*किरंदुल-बचेली के प्रकाश विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई पर ‘मोनोपॉली’ का साया: 1500 छात्र-अभिभावक परेशान, खुली बाजार में किताबें क्यों नहीं?*
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 26 मार्च 2026 – दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल-बचेली क्षेत्र में संचालित प्रकाश विद्यालय (NMDC प्रायोजित स्कूल) के छात्रों और अभिभावकों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल स्कूल परिसर में ही किताबों, यूनिफॉर्म, बेल्ट, टाई और मोजे की खुली बिक्री का मामला स्थानीय अखबारों में छा गया था। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के आदेश के बाद परिसर में बिक्री रोकी गई, लेकिन इस बार नई समस्या पैदा हो गई है – स्कूल की किताबें पूरे क्षेत्र में सिर्फ एक ही दुकान पर उपलब्ध हैं। इससे 1500 के करीब छात्रों को महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं और अभिभावकों को दूर-दूर भागना पड़ रहा है।
स्थानीय किताब विक्रेताओं और अभिभावकों का आरोप है कि प्रकाश विद्यालय प्रबंधन और किताबों के डीलर के बीच ‘कमीशन का खेल’ चल रहा है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने फोन पर इसे ‘गलत’ बताया और कहा कि स्कूल की किताबें सभी दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए। अब सवाल यह है कि जिला कलेक्टर इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लेकर किताबों को खुली बाजार में उपलब्ध कराएंगे या नहीं?
प्रकाश विद्यालय के छात्रों की मुसीबतें: मुद्दे बिंदुवार
1. पिछले साल स्कूल परिसर में ही ‘खुली लूट’
पिछले वर्ष किरंदुल प्रकाश विद्यालय के अंदर ही किताबें, यूनिफॉर्म, बेल्ट, टाई और मोजे बेचे जा रहे थे। स्थानीय अखबारों में प्रमुखता से खबर आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने हस्तक्षेप किया और परिसर में बिक्री पर रोक लगा दी।
2. इस साल नई समस्या: सिर्फ एक दुकान पर किताबें उपलब्ध
रोक के बाद भी समस्या बढ़ गई। प्रकाश विद्यालय की किताबें पूरे किरंदुल-बचेली क्षेत्र में सिर्फ एक ही दुकान पर मिल रही हैं। यह दुकान मात्र 6 महीने पहले खुली है। पूरे जिले में 50 से ज्यादा किताबों की दुकानें हैं, फिर भी सिर्फ यही एक दुकान स्कूल की किताबें बेच रही है।
3. स्थानीय बाजार में किताबें क्यों नहीं?
किरंदुल में 7 और बचेली में 5 किताबों की दुकानें हैं, लेकिन इनमें से किसी में भी प्रकाश विद्यालय की किताबें नहीं हैं। 1500 छात्रों वाले दोनों स्कूलों (किरंदुल और बचेली) के लिए यह एक तरह की ‘मोनोपॉली’ बन गई है।
4. डीलर ने बाहर की दुकानों को किताबें देने से इनकार किया
राजीव बुक डिपो के मालिक राजीव ने बताया कि उन्होंने प्रकाश विद्यालय की किताबों के डीलर से संपर्क किया और मांग की, लेकिन डीलर ने साफ मना कर दिया। डीलर का कहना था – “किताबें प्रकाश विद्यालय में जाती हैं और स्कूल ने साफ मना किया है कि बाहरी बुक शॉप वालों को किताबें न दी जाएं।” दूसरे किताब विक्रेताओं ने भी यही बात कही।
5. बचेली में अभी भी स्कूल के अंदर खुली बिक्री
किरंदुल में बिक्री रोकी गई, लेकिन बचेली प्रकाश विद्यालय में अब भी स्कूल परिसर के अंदर किताबों और अन्य सामान की ‘खुली लूट’ जारी है। स्थानीय किताब विक्रेता आरोप लगाते हैं कि स्कूल प्रबंधन बड़ी कमीशन की साजिश में शामिल है, जिससे किताबें खुले बाजार में नहीं आने दी जा रही हैं।
6. अभिभावकों और बच्चों पर दोहरी मार
महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
दूर-दूर जाने का समय और खर्च बढ़ गया है।
एक ही दुकान पर भीड़ और किल्लत।
स्कूल का ‘एकतरफा राज’ जारी रहने से प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है।
7. जिला शिक्षा अधिकारी का बयान
जिला शिक्षा अधिकारी से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने कहा, “यह गलत है। किसी भी विद्यालय की किताबें सभी दुकानों में उपलब्ध होनी चाहिए।”
क्या कहते हैं स्थानीय लोग?
किताब विक्रेता साफ कहते हैं – “अगर किताबें खुले बाजार में आ जाएंगी तो बच्चों को सस्ते दाम में मिलेंगी और स्कूल का एकतरफा राज खत्म हो जाएगा।”
अभिभावकों की मांग:
जिला कलेक्टर तुरंत संज्ञान लें, प्रकाश विद्यालय की किताबों को सभी दुकानों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें और कमीशन के खेल की जांच कराएं। ताकि माइनिंग क्षेत्र के इन गरीब और आदिवासी बच्चों की पढ़ाई पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
यह मामला सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार और पारदर्शिता का सवाल है। क्या जिला प्रशासन अब इस ‘दर्द भरी कहानी’ को सुनकर कार्रवाई करेगा? स्थानीय पत्रकारों और अभिभावकों की नजर अब कलेक्टर कार्यालय पर टिकी है।

