*दंतेवाड़ा: मलगेर नाला बना ग्रामीणों और शिक्षकों के लिए मौत का जाल, तत्काल पुल निर्माण की मांग*
दंतेवाड़ा, 02 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कुंवाकोंडा विकासखंड के रेवाली क्षेत्र में मलगेर नाला बारिश के मौसम में 8 से 10 गांवों के ग्रामीणों और शिक्षकों के लिए जानलेवा चुनौती बन गया है। बारिश के दिनों में नाले में 5 से 8 फीट तक पानी भर जाता है, और तेज बहाव के कारण ग्रामीणों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए समेली, पालनार, किरंदुल या नकुलनार जाने में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। इस नाले ने न केवल ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है, बल्कि हर साल लोगों की जान भी ले रहा है।
पिछले साल अगस्त 2024 में तेज बहाव में 5 ग्रामीण और 2 बच्चे नाले में बह गए, जिससे उनकी मौत हो गई। हर साल औसतन 2 से 4 लोग इस उफनते नाले की चपेट में आकर अपनी जान गंवाते हैं। सबसे गंभीर समस्या तब उत्पन्न होती है, जब किसी गांव में कोई बीमार पड़ता है। इन गांवों तक एम्बुलेंस पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। बीमार व्यक्ति को खाट पर लादकर 10 से 15 किलोमीटर पैदल मलगेर नाला तक लाया जाता है, और फिर जान जोखिम में डालकर नाला पार कर एम्बुलेंस तक पहुंचाया जाता है।
*शिक्षकों की स्थिति भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं है।*
रेवाली के स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को विद्यालय पहुंचने के लिए उफनते नाले को पार करना पड़ता है। वैकल्पिक रास्ता अपनाने पर उन्हें अरनपुर, पोटाली, और बुर्गुम होते हुए 22 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है, जिसमें 3 किलोमीटर पगडंडी जैसा दुर्गम रास्ता शामिल है। यह स्थिति न केवल शिक्षकों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि बच्चों की शिक्षा को भी प्रभावित कर रही है।
आज, 2 अगस्त 2025 को शिक्षा विभाग के अधिकारियों, बीईओ (ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) और एबीईओ (असिस्टेंट ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर), ने रेवाली विद्यालय का निरीक्षण करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर मलगेर नाला पार किया। इस दौरान ग्राम सरपंच और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार से मलगेर नाले पर तत्काल पुल निर्माण की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में उनकी जिंदगी हर बारिश के मौसम में खतरे में पड़ जाती है।
*ग्रामीणों की मांग:*
ग्राम सरपंच और स्थानीय निवासियों ने बताया कि मलगेर नाले पर पुल निर्माण की मांग वे लंबे समय से उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है, “हमारी जिंदगी हर साल खतरे में पड़ती है। बच्चों को स्कूल जाना मुश्किल हो रहा है, बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में जान चली जाती है। सरकार से अनुरोध है कि जल्द से जल्द इस नाले पर पुल बनाया जाए।”
*शिक्षा अधिकारियों का बयान:*
बीईओ ने निरीक्षण के दौरान कहा, “शिक्षकों और बच्चों को नाला पार करने में होने वाली कठिनाइयों से हम वाकिफ हैं। हम इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे और पुल निर्माण के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे।”
*स्थानीय चुनौतियां और समाधान की जरूरत:*
मलगेर नाला क्षेत्र के 8 से 10 गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र कड़ी है, लेकिन बारिश में यह कड़ी मौत का सबब बन जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण से न केवल उनकी जान बचाई जा सकती है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उनकी निर्भरता भी कम होगी।
*सरकार से अपील:*
यह स्थिति न केवल दंतेवाड़ा जिले के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के उन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक चेतावनी है, जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल रहा है। मलगेर नाले पर पुल निर्माण न केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना है, बल्कि यह सैकड़ों ग्रामीणों और शिक्षकों की जिंदगी बचाने का एक जरूरी कदम है। सरकार से अपील है कि इस मांग पर तत्काल ध्यान दिया जाए और मलगेर नाले पर पुल निर्माण को प्राथमिकता दी जाए।

