*किरंदुल में बाहरी व्यापारियों का अनधिकृत कारोबार: स्थानीय अर्थव्यवस्था पर खतरा या प्रशासनिक लापरवाही?*
किरंदुल (छत्तीसगढ़), 18 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित किरंदुल शहर, जो राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की लौह अयस्क खदानों के लिए जाना जाता है, इन दिनों एक नई बहस का केंद्र बन गया है। एनएमडीसी क्षेत्र में, विशेष रूप से फुटबॉल ग्राउंड के सामने, बाहरी व्यापारियों द्वारा बिना नगरपालिका की अनुमति के खुलेआम कारोबार किए जाने की शिकायतें बढ़ रही हैं। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि यह अनधिकृत व्यापार न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि नगरपालिका के सरकारी फंड पर भी ‘लूट’ का माध्यम बन रहा है। क्या यह मात्र एक स्थानीय समस्या है या इसमें प्रशासनिक मिलीभगत शामिल है? आइए इस मुद्दे का गहन विश्लेषण करें।
*समस्या की जड़: अनधिकृत व्यापार का बढ़ता दायरा*
किरंदुल एनएमडीसी का प्रमुख उत्पादन केंद्र है, जहां हजारों मजदूर और कर्मचारी काम करते हैं। शहर की आबादी मुख्य रूप से खनन उद्योग पर निर्भर है, लेकिन हाल के वर्षों में बाहरी व्यापारियों का आगमन बढ़ा है। फुटबॉल ग्राउंड के सामने एनएमडीसी क्षेत्र में सड़क किनारे गर्म कपड़ो के खुले बाजार लगाए जा रहे हैं, जहां कपड़े और अन्य सामान बेचा जा रहा है। इन व्यापारियों में से अधिकांश बाहरी राज्यों से आते हैं और बिना किसी लाइसेंस या अनुमति के कारोबार कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह व्यापार ‘धड़ल्ले से’ चल रहा है, जिससे यातायात बाधित होता है, स्वच्छता प्रभावित होती है और स्थानीय दुकानदारों का कारोबार घट रहा है। एक स्थानीय निवासी ने बताया, “ये बाहरी लोग सस्ते दाम पर सामान बेचते हैं, लेकिन टैक्स नहीं देते। इससे नगरपालिका को राजस्व की हानि हो रही है, जो अंततः हमारी सुविधाओं पर असर डालती है।” नगरपालिका के नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक स्थान पर व्यापार के लिए अनुमति जरूरी है, लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो रहा
*नगरपालिका की भूमिका और सरकारी फंड पर ‘लूट’*
किरंदुल नगरपालिका पर आरोप है कि वह इस अनधिकृत व्यापार को रोकने में नाकाम रही है। आलोचकों का कहना है कि बिना अनुमति के चल रहे इन बाजारों से नगरपालिका को कोई टैक्स या फीस नहीं मिल रही, जबकि सफाई, रोशनी और सुरक्षा जैसी सेवाएं प्रदान करने में सरकारी धन खर्च हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार, ऐसे अनधिकृत व्यापार से सालाना लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है।

