*किरंदुल: गौरव पथ के तालाब-नुमा गड्ढे बने खतरे का सबब, स्थानीय निवासियों में आक्रोश*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में गौरव पथ, जो कभी इस क्षेत्र की शान माना जाता था, आज अपनी बदहाली के कारण चर्चा में है। इस मुख्य मार्ग पर जगह-जगह बने तालाब-नुमा गड्ढे न केवल स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं, बल्कि उनकी जान के लिए भी खतरा बन गए हैं। बंगाली कैंप के पास बना एक विशाल गड्ढा इस समस्या का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो बारिश के पानी से भरकर तालाब का रूप ले चुका है।
*स्थानीय निवासी गणेश गुप्ता की आपबीती: “लगा जैसे हेलीकॉप्टर ही चलाते हैं जनप्रतिनिधि”*
स्थानीय निवासी गणेश गुप्ता ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया, “मैं अपनी कार से जा रहा था। पानी से भरा गड्ढा दिखा, लेकिन उसकी गहराई का अंदाजा नहीं था। जैसे ही कार उसमें गिरी, जोरदार आवाज हुई और गाड़ी को नुकसान पहुंचा। तब समझ आया कि यह कोई साधारण गड्ढा नहीं, बल्कि तालाब-नुमा गड्ढा है। ऐसा लगता है कि किरंदुल के जनप्रतिनिधि इस सड़क से गुजरते ही नहीं। शायद उनके पास हेलीकॉप्टर हैं और वे आसमान से उड़ान भरते हैं, इसलिए उन्हें ये गड्ढे नजर नहीं आते।” गणेश ने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे तो लगता है कि इन गड्ढों में मिट्टी डालकर धान की खेती शुरू कर देनी चाहिए!”
*नई सड़क, पुरानी हालत: तीन महीने में बने गड्ढे*
एक अन्य स्थानीय निवासी ने गुस्से में बताया कि कुछ महीने पहले ही गौरव पथ पर डामरीकरण का कार्य किया गया था। मगर, मात्र तीन से चार महीनों में सड़क फिर से गड्ढों में तब्दील हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “यह सड़क गरीबों के लिए है, हमारी मजबूरी है कि हमें इन गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन बड़े नेता और अधिकारी तो लग्जरी गाड़ियों या हेलीकॉप्टर में चलते हैं। उन्हें हमारे दुख-दर्द से क्या मतलब?”
*खेती का सपना: गड्ढों में धान की खेती का तंज*
स्थानीय लोगों का गुस्सा और हताशा इस कदर बढ़ चुकी है कि वे इन गड्ढों को लेकर व्यंग्यात्मक सुझाव दे रहे हैं। गणेश गुप्ता का कहना है कि इन तालाब-नुमा गड्ढों को भरकर धान की खेती की जा सकती है। यह बयान भले ही मजाक में कहा गया हो, लेकिन यह सड़क की बदहाली और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ में धान की खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के बीच, गौरव पथ के गड्ढों में “धान लगाने” की बात स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
*क्या है समाधान?*
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि गौरव पथ की मरम्मत तत्काल की जाए और सड़क निर्माण में गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। उनका कहना है कि बार-बार डामरीकरण के बावजूद सड़क की हालत खराब होना निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
*निष्कर्ष*
किरंदुल का गौरव पथ आज “गड्ढा पथ” बन चुका है, जो न केवल स्थानीय निवासियों की परेशानियों को बयां करता है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करता है। तालाब-नुमा गड्ढों में “धान की खेती” का तंज स्थानीय लोगों की हताशा का प्रतीक है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक किरंदुल वासियों को इन खतरनाक गड्ढों से निजात मिलती है।


