*किरंदुल बचेली में खतरे की घंटी: बाहरी कंपनियों से रोजगार संकट, युवती की नग्न-घायल अवस्था और हैदराबाद में अज्ञात बीमारी से मजदूरों की मौत*
किरंदुल,बचेली दंतेवाड़ा, 28 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल-बचेली क्षेत्र में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की परियोजनाओं में बाहरी कंपनियों और मजदूरों की बढ़ती मौजूदगी ने स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसके साथ ही, क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में एक 21 वर्षीय युवती के नग्न और घायल अवस्था में मिलने की घटना ने स्थानीय समुदाय में दहशत फैला दी है।
दूसरी ओर, हैदराबाद की प्रियंका इंडस्ट्रियल अनावरम पाउडर कंपनी में काम करने वाले दंतेवाड़ा के मजदूरों की अज्ञात बीमारी से मौत और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। ये घटनाएं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, सुरक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर गहराते खतरे की ओर इशारा करती हैं।
*युवती की रहस्यमयी स्थिति: एक अनसुलझी पहेली*
20 जुलाई 2025 को किरंदुल के पेरपा चौक के पास ग्रामीणों ने एक 21 वर्षीय युवती को झाड़ियों में नग्न, हाथ-पैर साड़ी से बंधे और गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया। वह 19 जुलाई की शाम मजदूरी के बाद घर लौट रही थी। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचित किया, और युवती को किरंदुल परियोजना अस्पताल में भर्ती कराया गया। नौ दिन बाद भी वह होश में नहीं आई है, जिससे पुलिस जांच ठप पड़ी है। पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और परिजनों से पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। परिजनों को संदेह है कि उनके साथ जघन्य अपराध हुआ है, लेकिन बयान के अभाव में मामला अनसुलझा बना हुआ है।
स्थानीय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह मामला अत्यंत गंभीर है। हम साक्ष्य जुटा रहे हैं, और जैसे ही युवती बयान देने की स्थिति में होगी, जांच आगे बढ़ेगी।” यह घटना बाहरी मजदूरों की अनियंत्रित मौजूदगी और उनकी पहचान के अभाव से उत्पन्न जोखिमों को उजागर करती है। स्थानीय लोग मानते हैं कि बाहरी कंपनियों के मजदूरों की बिना जांच-पड़ताल की उपस्थिति ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है।
*बाहरी कंपनियों का दबदबा: स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों की बदहाली*
किरंदुल-बचेली क्षेत्र में NMDC की परियोजनाओं में कोलकाता की कंपनियों जैसे एलएंडटी, कल्पतरु और हाल ही में समता को बड़े ठेके दिए जा रहे हैं। ये कंपनियां अपने साथ हाइवा, भारी मशीनें और बाहरी मजदूर ला रही हैं, जिससे स्थानीय ठेकेदारों की मशीनें और मजदूर बेकार पड़े हैं। दंतेवाड़ा में 250 से अधिक ठेकेदार कार्यरत हैं, जिनमें 130 किरंदुल-बचेली क्षेत्र में हैं। ये ठेकेदार हजारों स्थानीय मजदूरों के परिवारों की आजीविका का आधार हैं, लेकिन बाहरी कंपनियों की नीति ने इन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है।
स्थानीय ठेकेदार रमेश मंडावी (बदला हुआ नाम) ने कहा, “हमारी मशीनें खाली पड़ी हैं, और मजदूर बेरोजगार हैं। बाहरी कंपनियां हमें काम नहीं दे रही हैं। अगर यही हाल रहा, तो हमारे परिवार भूखे मर जाएंगे।” अनुमान है कि अगर 130 स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाए, तो प्रत्येक ठेकेदार 100-200 मजदूरों को रोजगार दे सकता है, जिससे 13,000 से अधिक परिवारों की आजीविका सुरक्षित हो सकती है।
*रोजगार का संकट: पलायन और शोषण की मार*
किरंदुल-बचेली में 3,000 से अधिक दिहाड़ी मजदूर कार्यरत हैं, जिनमें ज्यादातर बाहरी राज्यों से हैं। स्थानीय मजदूर लखन नेताम ने कहा, “हमारे जिले में इतना काम है, फिर भी हमें भूखा रहना पड़ता है। बाहरी कंपनियां अपने मजदूर लाती हैं, और हमें कुछ नहीं मिलता।” इस स्थिति ने बस्तर और दंतेवाड़ा के ग्रामीणों को अन्य राज्यों में पलायन के लिए मजबूर किया है, जहां उनका शोषण होता है।
हैदराबाद की प्रियंका इंडस्ट्रियल अनावरम पाउडर कंपनी में काम करने वाले दंतेवाड़ा के मजदूरों की स्थिति इसका जीवंत उदाहरण है। दिसंबर 2024 में खबर फास्ट के जिला संवाददाता किशोर कुमार रामटेके ने कुट्रेम गांव में इस मामले का खुलासा किया। गांव के ग्रामीणों ने बताया कि इस कंपनी में काम करने वाले मजदूरों में से 5 की अज्ञात बीमारी से मौत हो चुकी है, और कई गंभीर रूप से बीमार हैं। सूखेश नामक मजदूर की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे तुरंत किरंदुल अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में रायपुर रेफर किया गया। कुट्रेम, भांसी और आसपास के गांवों से 14 मजदूरों को रायपुर भेजा गया, जिनमें से कुछ की इलाज के दौरान मौत हो गई।
वर्तमान में, दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में 2 और डिमरापाल अस्पताल, जगदलपुर में 2 मरीज भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इन मरीजों के फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं, और वे बिना ऑक्सीजन के जीवित नहीं रह सकते। यह स्थिति प्रियंका इंडस्ट्रियल अनावरम कंपनी में काम करने की खतरनाक परिस्थितियों को उजागर करती है, जहां मजदूरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था नहीं है।
*सुरक्षा पर सवाल: बाहरी मजदूरों की अनियंत्रित मौजूदगी*
युवती की घटना के अलावा, किरंदुल के वार्ड नंबर 8 के मटन मार्केट नाले में एक अज्ञात शव मिलने की घटना ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है। पुलिस ने शव की पहचान की कोशिश की, लेकिन कोई भी कंपनी या स्थानीय व्यक्ति उसे पहचान नहीं सका। पुलिस के अनुसार, बाहरी कंपनियां अपने मजदूरों की पूरी जानकारी थानों में दर्ज नहीं करातीं, जिससे जांच में बाधा आती है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम बार-बार कंपनियों से कर्मचारियों की सूची मांगते हैं, लेकिन कई कंपनियां पूरी जानकारी नहीं देतीं। इससे सुरक्षा जोखिम बढ़ता है।”
*NMDC का दावा बनाम हकीकत*
NMDC दावा करती है कि वह स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देती है, लेकिन स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों का कहना है कि यह दावा खोखला है। ठेकेदार संजय ठाकुर ने कहा, “NMDC के अधिकारी कहते हैं कि वे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन बाहरी कंपनियों को ठेके देकर हमारे बच्चों के मुंह से रोटी छीन रहे हैं।”
*हैदराबाद में मजदूरों की मौत: एक अनदेखा संकट*
प्रियंका इंडस्ट्रियल अनावरम, हैदराबाद में काम करने वाले दंतेवाड़ा के मजदूरों की मौत और गंभीर बीमारी ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी में काम करने की परिस्थितियां असुरक्षित हैं, और मजदूरों को कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं दी जाती। कुट्रेम गांव के 5 मजदूरों की मौत और कई अन्य की गंभीर बीमारी ने यह सवाल उठाया है कि ऐसी कंपनियां मजदूरों की जान की कीमत पर कैसे काम कर रही हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि मरीजों के फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जो संभवतः रसायनों या खतरनाक पदार्थों के संपर्क में आने का परिणाम है। फिर भी, कंपनी की ओर से कोई जवाबदेही नहीं ली गई है, और मजदूरों के परिवार बेसहारा छोड़ दिए गए हैं।
*निष्कर्ष:* अनसुलझे सवाल और गहराता संकट
किरंदुल-बचेली में NMDC की परियोजनाओं में बाहरी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी ने स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों को भुखमरी और बेरोजगारी की कगार पर ला खड़ा किया है। युवती की नग्न और घायल अवस्था में खोज और मटन मार्केट नाले में अज्ञात शव मिलना बाहरी मजदूरों की अनियंत्रित मौजूदगी से उत्पन्न सुरक्षा जोखिमों को दर्शाता है। इसके साथ ही, हैदराबाद की प्रियंका इंडस्ट्रियल अनावरम कंपनी में दंतेवाड़ा के मजदूरों की अज्ञात बीमारी से मौत और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं इस क्षेत्र के लोगों के सामने एक और बड़े संकट को उजागर करती हैं।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि NMDC अपनी नीतियों में बदलाव करे, स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दे, और बाहरी कंपनियों को अपने मजदूरों की पूरी जानकारी साझा करने के लिए बाध्य करे। साथ ही, हैदराबाद की कंपनी में मजदूरों की मौत की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। सवाल यह है कि अगर NMDC और सरकार अपने ही क्षेत्र के लोगों को रोजगार, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं दे सकती, तो वे कहां जाएंगे? इस सवाल का जवाब जल्द देना होगा, ताकि हजारों परिवारों को भूख, बेरोजगारी और असुरक्षा से बचाया जा सके।

