*ठेकेदारों को आई आर के नाम पऱ ब्लेकमेल करना बंद करें एनएमडीसी प्रबंधन का कार्मिक विभाग, वरना उत्पादन ठप्प करेंगे एनएमडीसी के ठेकेदार* – बबलू सिद्दीकी*
एनएमडीसी के कार्मिक विभाग की ब्लैकमेलिंग, आई.आर. एवं फाइनेंस विभाग की लेटलतीफ़ी और किरंदुल ठेकेदार संघ की निष्क्रियता ने ली युवा ठेकेदार अजय ठाकुर की जान
किरंदुल।
नगरपालिका परिषद, किरंदुल के उपाध्यक्ष बबलू सिद्दीकी ने युवा ठेकेदार अजय ठाकुर की असामयिक एवं दुखद मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि NMDC Limited के पर्सनल (Personnel), आई.आर. (Industrial Relations) एवं फाइनेंस विभाग द्वारा किए जा रहे संगठित उत्पीड़न, तथा किरंदुल ठेकेदार संघ की पूर्ण निष्क्रियता का गंभीर और दुखद परिणाम है।
उन्होंने कहा कि एनएमडीसी का पर्सनल विभाग ठेकेदारों को अप्रत्यक्ष धमकियों, प्रशासनिक दबावों एवं ब्लैकमेलिंग के माध्यम से प्रताड़ित करता है, जिससे ठेकेदार अपनी जायज़ समस्याएँ खुलकर रखने से डरते हैं। यह एक सार्वजनिक उपक्रम की गरिमा के विपरीत आचरण है।
आई.आर. विभाग द्वारा बिल रोककर आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न
आई.आर. विभाग द्वारा ठेकेदारों के बिल महीनों तक रोके जाते हैं, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट और मानसिक तनाव में जीने को मजबूर हैं। अजय ठाकुर जैसे युवा ठेकेदार इस निरंतर दबाव को सहन नहीं कर पाए और इसका परिणाम अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रूप में सामने आया।
फाइनेंस विभाग की लेटलतीफ़ी और तकनीकी बहानों की नीति
एनएमडीसी का फाइनेंस विभाग भी इस उत्पीड़न का बराबर का जिम्मेदार है।
छोटी-छोटी तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर भुगतान फाइलों को बार-बार लौटाया जाता है, जबकि यह देखने का कोई प्रयास नहीं किया जाता कि ठेकेदार किन विषम परिस्थितियों में कार्य कर रहा है।
फाइनेंस विभाग द्वारा केवल पेनल्टी थोपने की प्रवृत्ति अपनाई जाती है, जबकि—
• जितना विलंब बिल भुगतान में आई.आर. विभाग करता है,
• उतना ही विलंब फाइनेंस विभाग द्वारा भी किया जाता है।
यह संयुक्त लापरवाही ठेकेदारों को आर्थिक रूप से तोड़ने का कार्य कर रही है।
किरंदुल ठेकेदार संघ की निष्क्रियता भी जिम्मेदार
इस पूरे मामले में किरंदुल ठेकेदार संघ की चुप्पी और निष्क्रियता भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण रही है।
संघ का दायित्व था कि वह ठेकेदारों के हित में आवाज़ उठाता, सामूहिक रूप से अन्याय का विरोध करता और प्रशासन पर दबाव बनाता, किंतु संघ द्वारा समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ठेकेदारों की समस्याओं को अनदेखा करना और केवल औपचारिकता निभाना भी अप्रत्यक्ष रूप से इस त्रासदी का कारण बना है।
लेबर भुगतान व्यवस्था में ज़मीनी सच्चाई की अनदेखी
ठेकेदारों पर यह दबाव डाला जा रहा है कि लेबर भुगतान केवल ऑनलाइन और मासिक किया जाए, जबकि क्षेत्र की अधिकांश आदिवासी लेबर साप्ताहिक नगद भुगतान चाहती है।
ये श्रमिक अपना पारिश्रमिक साप्ताहिक बाज़ार एवं दैनिक आवश्यकताओं में खर्च करते हैं। उन्हें जबरन मासिक व्यवस्था में बाध्य करना अमानवीय एवं अव्यावहारिक है।
घूस मांगने के गंभीर आरोप
मृतक अजय ठाकुर की माँ द्वारा एनएमडीसी प्रबंधन पर घूस मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह विषय अत्यंत संवेदनशील है और इसकी स्वतंत्र व निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है।
वर्क ऑर्डर और लेबर व्यवस्था में खुला नियम उल्लंघन
एनएमडीसी द्वारा वर्क ऑर्डर लेबर सप्लाई हेतु ठेकेदार के नाम से जारी किया जाता है, किंतु—
• लेबर की तैनाती स्वयं प्रबंधन करता है
• ठेकेदार से केवल वेतन एवं पीएफ भुगतान कराया जाता है
यह व्यवस्था स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध है। यदि वर्क ऑर्डर ठेकेदार का है, तो लेबर की नियुक्ति की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की होनी चाहिए।
मांगें
1. अजय ठाकुर की मृत्यु की स्वतंत्र/न्यायिक जांच
2. पर्सनल विभाग की ब्लैकमेलिंग की जांच
3. आई.आर. एवं फाइनेंस विभाग की भूमिका की विशेष जांच
4. घूस मांगने के आरोपों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच
5. सभी लंबित बिलों का तत्काल भुगतान
6. लेबर भुगतान व्यवस्था को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाए
7. ठेकेदारी व्यवस्था में पारदर्शी एवं नियमसम्मत सुधार
8. किरंदुल ठेकेदार संघ की कार्यप्रणाली की भी आत्मसमीक्षा
यदि अब भी एनएमडीसी प्रबंधन और संबंधित संस्थाएँ नहीं जागीं, तो यह विषय जनआंदोलन का रूप लेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
— बबलू सिद्दीकी
उपाध्यक्ष
नगरपालिका परिषद, किरंदुल

