*किरंदुल बाढ़ की मार से बच पाएगा या फिर वार्ड 6-8 में डूब जाएगी चैन की नींद? नगरपालिका की ‘तैयारी’ पर सवालों का घेरा*
किरंदुल (दंतेवाड़ा), 12 अप्रैल 2026: बारिश के दो महीने पहले ही किरंदुल के वार्ड क्रमांक 6 और 8 के निचले इलाकों में रहने वाले लोग चिंता में डूबे हुए हैं। क्या इस बार वर्षा ऋतु में नगरपालिका परिषद किरंदुल और जिला प्रशासन ने सचमुच बाढ़ रोकने की ठोस तैयारी की है, या फिर 2024 की भीषण जलप्रलय की तरह सिर्फ दिखावा और कुछ जगह मिट्टी भरकर मामला शांत कर दिया जाएगा? पिछले 2 वर्षों से हर बारिश में किरंदुल बाढ़ और जलभराव की चपेट में आ रहा है। लाखों का नुकसान, घर-दुकान तालाब बन जाना, सामान पानी में तैरना—ये तस्वीरें अब स्थानीय लोगों के लिए सालाना रूटीन बन चुकी हैं।
2024 में तो स्थिति इतनी भयावह थी कि एनएमडीसी के माइनिंग का अस्थाई जल भराओ फटने के बाद किरंदुल के निचले मोहल्लों में 3-4 फीट पानी भर गया। 50 से ज्यादा घर प्रभावित हुए, सैकड़ों परिवार बेघर हुए और प्रशासन को क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर मुआवजा देने का वादा करना पड़ा। वार्ड 6 और 8 के निचले हिस्से में तो 7-8 बार जलभराव हुआ, जिससे व्यापारियों और आम निवासियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा। 2025 में भी जिले में भारी बारिश के दौरान पुल टूटने और बाढ़ जैसी स्थिति बनी, हालांकि किरंदुल शहर पर उतना असर नहीं दिखा। लेकिन निवासी पूछ रहे हैं—क्या ये स्थायी समाधान था या बस कुदरत ने थोड़ी राहत दी?
नगरपालिका परिषद किरंदुल की अध्यक्ष रूबी शैलेन्द्र सिंह ने मार्च 2025 में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर “बरसात से पहले उचित तैयारी” के निर्देश दिए थे। कुछ जगहों पर मिट्टी भराई का काम भी हुआ—जैसे मंशाहर बाजार में मिट्टी डालकर स्तर ऊंचा किया गया। लेकिन वार्ड 6 और 8 के निचले हिस्सों में ड्रेनेज सिस्टम सुधार, नालों की सफाई, चेक डैम की मजबूती या नई पंपिंग व्यवस्था जैसी ठोस कार्रवाई के बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। निवासी सवाल कर रहे हैं:
*क्या नगरपालिका ने वार्ड 6-8 के निचले इलाकों में जल निकासी के लिए नई पाइपलाइन या बड़े नाले बनाए?*
क्या एनएमडीसी के डैम और पहाड़ी से आने वाले पानी को रोकने के लिए स्थायी समाधान निकाला गया?
क्या जिला प्रशासन के साथ मिलकर बाढ़ प्रबंधन योजना बनाई गई, जिसमें इमरजेंसी पंप, राहत शिविर और त्वरित मुआवजा की व्यवस्था शामिल हो?
*या फिर 2-3 घंटे की तेज बारिश में फिर वही पुरानी कहानी दोहराई जाएगी—घर-दुकान पानी में डूब जाएंगे और लोग चैन की नींद सोने के बजाय रातभर पानी निकालते रहेंगे?*
स्थानीय लोग खुलकर बोल रहे हैं, “मंशाहर बाजार में तो मिट्टी भर दी, लेकिन हमारे वार्ड में अभी भी नाले जाम हैं। पिछले साल 8 बार पानी घुसा, लाखों का सामान बर्बाद हुआ। इस बार भी अगर तैयारी सिर्फ कागजों पर रही तो फिर वही हाहाकार होगा।”
नगरपालिका और जिला प्रशासन से अब जवाब मांगने का समय आ गया है। क्या वार्ड 8 के निवासी इस बार बारिश में चैन की नींद सो पाएंगे? क्या वार्ड 6-8 के निचले हिस्से सुरक्षित रहेंगे? या फिर 2026 का मानसून भी 2024 की तरह “भीषण जलप्रलय” साबित होगा?
आम निवासी राहत की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अतीत की तस्वीरें उन्हें चिंता में डाल रही हैं। अगर प्रशासन ने वाकई पूर्ण तैयारी की है तो इसे सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए—ताकि लोगों का विश्वास बहाल हो। वरना, दो घंटे की बारिश में फिर घर तालाब बन जाएंगे और “तैयारी” का ढोल सिर्फ दिखावा साबित होगा।
*किरंदुलवासी इंतजार कर रहे हैं—राहत मिलेगी या परेशानी बढ़ेगी? नगरपालिका और जिला प्रशासन को अब जवाब देना होगा।*

