*किरंदुल में एएम/एनएस इंडिया की बेनिफिसिएशन प्लांट क्षमता विस्तार जनसुनवाई संपन्न: अधिकांश स्थानीय लोगों ने दिया समर्थन*
दंतेवाड़ा, 31 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल क्षेत्र में आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) के बेनिफिसिएशन प्लांट की क्षमता विस्तार परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस जनसुनवाई में लगभग 1000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिसमें से 56 लोगों ने माइक पर अपनी राय व्यक्त की। इनमें से करीब 80 प्रतिशत लोगों ने परियोजना के पक्ष में सहमति जताई, जबकि 22 लोगों ने अपनी लिखित मांगें कंपनी के समक्ष रखीं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
यह जनसुनवाई पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया का हिस्सा थी, जिसमें कंपनी अपनी मौजूदा बेनिफिसिएशन प्लांट की उत्पादन क्षमता को 8 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से बढ़ाकर 12 एमटीपीए करने का प्रस्ताव लेकर आई है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य कंपनी के विशाखापत्तनम स्थित पेलेट प्लांट के संचालन को मजबूत समर्थन प्रदान करना है।
जनसुनवाई के बाद कंपनी प्रस्तावित क्षमता विस्तार पूरी तरह से किरंदुल में पहले से संचालित प्लांट के भीतर ही किया जाएगा और इसके लिए किसी भी अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं है। सभी निर्माण कार्य, प्रतिष्ठापन और अवसंरचनात्मक विकास मौजूदा संयंत्र परिसर में ही संपन्न होंगे। कंपनी ने पारदर्शिता बनाए रखने और सभी वैधानिक एवं नियामक आवश्यकताओं का पूर्ण पालन करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
एएम/एनएस इंडिया के अधिकारियों का कहना है कि यह विस्तार कंपनी की भारत में स्टील उत्पादन क्षमता बढ़ाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। कंपनी पहले से ही ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आयरन ओर की सफाई और शुद्धिकरण के लिए बेनिफिसिएशन सुविधाएं संचालित कर रही है, जिनसे विशाखापत्तनम और पारादीप जैसे पेलेट प्लांट्स को कच्चा माल सप्लाई किया जाता है। किरंदुल प्लांट का विस्तार स्लरी पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से अधिक कुशल उत्पादन और परिवहन सुनिश्चित करेगा।
स्थानीय स्तर पर जनसुनवाई में भाग लेने वाले अधिकांश लोगों ने परियोजना को रोजगार सृजन, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक मजबूती के रूप में देखा। सहमति देने वालों का मानना था कि मौजूदा परिसर में विस्तार से पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा और कंपनी की प्रतिबद्धता से स्थानीय समुदाय को लाभ मिलेगा। हालांकि, कुछ लोगों ने जल संरक्षण, धूल नियंत्रण, स्थानीय रोजगार प्राथमिकता और सीएसआर गतिविधियों से जुड़ी मांगें रखीं, जिन्हें कंपनी ने गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया है।
बस्तर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां अक्सर पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों से घिरी रहती हैं। पहले एनएमडीसी जैसी कंपनियों के विस्तार पर भी स्थानीय विरोध देखने को मिला था। लेकिन इस बार एएम/एनएस की जनसुनवाई में व्यापक समर्थन मिलना कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी उतरती है, तो यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
जनसुनवाई के सफल आयोजन से परियोजना को पर्यावरण मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। कंपनी अब नियामक प्रक्रियाओं को पूरा कर जल्द ही विस्तार कार्य शुरू करने की योजना बना रही है। यह कदम भारत की बढ़ती स्टील मांग को पूरा करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत साबित हो सकता है

