*किरंदुल का दोहरा चेहरा: CMD के आगमन पर जगमगाता एनएमडीसी क्षेत्र, नगरपालिका भाग अंधेरे में क्यों? क्या किसी केंद्रीय नेता के आने का इंतजार कर रहा हो।*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 20 अप्रैल 2026 – कल 21 अप्रैल को एनएमडीसी प्रोजेक्ट किरंदुल में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का दौरा होने जा रहा है। और जैसे ही यह खबर फैली, एनएमडीसी के किरंदुल क्षेत्र में दिवाली जैसी चमक छा गई। सड़कें धुलकर आईने की तरह चमक रही हैं, दीवारें, चौक-चौराहे, खंभे – हर जगह रोशनी और साफ-सफाई का माहौल है। लेकिन ठीक उसी किरंदुल में नगरपालिका क्षेत्र अभी भी उसी पुरानी हालत में है – जैसे किसी बड़े नेता के आने का इंतजार कर रहा हो।
यह दृश्य नया नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दो महीने में सीएमडी का आगमन होना आवश्यक है इसको मुख्य कारण है की एनएमडीसी क्षेत्र को “स्पेशल” तैयार किया जाता है। सड़कें धोई जाती हैं, लाइटें जलाई जाती हैं, दीवारें रंगी जाती हैं। पूरा इलाका एकदम नयी तस्वीर पेश करता है। ठीक वैसे ही जैसे सालों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दंतेवाड़ा जिले के जवांगा हेलीपैड पर चॉपर उतरने और सड़क मार्ग से दंतेवाड़ा हाई स्कूल मैदान पहुंचने के दौरान गीदम-जवांगा से लेकर दंतेवाड़ा तक की सड़कें चकाचक हो गई थीं। दो दिनों में ही पूरा इलाका मेट्रो शहर जैसा नजर आने लगा था।
*लेकिन आज सवाल उठ रहा है – किरंदुल एक है या दो?*
एनएमडीसी किरंदुल और नगरपालिका किरंदुल के बीच यह खाई क्यों? एक तरफ जगमगाता हुआ औद्योगिक क्षेत्र, दूसरी तरफ वही पुराना, साधारण नगरपालिका क्षेत्र। लोग पूछ रहे हैं – क्या यह भेदभाव जानबूझकर किया जा रहा है? जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहे? या फिर एनएमडीसी के अधिकारी, कर्मचारी और यूनियन इसमें शामिल हैं? आखिर किसकी साजिश है किरंदुल को दो हिस्सों में बांटने की?
स्थानीय निवासी एकता की बात करते हैं। वे कहते हैं, “हम सब एक किरंदुल में रहते हैं। एनएमडीसी किरंदुल पूरे किरंदुल के लिए है। फिर क्षेत्र का बंटवारा क्यों?” जब सीएमडी या कोई बड़ा नेता आता है तो सिर्फ एनएमडीसी क्षेत्र को चमकाया जाता है, बाकी इलाका उसी हाल में छोड़ दिया जाता है। क्या नगरपालिका क्षेत्र को भी उसी चमक का हक नहीं?
यह चिंतन का विषय है। विकास का मतलब सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए। अगर एनएमडीसी किरंदुल की चमक पूरे किरंदुल को रोशन कर सकती है, तो नगरपालिका क्षेत्र को भी उसी स्तर पर लाने की जिम्मेदारी किसकी है? जनप्रतिनिधियों की? प्रशासन की? या फिर एनएमडीसी प्रबंधन की?
कल सीएमडी के दौरे पर जब एनएमडीसी क्षेत्र दिवाली की तरह जगमगाएगा, तो पूरे किरंदुल के लोगों के मन में एक ही सवाल घूम रहा होगा – कब आएगा वह दिन जब पूरा किरंदुल, बिना किसी भेदभाव के, एक साथ जगमगाएगा?

