*किरंदुल नगरपालिका में अवैध वसूली का धमाकेदार खुलासा! 50 रुपये की आधिकारिक पर्ची पर 14 चक्का ट्रकों से 100-200-500 रुपये तक ठगी, ड्राइवरों को धमकाया-चाबी छीनी, महीनों से चल रहा रैकेट*

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*किरंदुल नगरपालिका में अवैध वसूली का धमाकेदार खुलासा! 50 रुपये की आधिकारिक पर्ची पर 14 चक्का ट्रकों से 100-200-500 रुपये तक ठगी, ड्राइवरों को धमकाया-चाबी छीनी, महीनों से चल रहा रैकेट*

किरंदुल (बस्तर)। नगरपालिका की अस्थाई दखल शुल्क वसूली का ठेका लेने वाले ठेकेदार के कर्मचारियों ने शहर में घुसने वाले 14 चक्का वाहनों को अपना “आसान शिकार” बना रखा है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, आधिकारिक दर सिर्फ 50 रुपये है, लेकिन कर्मचारी मनमानी वसूली कर रहे थे। किसी से 100 रुपये, किसी से 200 रुपये तो किसी बाहरी ड्राइवर से 500 रुपये तक ऐंठ लिए जा रहे था। लंबी गाड़ी आने पर ड्राइवर को डराया-धमकाया जाता था- “500 लगेगा, नहीं दोगे तो गाड़ी नहीं छोड़ेंगे।”

रोजाना 4 से 6 ट्रक किरंदुल में आते हैं। बाहर से आने वाले ड्राइवर डर के मारे चुपचाप पैसे देते थे। कई बार तो वाहन चालकों से बहस हो चुकी है। सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों ने तो ट्रक की चाबी तक निकाल ली थी, जब तक ड्राइवर ने मनमाना पैसा नहीं दिया। यह खेल महीनों से धड़ल्ले से चल रहा था, जिससे किरंदुल शहर की छवि पूरे देश में खराब हो रही थी।

अब भंडाफोड़!

पूरे साक्ष्य (वीडियो, ऑडियो, गवाहों के बयान और लिखित शिकायत) के साथ नगरपालिका को शिकायत कर दी गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से ठेकेदार के कर्मचारियों के नाम और उनके द्वारा की गई जबरन वसूली का जिक्र है।

अब सवाल नगरपालिका मुख्य अधिकारी पर

क्या मुख्य अधिकारी इस घोटाले पर सख्त कार्रवाई करेंगे?

ठेकेदार के कर्मचारियों पर तुरंत मुकदमा दर्ज होगा या नहीं?

अवैध वसूली का पैसा वसूल कर प्रभावित ड्राइवरों को लौटाया जाएगा या नहीं?

क्या ठेके की जांच होगी और ठेकेदार पर भी कार्रवाई होगी?

या फिर रसूखदारों के दबाव में सिर्फ खानापूर्ति वाली रिपोर्ट लिखकर मामला दबा दिया जाएगा?

किरंदुल का हर नागरिक अब यही सवाल पूछ रहा है। अगर मुख्य अधिकारी ने अब भी आँखें मूंद लीं तो यह साफ हो जाएगा कि अवैध वसूली का खेल नगरपालिका की जानकारी या मिलीभगत के बिना नहीं चल सकता था।

किरंदुल की जनता अब इंतजार कर रही है-

कार्रवाई या खानापूर्ति?

सच्चाई जल्द सामने आएगी।

(न्यूज़ विश्लेषण: यह सिर्फ एक ठेकेदार कर्मचारी का खेल नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़ांध है। अगर मुख्य अधिकारी अब भी चुप रहे तो पूरा किरंदुल जान जाएगा कि यहां “अस्थाई दखल शुल्क” नहीं, “अस्थाई लूट शुल्क” चल रहा था।)

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