*छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने डीए, पेंशन सहित विभिन्न मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, 22 अगस्त को सामूहिक अवकाश की चेतावनी*

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*छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने डीए, पेंशन सहित विभिन्न मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन, 22 अगस्त को सामूहिक अवकाश की चेतावनी*

बीजापुर, 17 जुलाई 2025: छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। फेडरेशन के जिला सचिव कैलाश रामटेके ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि प्रदेश अध्यक्ष कमल वर्मा के आह्वान पर 16 जुलाई 2025 को छत्तीसगढ़ के सभी विकास खंडों में रैली और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। इस कड़ी में बीजापुर जिले के कर्मचारी संगठनों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर माननीय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा।

*बीजापुर में हुआ रैली और धरना-प्रदर्शन*

फेडरेशन के जिला अध्यक्ष मो. जाकिर खान और जिला सचिव कैलाश रामटेके के नेतृत्व में बीजापुर के कर्मचारी संगठनों ने एकजुटता का प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। ज्ञापन को एसडीएम बीजापुर श्री जागेश्वर कौशल को सौंपा गया। इसके साथ ही भोपालपटनम विकास खंड में ब्लॉक अध्यक्ष कमल कोर्राम के नेतृत्व में रैली और धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया, जहां तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।

*कर्मचारियों की प्रमुख मांगें*

फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं, जो कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों से जुड़ी हैं। इनमें शामिल हैं:

*1:-महंगाई भत्ता (डीए):* केंद्र सरकार के समान 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता प्रदान करने और 2019 से लंबित डीए की बकाया राशि का भुगतान।

*2:-पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट:* इसकी सार्वजनिक घोषणा और कार्यान्वयन।

*3:-चार स्तरीय पदोन्नति और समयमान वेतनमान:* कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति और वेतनमान प्रदान करना।

*4:-वेतन विसंगति:* वेतन संरचना में मौजूद विसंगतियों को दूर करना।

*5:-कैशलेस चिकित्सा सुविधा:* कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करना।

*6:-अनुकंपा नियुक्ति:* 10 प्रतिशत सीमा बंधन को समाप्त करना।

*7:-अर्जित अवकाश का नगदीकरण:* 300 दिनों तक अर्जित अवकाश के नगदीकरण की मांग।

*8:-पूर्ण पेंशन नीति:* पेंशन के लिए स्पष्ट और निश्चित नीति का निर्माण।

*9:-सेवानिवृत्ति आयु:* रिटायरमेंट की आयु को 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना।

*10:-अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण:* सभी अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की मांग।

*22 अगस्त को सामूहिक अवकाश की चेतावनी*

फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 22 अगस्त 2025 को सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर विकास खंड मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन करेंगे। यह चेतावनी सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है ताकि कर्मचारियों की लंबित मांगों पर त्वरित कार्रवाई हो।

*कर्मचारी संगठनों की एकजुटता*

इस आंदोलन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाई। ज्ञापन सौंपने वालों में फेडरेशन के कोषाध्यक्ष लोकेश रेड्डी, सह सचिव रेश्मा गोड्डे, वन कर्मचारी संघ के सोनाधर मांझी, कश्मीर एक्का, मोहन अवलम, स्वास्थ्य संयोजक कर्मचारी संघ के शेख फारुख, वाहन चालक संघ के महेश देवांगन, लिपिक संघ के इलमिड़ी संतोष, शिक्षक संघ के संदीप राज पामभोई, शेख आसाम, सुशीला लंबाड़ी, पेंशनर संघ के ए. सुधाकर, शंकर कावटी, मोहनलाल मंडावी, कोरम नारद, और मद्वी नागैया जैसे कई 

पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

*कर्मचारियों की मांगें क्यों हैं महत्वपूर्ण?*

छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन की ये मांगें न केवल कर्मचारियों के हितों से जुड़ी हैं, बल्कि राज्य की प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था को भी प्रभावित करती हैं। महंगाई भत्ते और बकाया राशि की मांग कर्मचारियों के आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में एक कदम है, खासकर बढ़ती महंगाई के दौर में। इसके अलावा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और अनुकंपा नियुक्ति जैसी मांगें कर्मचारियों के सामाजिक और पारिवारिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पेंशन और रिटायरमेंट आयु जैसे मुद्दे कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सेवा निरंतरता से जुड़े हैं। वहीं, अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण और वेतन विसंगति को दूर करने की मांगें कार्यस्थल पर समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

*सरकार पर बढ़ता दबाव*

फेडरेशन का यह आंदोलन राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। कर्मचारी संगठनों की एकजुटता और सामूहिक अवकाश की चेतावनी से स्पष्ट है कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं। यदि सरकार समय रहते इन मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो 22 अगस्त का प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर सकता है।

*निष्कर्ष*

छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन का यह आंदोलन कर्मचारियों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बीजापुर सहित पूरे प्रदेश में कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस ज्ञापन और मांगों पर क्या रुख अपनाती है। क्या कर्मचारियों की मांगें पूरी होंगी, या 22 अगस्त को प्रस्तावित सामूहिक अवकाश और धरना-प्रदर्शन से स्थिति और गंभीर होगी? यह समय ही बताएगा।

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