*किरंदुल में एनसीसी के 47वें स्थापना दिवस पर बीआईओपी स्कूल में देशभक्ति का उमड़ा सैलाब*
– अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की गूंज के साथ हुआ भव्य आयोजन
किरंदुल, 22 नवंबर 2015
बस्तर की लाल मिट्टी में बसे बीआईओपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल परिसर आज सुबह से ही कुछ अलग ही रंग में रंगा नजर आया। चारों तरफ खाकी वर्दी, चमचमाते बूट, ऊँचा कदमताल और जोश भरी आवाजें – जी हाँ, यहाँ बड़े धूमधाम से राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का 47वाँ स्थापना दिवस मनाया गया। एनसीसी दिवस का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम की भावना को नई ऊँचाई देने वाला अवसर बन गया।
*मुख्य अतिथि के कर-कमलों से हुआ ध्वजारोहण
सुबह ठीक 12:30 बजे एनएमडीसी की महाप्रबंधक (एचआर) एवं विभागाध्यक्ष श्रीमती के.एल. नागवेणी का स्कूल परिसर में आगमन हुआ। उनके साथ विशिष्ट अतिथियों के रूप में उप महाप्रबंधक (एचआर) श्री तनवीर जावेद, सहायक महाप्रबंधक (एचआर) श्री अभिजीत घोष, सहायक महाप्रबंधक (एचआर) श्री दीपक कुमार पाल, केंद्रीय विद्यालय के प्राचार्य श्री बलजींदर सिंह, बीआईओपी स्कूल के प्राचार्य श्री सुनील दूबे सहित अनेक गणमान्य शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि श्रीमती नागवेणी ने तिरंगे को फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ध्वजारोहण के साथ ही एनसीसी बैंड की धुन पर पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में डूब गया। इसके बाद एनसीसी कैडेट्स ने शानदार परेड पेश की। कदम से कदम मिलाते, कंधे से कंधा जोड़ते कैडेट्स को देखकर उपस्थित हर व्यक्ति की छाती गर्व से चौड़ी हो गई।
*स्वागत से लेकर वार्षिक रिपोर्ट तक – सब कुछ रहा अनुशासित और प्रेरक*
प्राचार्य श्री सुनील दूबे ने मुख्य अतिथि एवं सभी विशिष्ट अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हुए अपने उद्बोधन में कहा, “एनसीसी केवल एक संगठन नहीं है, यह तो युवाओं का वह मंच है जहाँ वे अपना सर्वश्रेष्ठ स्वरूप देखते हैं।” इसके बाद सुश्री प्रियंका महाजन ने बीआईओपी स्कूल की एनसीसी यूनिट की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें पिछले एक साल में कैडेट्स द्वारा किए गए कैंप, सामाजिक सेवा कार्य, रक्तदान शिविर और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण की जानकारी दी गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बाँधा समाँ
कार्यक्रम का सबसे रंगारंग हिस्सा रहा छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम। बैंड की मधुर धुनों पर देशभक्ति गीत, राजस्थानी लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ी पंथी नृत्य और ग्रुप डांस ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास तौर पर जूनियर विंग के छोटे-छोटे कैडेट्स का “वंदे मातरम देखते ही बनता था।
*एनसीसी कैडेट्स ने एक साथ खड़े होकर ऊँची आवाज में एनसीसी प्रतिज्ञा दोहराई –*
“हम भारत के निवासी, अपने देश की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहेंगे…”
यह सुनकर उपस्थित हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।
मुख्य अतिथि का प्रेरक संबोधन
अंत में श्रीमती के.एल. नागवेणी ने अपने संबोधन में कहा, “एनसीसी का मतलब सिर्फ यूनिफॉर्म पहनना नहीं है। यह तो एक जीवन शैली है। यहाँ से निकले कैडेट्स आगे चलकर सेना, पुलिस, प्रशासन और समाज के हर क्षेत्र में देश की सेवा करते हैं। मैं इन बच्चों में वो जज्बा देख रही हूँ जो देश को मजबूत बनाता है।” उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को प्रशस्ति-पत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित भी किया।
*राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन*
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। सभी ने एक स्वर में “जन-गण-मन” गाया और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
बीआईओपी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में कहा, “यह हमारे जीवन का सबसे यादगार दिन था।” वहीं शिक्षकगणों ने इसे अब तक का सबसे सफल और अनुशासित एनसीसी दिवस बताया।
एनसीसी के इस 47वें स्थापना दिवस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बस्तर का यह छोटा सा शहर भी देशभक्ति और अनुशासन के मामले में किसी से पीछे नहीं है।
जय हिंद! जय एनसीसी!!
