे में दबकर रह गया है। शहर का सबसे प्रमुख और सुंदर माना जाने वाला गौरव पथ आज गंदगी का अम्बार बन चुका है। महीनों से सफाई न होने के कारण जगह-जगह कचरे के पहाड़ खड़े हैं, जंगली झाड़ियाँ उग आई हैं और कई जगह तो कबाड़ वाहन सड़क किनारे पड़े-पड़े सड़ रहे हैं, जिनके नीचे कचरे का ढेर लगा हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किरंदुल नगरपालिका की सफाई व्यवस्था पूरी तरह राम भरोसे चल रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका के सफाई कर्मचारी किरंदुल शहर की सफाई करने की बजाय पास के ग्राम पंचायत कोडेनार की सड़कें चमकाने में दिन-रात जुटे रहते हैं।
*सफाई कर्मचारियों का खुलासा – “आदेश ऊपर से है”*
जब स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने सफाई कर्मचारियों से पूछा कि शहर गंदगी में डूबा है और आप पंचायत की सफाई कर रहे हैं, तो कर्मचारियों ने बेबाकी से जवाब दिया –
“हम तो सिर्फ़ आदेश का पालन कर रहे हैं। मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) शशिभूषण महापात्र का सीधा आदेश है कि कोडेनार पंचायत की सफाई करो। हम अपना काम कर रहे हैं, अपना काम बनता… बाकी जनता जाए अस्पताल।”
*उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने CMO पर लगाया सीधा आरोप*
जब इस पूरे मामले की जानकारी किरंदुल नगरपालिका के उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी को दी गई और उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने बिना लाग-लपेट के मुख्य नगरपालिका अधिकारी शशिभूषण महापात्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा पहले अपना घर साफ करें फिर पड़ोसी के घर में झांके सीएमओ–
“हमारे CMO साहब को नेतागिरी करने से फुर्सत ही नहीं मिलती। हर कार्यक्रम में स्टेज पर बैठना, माला पहनना, फोटो खिंचवाना – यही उनका असली काम रह गया है। अगर इतना ही शौक है तो इस्तीफ़ा दे दें और पूर्णकालिक नेता बन जाएँ।”
उपाध्यक्ष ने आगे कहा,
“महापात्र साहब को कोडेनार ग्राम पंचायत से ऐसा क्या लगाव हो गया है कि नगरपालिका की सफाई छोड़कर रोज़ सुबह-शाम वहाँ खुद खड़े होकर सफाई करवाते हैं और फोटो खिंचवाते हैं? शक होता है कि कहीं नगरपालिका के कर्मचारियों की सैलरी और संसाधनों का इस्तेमाल कर कोडेनार पंचायत से बिल पास करवाकर भ्रष्टाचार तो नहीं किया जा रहा? वरना बिना स्वार्थ के कोई अधिकारी अपनी नगरपालिका को गंदगी में डुबोकर पड़ोस की पंचायत चमकाने थोड़े ही लगेगा।”
*जनता में आक्रोश, स्वच्छ भारत अभियान पर सवाल*
किरंदुल के नागरिकों में भारी रोष है। व्यापारी, युवा, महिलाएँ – सभी यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत सपना किरंदुल में क्यों विफल हो रहा है? क्या सिर्फ़ फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर वाहवाही बटोरने के लिए स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है?
स्थानीय निवासी संतोष कुमार कहते हैं,
“गौरव पथ पर चलना मुश्किल हो गया है। बदबू, मच्छर, कचरा – सब कुछ है। लेकिन हमारे CMO साहब कोडेनार में फोटोशूट करवा रहे हैं। यह दोहरा मापदंड क्यों?”
अब सवाल यह है –
क्या किरंदुल नगरपालिका के संसाधनों का दुरुपयोग कर कोडेनार पंचायत से पैसे ऐंठे जा रहे हैं?
क्या CMO शशिभूषण महापात्र व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए जनता की गाढ़ी कमाई को कचरे में डाल रहे हैं?
जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार इस मामले में कब संज्ञान लेगी?
किरंदुल की जनता अब जवाब मांग रही है। अगर यही हाल रहा तो ‘कुबेर नगरी’ जल्द ही ‘कचरा नगरी’ के नाम से जानी जाने लगेगी।
यह रिपोर्ट किरंदुल के उन तमाम नागरिकों की आवाज़ है जो अपने शहर को फिर से स्वच्छ और गौरवपूर्ण देखना चाहते हैं।
(रिपोर्ट: सी ज़ी संविधान न्यूज़ किशोर कुमार रामटेके , किरंदुल)


