*बस्तर में डिजिटल मीटर बदलने में बड़ी लापरवाही: अनट्रेंड कर्मचारी, फर्जी सर्टिफिकेट और अधिकारियों की जिम्मेदारी से इनकार*

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*बस्तर में डिजिटल मीटर बदलने में बड़ी लापरवाही: अनट्रेंड कर्मचारी, फर्जी सर्टिफिकेट और अधिकारियों की जिम्मेदारी से इनकार*

किरंदुल (दंतेवाड़ा), 24 दिसंबर 2025: बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में विद्युत विभाग द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल मीटर परिवर्तन अभियान में गंभीर लापरवाही सामने आई है। पुराने मीटरों को डिजिटल मीटर से बदलने का काम ठेकेदार के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन इसमें लगे कर्मचारी बिना उचित योग्यता और अनुभव के काम कर रहे हैं। इससे न केवल कर्मचारियों की जान जोखिम में है, बल्कि आम उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों और जांच के दौरान पता चला कि ठेकेदार द्वारा नियुक्त कर्मचारी विद्युत क्षेत्र में कोई डिग्री या विशेष प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हैं। किरंदुल के वार्ड नंबर 1 में मीटर बदलते दो कर्मचारियों से बातचीत में खुलासा हुआ कि वे विज्ञान में स्नातक हैं और विद्युत के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं रखते। एक कर्मचारी ने बताया, “हमें सिर्फ कुछ दिनों का प्रशिक्षण दिया गया कि मीटर कैसे लगाना है और कौन सा तार कहां जोड़ना है। इससे ज्यादा हमें कुछ नहीं पता।” जब उनसे पूछा गया कि लाइव बिजली में काम करते हुए कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी, तो उनका कोई जवाब नहीं था।

मामले की गहराई में जाने पर कर्मचारियों ने हैदराबाद निवासी श्रीकांत नामक व्यक्ति से बात कराई, जो संभवतः ठेकेदार का प्रतिनिधि है। श्रीकांत ने पहले दावा किया कि कर्मचारियों के पास विद्युत डिप्लोमा है और सर्टिफिकेट उपलब्ध हैं। लेकिन जब कर्मचारियों की योग्यता के बारे में बताया गया, तो उन्होंने बात को घुमाने की कोशिश की। बाद में, उन्होंने कर्मचारी के मोबाइल पर एक पेपर दिखाने को कहा, जो आईएएस अधिकारी डॉ. रोहित यादव के लेटरहेड पर था। हालांकि, यह दस्तावेज पूरी तरह फर्जी लग रहा था—इसमें कोई सरकारी मुहर नहीं थी, हस्ताक्षर किसी बच्चे की handwriting जैसे थे, और कोई आधिकारिक वैधता नहीं दिख रही थी।

दंतेवाड़ा जिले के विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। एक अधिकारी ने कहा, “यह मीटर बदलने का काम उच्च स्तर पर निविदा के माध्यम से हुआ है। हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है। अगर काम के दौरान किसी कर्मचारी को कुछ होता है, तो स्वतंत्र ठेकेदार जिम्मेदार होगा।” इससे साफ जाहिर होता है कि ठेकेदार बड़े मुनाफे के चक्कर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहा है, जबकि विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं।

विश्लेषण: सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल

यह घटना विद्युत विभाग की डिजिटलाइजेशन पहल की कमजोर कड़ियों को उजागर करती है। देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान चल रहा है, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी इलाकों जैसे बस्तर में ठेकेदारों की मनमानी से जोखिम बढ़ रहा है। अनट्रेंड कर्मचारियों का इस्तेमाल न केवल दुर्घटनाओं को न्योता देता है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना ठेकेदारी प्रणाली में भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यों में न्यूनतम योग्यता (जैसे आईटीआई या डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) अनिवार्य होनी चाहिए, और विभाग को ठेकेदारों की निगरानी मजबूत करनी चाहिए।

अगर यह लापरवाही जारी रही, तो कर्मचारी ‘बली का बकरा’ बन सकते हैं, जबकि असली जिम्मेदार बच निकलेंगे। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार को इस पर तत्काल जांच बिठानी चाहिए ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अधिक जानकारी के लिए विद्युत विभाग से संपर्क करें।

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