*बीजापुर के अति दुर्गम गांव गमपुर में पहली बार पहुंची जनपद पंचायत की टीम, 60 मनरेगा जॉब कार्ड और 68 वोटर आईडी कार्ड बांटे*
बीजापुर, 20 नवंबर 2025
बस्तर संभाग के सबसे दुर्गम इलाकों में शुमार ग्राम पंचायत गमपुर (जो दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर की त्रि-जंक्शन सीमा पर स्थित है) में 18 नवंबर को पहली बार विकासखंड स्तर का कोई अधिकारी पहुंचा। जनपद पंचायत बीजापुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) पी.आर. साहू के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम ने जंगल, बीहड़, पहाड़ और मलगेर नदी पार कर गांव पहुंचकर इतिहास रच दिया।
खतरनाक रास्तों को पार कर 24 किमी बाइक और 3 किमी पैदल चलकर पहुंची टीम
टीम बीजापुर से दंतेवाड़ा-बचेली होते हुए किरंदुल पहुंची। वहां से 24 किमी मोटरसाइकिल यात्रा और उसके बाद बंजर पहाड़ी पर 3 किलोमीटर पैदल चढ़ाई व 6 छोटे-छोटे नालों को पार करके गमपुर पहुंची। CEO साहू ने बताया कि सुकमा के गौटपल्ली में सुरक्षा कैंप स्थापित होने के बाद ही यह गांव नियद नेल्लानार योजना में शामिल हो सका और प्रशासन की पहुंच संभव हुई।
ग्रामीणों के चेहरे खिले, मिले ये बड़े तोहफे
60 परिवारों को मौके पर मनरेगा जॉब कार्ड वितरित
68 ग्रामीणों को नया वोटर आईडी कार्ड (EPIC) दिया गया
सभी शासकीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई
पूर्व सरपंच धन्नूराम मंडावी व ग्रामीण सुभाष मंडावी की मांग पर CEO ने बताया कि कलेक्टर संबित मिश्रा ने बिना मांग के ही गांव में 5 आंगनवाड़ी भवन, पंचायत भवन और तालाब निर्माण की स्वीकृति दे दी है
59 स्वीकृत PMAY आवासों का काम तुरंत शुरू कराने के निर्देश
आधार, बैंक खाता और राशन दुकान की पुरानी पीड़ा दूर होगी
गांव के 359 परिवारों में अभी सिर्फ 102 लोगों के पास आधार कार्ड, 98 के पास वोटर कार्ड और मात्र 68 के पास बैंक खाता है। ग्रामीणों ने पीड़िया में आधार शिविर और राशन दुकान गंगालूर से हटाकर पीड़िया में खोलने की मांग की। CEO साहू ने आश्वासन दिया कि बहुत जल्द पीड़िया में सैचुरेशन कैंप लगाकर सभी को आधार, बैंक खाता, पेंशन, महतारी वंदन योजना, उज्ज्वला योजना आदि का लाभ दिलाया जाएगा।
प्रशासन की इस अनूठी पहल पर ग्रामीणों में खुशी की लहर
लंबे समय से उपेक्षित इस गांव में प्रशासन की टीम का पहुंचना और तुरंत योजनाओं का लाभ देना ग्रामीणों के लिए दिवाली से कम नहीं। गांव वालों ने कहा, “अब लगता है सरकार सच में हम तक पहुंच गई है।”
कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में हुई यह मुहिम बस्तर के दुर्गम इलाकों में विकास और विश्वास की नई मिसाल बन गई है।

