*किरंदुल में सियासी भूचाल: भाजपा के फूल छाप कोंग्रेसी ‘घर के भेदी’ ने मचाया तूफान? फर्जी शिकायत पत्र का खुलासा कब , कांग्रेस vs BJP की अंदरूनी लड़ाई!*
दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल मंडल में इन दिनों सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा विधायक चैतराम अटामी द्वारा अपने विधायक प्रतिनिधि के रूप में नगरपालिका पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति के बाद से ही क्षेत्र में विवादों का सिलसिला शुरू हो गया। अब इस मामले में एक नया धमाकेदार ट्विस्ट आ गया है – किरंदुल चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव राजप्रशाद और उपाध्यक्ष संजय सोनी के नाम से जिला कलेक्टर को भेजा गया शिकायत पत्र पूरी तरह फर्जी निकला!
क्या है पूरा मामला?
दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी ने किरंदुल मंडल के लिए शैलेंद्र सिंह (नगरपालिका अध्यक्ष के पति और पूर्व अध्यक्ष) को विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया।
इस नियुक्ति को ब्लॉक कांग्रेस ने नियम-विरुद्ध बताते हुए जिला कलेक्टर से शिकायत की। कांग्रेस का आरोप था कि अपनी सरकार के नियमों को ताक पर रखकर यह नियुक्ति की गई।
इसके बाद अचानक किरंदुल चैंबर ऑफ कॉमर्स के नाम से एक लिखित आवेदन कलेक्टर को मिला, जिसमें राजप्रशाद और संजय सोनी के हस्ताक्षर बताए गए। इसमें नियुक्ति का विरोध किया गया था।
लेकिन दोनों नेताओं ने साफ-साफ इनकार कर दिया – “यह घिनौनी हरकत हमारी नहीं है, हमने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा।”
शैलेंद्र सिंह ने विवाद को भांपते हुए इस्तीफे की घोषणा भी कर दी, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक त्यागपत्र सामने नहीं आया है।
*सबसे बड़ा सवाल – सूत्रधार कौन क्या वहीं 5 से 7 भाजपा के फूल छाप कोंग्रेसी तो नहीं ?*
स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फर्जी शिकायत पत्र 5 से 7 भाजपा कार्यकर्ताओं (जिन्हें ‘भाजपा के फूल छाप कांग्रेसी’ कहा जा रहा है) की देन हो सकता है। ये लोग भाजपा की सदस्यता लेकर भी पार्टी के खिलाफ ही काम कर रहे हैं – ठीक वैसे जैसे “घर का भेदी लंका ढाए” वाली कहावत साबित हो रही है।
कांग्रेस की शिकायत को हवा देने और विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति को विवादित बनाने के लिए किसी शातिर व्यक्ति या गिरोह ने दूसरे के नाम का इस्तेमाल कर कलेक्टर को गुमराह करने की कोशिश की। अब सियासी पंडित पूछ रहे हैं – क्या किरंदुल में भाजपा की अंदरूनी कलह इतनी गहरी है कि पार्टी के अपने लोग ही एक-दूसरे की खाई खोद रहे हैं?
*किरंदुल का सियासी माहौल*
यह पूरा प्रकरण दंतेवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की एकता पर सवाल उठा रहा है। चैतराम अटामी लगातार क्षेत्र के विकास कार्यों में सक्रिय दिख रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर ऐसे विवाद पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं कांग्रेस इस मौके को भाजपा में फूट डालने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
अभी तक न तो जिला प्रशासन ने फर्जी शिकायत की जांच की कोई आधिकारिक जानकारी दी है, और न ही भाजपा की ओर से कोई बड़ा बयान आया है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े की जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए – चाहे वो किसी भी पार्टी से हों।
किरंदुल राजनीति का यह नया अध्याय दिखाता है कि सत्ता और स्थानीय पदों के लिए अंदरूनी लड़ाई कितनी गंदी हो सकती है। क्या भाजपा इस ‘घरेलू दुश्मन’ को पहचान पाएगी और पार्टी अनुशासन बनाए रख पाएगी? या किरंदुल का यह भूचाल और बड़ा रूप लेगा?

