*भद्रकाली नदी में अवैध रेत उत्खनन का काला कारोबार: 40 हाइवा से तेलंगाना पहुंच रही छत्तीसगढ़ की धरोहर, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल*
बीजापुर, 21 नवंबर 2025 (पुकार बाफना, जिला ब्यूरो)
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की भद्रकाली नदी तट पर अवैध रेत उत्खनन का खेल दिन-ब-दिन खुला होता जा रहा है। दिनदहाड़े 40 से अधिक हाइवा रेत लादकर तेलंगाना की ओर रवाना हो रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। कई मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद सिस्टम की निष्क्रियता ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। क्या यह महज लापरवाही है या फिर माफिया का दबाव?
*खुलेआम परेड कर रहे रेत माफिया, प्रशासन क्यों सोया हुआ?*
भद्रकाली नदी के किनारे स्थित भोपालपटनम क्षेत्र में यह अवैध कारोबार अब हफ्तों से जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रेत माफिया रात के अंधेरे का इंतजार भी नहीं कर रहे। सुबह से शाम तक हाइवा की कतारें नदी तट पर उत्खनन कर रेत भर रही हैं, जो सीधे हैदराबाद और तेलंगाना के बाजारों तक पहुंच रही है। एक हफ्ते पहले पहली बार इस मुद्दे पर मीडिया में खबरें छपीं, फिर दर्जनों समाचार पत्रों और ऑनलाइन पोर्टलों ने इसे उजागर किया। लेकिन नतीजा? खनिज विभाग के अधिकारी ‘अनजान’ बने हुए हैं, पुलिस की पेट्रोलिंग कागजों तक सीमित है, और चेकपोस्टों पर जांच के बजाय ‘इग्नोर’ का रवैया अपनाया जा रहा है।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे पास शिकायतें हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और सीमावर्ती इलाके की जटिलताओं के कारण तत्काल कार्रवाई मुश्किल है।” हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि यह बहाना मात्र है। एक स्थानीय निवासी रामू मंडावी ने कहा, “हमें सड़कें चाहिए, स्कूल चाहिए, लेकिन हमारी नदी की रेत दूसरे राज्य ले जा रहे हैं। अगर यूं ही चला तो गांव भी तेलंगाना को सौंप दें!”
*पर्यावरण पर गहरा असर: नदी की धारा बदल रही, खेती पर संकट*
यह अवैध उत्खनन न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी चोट पहुंचा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंधाधुंध उत्खनन से नदी की प्राकृतिक धारा बदल रही है, भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, और आसपास की कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। भद्रकाली नदी का सौंदर्य नष्ट होता जा रहा है, जो पहले आदिवासी समुदायों की आजीविका का आधार थी। पर्यावरण कार्यकर्ता सुनीता साहू ने चेतावनी दी, “यह सिर्फ रेत का खेल नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर हमला है। यदि अब नहीं रुका, तो आने वाले वर्षों में सूखा और बाढ़ जैसी आपदाएं बढ़ेंगी।”
ग्रामीणों का सवाल स्पष्ट है: “क्या हम छत्तीसगढ़ का हिस्सा नहीं? हमारी संसाधनों पर पहला हक हमारा है।” स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि ने बताया कि गांववासी अब सामूहिक विरोध की योजना बना रहे हैं, लेकिन वे प्रशासन से ही उम्मीद लगाए हैं।
*क्या है समाधान? 24 घंटे में ढह सकता है माफिया नेटवर्क*
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए, तो यह पूरा नेटवर्क 24 घंटे में ध्वस्त किया जा सकता है। इसके लिए सख्त निगरानी, संयुक्त टीमों की तैनाती और चेकपोस्टों पर सघन जांच जरूरी है। केंद्र और राज्य सरकार की खनन नीति के तहत अवैध उत्खनन पर सख्त सजा का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल की कमी साफ दिख रही है।
मीडिया और जनता की नजरें अब जिला कलेक्टर और एसपी पर टिकी हैं। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर बड़े आंदोलन को जन्म दे सकता है। भद्रकाली की रेत छत्तीसगढ़ की है—माफिया की नहीं। समय रहते जागना ही एकमात्र रास्ता है।

