*किरंदुल में पत्रकारों के वृक्षारोपण का जादुई असर: एक रात में गायब हुए गौरव पथ के तालाब नुमा गड्ढे!*
किरंदुल (दंतेवाड़ा): किरंदुल के मुख्य गौरव पथ पर बने खतरनाक गड्ढों को लेकर पत्रकारों और स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अनोखे वृक्षारोपण अभियान का असर मात्र कुछ घंटों में दिख गया।
सुबह पत्रकारों ने गड्ढों भरे गौरव पथ पर पौधे लगाकर सरकार और जनप्रतिनिधियों तक अपनी आवाज पहुंचाई थी, और रात होते-होते एनएमडीसी किरंदुल परियोजना ने पूरे इलाके के गड्ढों को सीमेंट-गिट्टी-रेत के मसाले से भर दिया। जब किरंदुल की जनता सुबह नींद से जागी, तो मुख्य मार्ग पर तालाब नुमा गड्ढों की जगह चिकना और सपाट रोड तैयार मिला।
यह घटना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। लोग इसे पत्रकारों की सशक्त आवाज और जागरूकता अभियान का सीधा परिणाम बता रहे हैं। कई नागरिकों ने कहा कि अगर पत्रकारों ने कल सुबह पौधे नहीं लगाए होते, तो शायद गड्ढे अभी भी भरे न होते।
घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
सुबह: कांग्रेस जिला प्रवक्ता राहुल महाजन, कांग्रेस पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष राजू रेड्डी, पत्रकार किशोर कुमार रामटेके, किशोर जाल, एस.एच. अजहर समेत अन्य पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने गौरव पथ के मुख्य मार्ग पर गड्ढों के बीच पौधे लगाए। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास की सड़क गड्ढों से भरी नहीं होनी चाहिए।
रात तक: एनएमडीसी किरंदुल परियोजना की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी बड़े गड्ढों को भर दिया। रातो-रात सीमेंट-गिट्टी से मजबूत मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया।
सुबह: किरंदुलवासी जब सड़क पर निकले तो हैरान रह गए। जहां कल तक पानी भरे गड्ढे थे, वहां अब सुधरी हुई सड़क दिख रही थी।
जनता की प्रतिक्रिया
किरंदुल की जनता पत्रकारों की इस पहल की खुलकर प्रशंसा कर रही है। लोग कह रहे हैं:
“पत्रकारों ने सिर्फ खबर नहीं लिखी, समस्या का समाधान करवा दिया।”
“एक पेड़ लगाने से पूरा रोड ठीक हो गया — यह जागरूकता का असर है।”
“एनएमडीसी ने तुरंत ध्यान दिया, यह सराहनीय है, लेकिन अब आगे भी सड़क की नियमित मरम्मत होनी चाहिए।”
यह घटना साबित करती है कि सृजनात्मक प्रदर्शन और मीडिया की सक्रिय भूमिका विकास कार्यों को तेज गति दे सकती है। गौरव पथ, जो एनएमडीसी के सहयोग से बना था, अब अपनी असली ‘गौरव’ वाली स्थिति में लौट रहा है।
पत्रकार किशोर कुमार रामटेके समेत सभी शामिल साथियों ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ गड्ढे भरवाना नहीं था, बल्कि जनता की समस्या पर तुरंत ध्यान दिलाना था। पर्यावरण और बेहतर सड़क — दोनों ही मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।”
निष्कर्ष: किरंदुल के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि जब आमजन, पत्रकार और प्रशासन साथ आते हैं, तो समस्याओं का समाधान रातोंरात संभव हो जाता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि ऐसी जागरूकता अभियान जारी रहें और गौरव पथ को लंबे समय तक अच्छी स्थिति में रखा जाए।

