*किरंदुल में 14 वर्ष से अधूरा सामुदायिक भवन: जनता की उम्मीदें और सरकारी फंड की लूट? भ्रष्टाचार की साजिश का शिकार बना वार्ड नंबर 1 का निर्माण कार्य*

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*किरंदुल में 14 वर्ष से अधूरा सामुदायिक भवन: जनता की उम्मीदें और सरकारी फंड की लूट? भ्रष्टाचार की साजिश का शिकार बना वार्ड नंबर 1 का निर्माण कार्य*

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 19 अप्रैल 2026 – दंतेवाड़ा जिले की कुबेर नगरी किरंदुल नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 1 में 14-15 वर्ष पहले शुरू किया गया सामुदायिक भवन आज भी अधूरा पड़ा है। न छत है, न कोई प्रगति। मोहल्ले के लोग शादी-विवाह, सामाजिक आयोजन और सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए इस भवन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन तीन पार्षदों के कार्यकाल बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य रुका हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह भवन अब भ्रष्टाचार की भेंट हो नहीं चढ़ चुका है और कहीं ऐसा तो नहीं की ठेकेदार ने पूरा पैसा निकालकर काम अधूरा छोड़ दिया।

वार्ड नंबर 1 के बंगाली कैंप कैंप इलाके में यह छोटा सामुदायिक भवन (मंगल भवन) लगभग 14 साल पहले शुरू हुआ था। उद्देश्य स्पष्ट था – मोहल्ले के गरीब-मध्यम वर्ग के लोगों को शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक सस्ता और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराना। लेकिन आज तक भवन की दीवारें खड़ी हैं, पर छत डालने का काम ही नहीं हुआ। स्थानीय निवासी बताते हैं कि “इतने सालों में तीन पार्षद आ चुके और चले गए, लेकिन भवन में कोई हलचल नहीं हुई।”

लोगों का सवाल – पैसा कहां गया?

स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कहीं ऐसा तो नहीं कि ठेकेदार ने निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर पूरा भुगतान वसूल लिया हो। “सरकारी फंड से लाखों रुपये स्वीकृत हुए थे। काम शुरू हुआ, दीवारें बनीं, लेकिन उसके बाद ठेकेदार गायब। अब न तो भवन पूरा हो रहा है और न ही कोई जवाबदेही तय हो रही है,” एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

यह मामला सिर्फ एक भवन का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां विकास कार्यों की सख्त निगरानी की जरूरत है, वहां ऐसे लंबे समय से लटके प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार की पुष्टि करते हैं। नगरपालिका प्रशासन और पूर्व पार्षदों पर भी सवाल उठ रहे हैं – क्या उन्होंने ठेकेदार पर नजर रखी? क्या फंड की मॉनिटरिंग हुई? या फिर यह सिस्टमेटिक लूट का हिस्सा था?

भ्रष्टाचार का पैटर्न?

किरंदुल नगरपालिका क्षेत्र में पहले भी विकास कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें आ चुकी हैं। वार्ड 1 में ही कंक्रीट सड़क निर्माण को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। ऐसे में यह सामुदायिक भवन का मामला और गंभीर हो जाता है। अगर ठेकेदार ने बिल पास करा लिए और काम अधूरा छोड़ दिया है तो यह न सिर्फ फंड की बर्बादी है, बल्कि जनता के साथ धोखा भी है।

स्थानीय लोग अब RTI दाखिल करने और जिला प्रशासन से जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया – “क्या 14 साल में एक छोटे से भवन की छत डालना इतना मुश्किल था? या फिर पैसा बंट गया और काम रुक गया?”

प्रशासन की चुप्पी

अभी तक नगरपालिका परिषद किरंदुल या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या जवाब नहीं आया है। यदि यह भवन वाकई 14 साल से लटका है तो यह छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।

जनता अब इंतजार कर रही है – क्या इस बार कोई पार्षद, कोई अधिकारी या कोई जांच एजेंसी इस अधूरे भवन की कहानी को पूरा करेगी? या फिर यह भी उन सैकड़ों अधूरे प्रोजेक्ट्स की फेहरिस्त में शामिल होकर भुला दिया जाएगा, जहां भ्रष्टाचार ने विकास को हमेशा के लिए रोक दिया?

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