*दंतेवाड़ा जिले में बड़ा अनुशासन उल्लंघन: कुंवाकोंडा समेली संकुल के विद्यालय में हेडमास्टर शिक्षिका और उनके पति मिलकर अन्य शिक्षकों पर दबाव!*
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़): समेली संकुल क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय में अब मामला और गंभीर हो गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला हेडमास्टर (प्रधान शिक्षिका) अपने सेवानिवृत्त पति को साथ लेकर स्कूल आ रही हैं और दोनों मिलकर अन्य शिक्षकों पर दबाव बनाते नजर आ रहे हैं। पति पहले से ही स्कूल के दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे थे, डाँट-फटकार लगाते थे, धमकियाँ देते थे और अब शिक्षिका भी इस दबदबे में पूरी तरह शामिल दिख रही हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि हेडमास्टर अपनी पोजीशन का दुरुपयोग कर पति के साथ मिलकर स्टाफ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे स्कूल का माहौल तनावपूर्ण हो गया है। यह न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन भी है।
सरकारी नियम साफ हैं – कोई हस्तक्षेप नहीं!
छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग और सामान्य सेवा आचरण नियमों (Conduct Rules) के अनुसार:
किसी भी महिला अधिकारी/शिक्षिका के पति को उनके कार्यस्थल पर कोई प्रशासनिक, शिक्षण या अन्य गतिविधि में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं है।
गैर-सरकारी व्यक्ति (पति सहित) स्कूल के कार्यों में दखल नहीं दे सकता।
महिला कर्मचारी की स्वायत्तता और कार्यक्षमता को बनाए रखना अनिवार्य है; पति या रिश्तेदार प्रॉक्सी के रूप में काम नहीं कर सकते।
ऐसे मामलों में विभागीय जांच, चेतावनी, निलंबन या सख्त कार्रवाई का प्रावधान है (जैसा कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मामलों में देखा गया है, जहां पति की जगह पढ़ाने पर शिक्षिका/विभाग ने कार्रवाई की)।
यह मामला क्यों गंभीर?
महिला हेडमास्टर का पति के साथ मिलकर अन्य शिक्षकों पर दबाव बनाना पूरे स्कूल सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।
बच्चों की शिक्षा और स्कूल का माहौल प्रभावित हो रहा है।
यह महिला सशक्तिकरण के खिलाफ है, क्योंकि पद पर बैठी महिला को बिना दबाव के स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार है – न कि पति के प्रभाव में काम करना।
सकारात्मक कदम की उम्मीद
यह खबर स्थानीय सूत्रों से सामने आई है, जो जागरूकता का संकेत है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), संकुल प्रभारी और जिला प्रशासन से अपील है कि:
तुरंत जांच शुरू करें।
पति पर स्कूल में प्रवेश/हस्तक्षेप रोकने का सख्त आदेश जारी करें।
महिला हेडमास्टर को चेतावनी दें और यदि जरूरी हो तो अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।
अन्य शिक्षकों को सुरक्षित और निष्पक्ष कार्य वातावरण उपलब्ध कराएं।
शिक्षा का मंदिर परिवार के कब्जे में नहीं आना चाहिए। यह मामला यदि जल्द सुलझाया गया तो पूरे दंतेवाड़ा जिले में अनुशासन और नियम पालन की मिसाल बनेगा। विभाग की त्वरित कार्रवाई से यह अच्छी खबर बन सकती है – जहां नियमों का पालन हो और शिक्षा व्यवस्था मजबूत बने!
