*दंतेवाड़ा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में बसंत पंचमी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का उत्साहपूर्ण आयोजन हुआ।*
कोड़ेनार पंचायत अंतर्गत हरसोला (या संबंधित क्षेत्र) में आज 23 जनवरी 2026 को इन दोनों महत्वपूर्ण अवसरों को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से स्थानीय विद्यालय के बच्चों द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें देशभक्ति, संस्कृति और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना का सुंदर संगम देखने को मिला।
बसंत पंचमी हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जो ज्ञान, विद्या, संगीत, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। स्कूलों और समुदायों में बच्चों द्वारा सरस्वती माता की पूजा, वंदना, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले जैसे क्षेत्रों में यह त्योहार स्थानीय परंपराओं के साथ मिलकर और भी रंगीन हो जाता है।
वहीं, 23 जनवरी को पूरे देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जाती है। नेताजी का जन्म 1897 में ओडिशा के कटक में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी नेता थे, जिन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन कर “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा दिया। उनकी जयंती पर देशभक्ति की भावना जगाने वाले कार्यक्रम, भाषण, नाटक और गीत-संगीत का आयोजन होता है।
कोड़ेनार पंचायत में आज के इस संयुक्त आयोजन में विद्यालय के बच्चों ने मुख्य भूमिका निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें बच्चे पीले वस्त्र पहनकर, फूलों की मालाएं चढ़ाकर और मंत्रोच्चार के साथ देवी की वंदना की। इसके बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसमें देशभक्ति गीत, नृत्य, स्किट और भाषण शामिल थे। ये प्रस्तुतियां न केवल मनोरंजक थीं, बल्कि युवा पीढ़ी में राष्ट्रवाद और शिक्षा के प्रति जागरूकता भी पैदा करने वाली रहीं।
यह आयोजन दंतेवाड़ा जिले के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार का एक बेहतरीन उदाहरण है। यहां के बच्चे, जो अक्सर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पढ़ाई करते हैं, ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाते हैं और समाज को एकजुट करते हैं। कोड़ेनार पंचायत के इस प्रयास से स्थानीय स्तर पर बसंत पंचमी की धार्मिक भावना और नेताजी की जयंती की देशभक्ति भावना का अद्भुत मेल देखने को मिला।
ऐसे आयोजन न केवल बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं, बल्कि समुदाय को सकारात्मक दिशा भी देते हैं। दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्र, जहां विकास और शिक्षा की चुनौतियां हैं, वहां ऐसे सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रम प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। स्थानीय शिक्षक, अभिभावक और पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उनकी अमर वाणी याद करते हुए – “दिल्ली चलो!” – और माँ सरस्वती से प्रार्थना करते हुए कि वे सभी बच्चों को विद्या और पराक्रम प्रदान करें। दंतेवाड़ा के इस छोटे से कोने में आज देशभक्ति और ज्ञान की ज्योति एक साथ जल रही है।

