*एनएमडीसी बचेली के चमचमाते पार्कों के बीच राजीव चौक की सुनसान दास्तां 41 वर्षों की उपेक्षा: राजीव गांधी के नाम का चौक आज भी बदहाल,*
दंतेवाड़ा जिले के बचेली में स्थित राजीव चौक आज भी 41 साल पुरानी उपेक्षा की जीती-जागती मिसाल बना हुआ है। 14 जुलाई 1985 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस चौक (या उस समय के प्रमुख रोड/चौक) का उद्घाटन किया था। उस समय स्वागत तख्ती और पत्थर आज भी मौजूद हैं, लेकिन विकास के नाम पर यहां कुछ नहीं बदला।
आज बचेली पूरी तरह बदल चुका है—एनएमडीसी की खनन परियोजना के कारण ऊंची-ऊंची इमारतें, चमचमाती सड़कें, खूबसूरत पार्क, रंग-बिरंगी लाइटें और आधुनिक सुविधाएं हर तरफ नजर आती हैं। एनएमडीसी के अन्य चौक जैसे श्रमवीर चौक घड़ी चौक आदि की तुलना में राजीव चौक की स्थिति दयनीय है—पुराने पत्थर, जर्जर संरचना, कोई नया विकास नहीं, न ही रखरखाव। यह चौक आज भी अपने अस्तित्व के लिए तरस रहा है, जबकि आसपास का इलाका लोहे की खदानों से चमक रहा है।
यह विडंबना है कि एक पूर्व प्रधानमंत्री के नाम से जुड़ा यह स्थान, जिसे देश के विकास का प्रतीक बनना चाहिए था, आज भी बदहाली की दास्तां सुना रहा है। एनएमडीसी जैसी महान कंपनी और सरकारी योजनाओं से बचेली में लाखों-करोड़ों का निवेश हुआ, सड़कों का जीर्णोद्धार हुआ (जैसे राजीव चौक से श्रमवीर चौक तक की रोड रिकार्पेटिंग), लेकिन राजीव चौक को नजरअंदाज किया गया। क्या यह राजनीतिक उपेक्षा है या महज लापरवाही?
41 साल बाद भी स्वागत तख्ती टंगी है, लेकिन सम्मान गायब है। यह चौक न सिर्फ राजीव गांधी की विरासत का अपमान है, बल्कि स्थानीय लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फेरता है। प्रशासन और एनएमडीसी को तत्काल इसकी मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण की जरूरत है—वरना यह उपेक्षा का एक और काला अध्याय बन जाएगा।
क्या बचेली का यह ‘राजीव चौक’ हमेशा विकास से वंचित रहेगा, या आखिरकार इसमें भी चमक आएगी? समय जवाब देगा, लेकिन अब इंतजार काफी हो चुका है!

