यह सचमुच चिंतन का विषय है कि छत्तीसगढ़ की सबसे धनी मानी जाने वाली नगरपालिका अपने क्षेत्र में सफाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर इतनी लापरवाही बरत रही है, जबकि पड़ोसी ग्राम पंचायत कोडेनार की सफाई के लिए अपने संसाधन और कर्मचारियों को लगा रही है।
यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।किरंदुल नगरपालिका की गौरव पथ, गलियों और नालियों में गंदगी का आलम अपने आप में यह दर्शाता है कि प्राथमिकताएं गलत दिशा में जा रही हैं। अगर नगरपालिका के पास पैसों का भंडार है, अपने क्षेत्र की सफाई और बिजली बिल जैसे बकाया (67,40,640 रुपये) का भुगतान क्यों नहीं हो रहा? यह एक विरोधाभास है कि एक ओर धन की कोई कमी नहीं बताई जाती, वहीं दूसरी ओर खुद के क्षेत्र की हालत बद से बदतर होती जा रही है।पड़ोसी ग्राम पंचायत कोडेनार में नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों का जाना कई सवाल उठाता है। क्या वाकई में कोडेनार ग्राम पंचायत के पास अपनी सफाई के लिए संसाधन या फंड नहीं हैं? या फिर यह एक सुनियोजित तरीका है, जिसमें ग्राम पंचायत को मिलने वाली राशि का दुरुपयोग हो रहा है?
जैसा कि दोनों जगह भाजपा से जुड़े अध्यक्ष और सरपंच होने के कारण यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं यह मिलीभगत तो नहीं, जिसमें सफाई का काम नगरपालिका के कर्मचारियों से करवाया जा रहा हो और ग्राम पंचायत के फंड में हेराफेरी की जा रही हो।यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावना को भी उजागर करती है।
किरंदुल नगरपालिका को चाहिए कि वह पहले अपने घर को साफ करे, गंदगी और बकाया बिजली बिल जैसे मुद्दों का समाधान करे, तभी वह दूसरों के लिए मिसाल बन सकती है। इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत है ताकि जनता को यह पता चल सके कि उनके टैक्स के पैसे का इस्तेमाल कहां और कैसे हो रहा है।

