*किरंदुल में NMDC बस दुर्घटना: नशे में धुत ड्राइवर की लापरवाही से बड़ा हादसा होते-होते बचा, कर्मचारियों की जान पर बन आई*

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*किरंदुल में NMDC बस दुर्घटना: नशे में धुत ड्राइवर की लापरवाही से बड़ा हादसा होते-होते बचा, कर्मचारियों की जान पर बन आई*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 27 अप्रैल 2026: NMDC किरंदुल परियोजना की बस (CR CG 18 N 7481) ने रात करीब 10 बजे इंडियन गैस गोदाम के पास विशाल पीपल के वृक्ष से टकराकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना में एक कर्मचारी के सिर में गंभीर चोट लगी, जबकि दो अन्य को मामूली चोटें आईं। सभी घायलों को NMDC परियोजना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है और हालत स्थिर बताई जा रही है। गनीमत रही कि हादसा रात के वक्त हुआ, वरना यह और घातक साबित हो सकता था ड्राइवर जोगा की नशे वाली बात तो जोगा का मेडिकल रिपोर्टर के बाद ही खुलाशा होगा की ड्राइवर नशे मे था या नहीं।

प्रत्यक्षदर्शियों और बस में सवार कर्मचारियों के अनुसार, ड्राइवर जोगा ऐसा लग रहा था मानो शराब के नशे में हो और लापरवाही से बस चला रहा था। उसकी ड्राइविंग देखकर कुछ कर्मचारी तो NMDC चेक पोस्ट पर ही बस से उतर गए। बस दूसरी पाली के कर्मचारियों को माइनिंग क्षेत्र से किरंदुल लौटा रही थी और गांधीनगर की ओर जा रही थी। बस में उस वक्त 6-7 लोग सवार थे।

ड्राइवर का पुराना रिकॉर्ड चौंकाने वाला

सूत्रों के मुताबिक, जोगा ने बीते 15 दिनों में ही 9 से 11 छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं कर दी हैं। आज की घटना उसकी लापरवाही की एक और कड़ी साबित हुई। किरंदुल से माइनिंग तक का 9 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह घाटी वाला, खतरनाक मोड़ों से भरा हुआ है। अगर यह हादसा उन मोड़ों पर होता, तो बस में आमतौर पर सवार 20-25 कर्मचारियों की जान पर बन आ सकती थी। जोगा जैसे “दुर्घटना के बादशाह” ड्राइवर की वजह से NMDC के कर्मचारियों की जिंदगी हर रोज दांव पर लग रही है।

रात vs दिन: कितना बड़ा खतरा था?

रात 10 बजे सड़कें सुनसान होती हैं, इसलिए हादसा सीमित रह गया। लेकिन कल्पना कीजिए अगर यह दोपहर 2 बजे होता—जब स्कूलों की छुट्टी का समय होता, मेन रोड पर आवागमन ज्यादा होता और बस कर्मचारियों को ले जा रही होती। धूल भरे किरंदुल में तेज रफ्तार वाली NMDC बसें पहले से ही दोपहिया वाहनों के लिए मुसीबत बन चुकी हैं। जोगा जैसे ड्राइवर की बस अगर उस वक्त किसी स्कूली बच्चे या आम राहगीर से टकराती, तो अंजाम अकल्पनीय हो सकता था।

NMDC पर सवालों की बौछार

यह घटना NMDC प्रबंधन के लिए शर्मनाक है।

क्या उच्च अधिकारी इस नशेड़ी ड्राइवर पर सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर इसे “आम बात” मानकर कर्मचारियों की गलती छिपाने में लग जाएंगे?

NMDC की बसें मुख्य मार्गों पर अक्सर अत्यधिक रफ्तार से दौड़ती हैं, जिससे धूल का गुबार उठता है और आसपास के वाहनों को रास्ता दिखना बंद हो जाता है।

किरंदुल इन दिनों धूल का शहर बन चुका है। खनन गतिविधियों के कारण प्रदूषण पहले से बढ़ा हुआ है। ऐसे में नशे में बस चलाना न सिर्फ कर्मचारियों, बल्कि पूरे इलाके के लिए खतरा बन गया है।

यह हादसा चेतावनी है। अगर NMDC अब भी आंखें मूंदे रही, तो अगली बार गनीमत नहीं बचेगी—कई जिंदगियां दांव पर लग सकती हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी है, न कि किस्मत पर छोड़ने वाली बात।

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