*किरंदुल (दंतेवाड़ा) : SKMS (AITUC) ने NMDC प्रबंधन को दिया अल्टीमेटम जैसा पत्र, वेतन समझौता, ठेका मजदूर और ओवरबर्डन सहित 6 बड़ी मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन की चेतावनी*

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*किरंदुल (दंतेवाड़ा) : SKMS (AITUC) ने NMDC प्रबंधन को दिया अल्टीमेटम जैसा पत्र, वेतन समझौता, ठेका मजदूर और ओवरबर्डन सहित 6 बड़ी मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन की चेतावनी*

किरंदुल, 01 दिसंबर 2025

संयुक्त खदान मजदूर संघ (SKMS-AITUC) ने आज NMDC के CMD को एक कड़ा पत्र लिखकर 6 प्रमुख मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने को कहा है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो परियोजना में उत्पादन और औद्योगिक शांति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

पत्र में सबसे बड़ा मुद्दा 2022 से लंबित वेतन समझौता है। संघ के सचिव राजेश संधू ने लिखा है कि 5 साल का वेज एग्रीमेंट होने के बावजूद 4 साल बीतने को हैं, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ। हालांकि दीपावली से पहले 75% एरियर्स का भुगतान किया गया, इसके लिए संघ ने धन्यवाद दिया, लेकिन शेष बकाया और नया वेतन समझौता तत्काल लागू करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई है।

दूसरा बड़ा विवाद वेस्ट माइनिंग और ओवरबर्डन हटाने का है। संघ का आरोप है कि प्रबंधन बिना किसी द्विपक्षीय चर्चा के ठेका कंपनियों से यह काम करा रहा है, जिससे श्रमिकों और संघ के बीच विश्वास की कमी पैदा हो रही है। SKMS ने चेताया है कि पहले संघ से लिखित समझौता कर लिया जाए, उसके बाद ही यह काम आगे बढ़े।

ठेका मजदूरों के लिए स्थिति और भी गंभीर है। 2019 में हुआ 5 साल का समझौता अप्रैल 2024 में खत्म हो चुका है। फरवरी 2025 में रायपुर में हुई उप-समिति की बैठक में ठेका मजदूरों की समस्याएं रखी गई थीं, लेकिन 10 महीने बीतने के बाद भी प्रबंधन ने कोई कदम नहीं उठाया। ठेका श्रमिकों में भारी असंतोष है और संघ ने जल्द द्विपक्षीय बैठक बुलाकर नया समझौता करने की मांग की है।

*पत्र में उठाई गई अन्य प्रमुख मांगें*

. फील्ड अटेंडेंट (L-1) और मेंटेनेंस असिस्टेंट (L-2) की भर्ती प्रक्रिया को तुरंत पूरा किया जाए।

प्रमोशन पॉलिसी (Line of Promotion) पर जल्द बैठक बुलाई जाए।

. हैदराबाद और विशाखापट्टनम की तर्ज पर रायपुर के लिए भी कर्मचारियों-अधिकारियों के लिए बस सेवा शुरू की जाए (चिकित्सा और बच्चों की पढ़ाई के लिए)।

संघ ने अंत में लिखा है, “यदि इन मांगों पर प्राथमिकता से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो परियोजना में बेहतर उत्पादन, उत्पादकता और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंध बनाना कठिन हो जाएगा।”

NMDC के किरंदुल परियोजना में करीब 5000 से अधिक स्थायी और ठेका मजदूर कार्यरत हैं। पिछले कुछ महीनों से ठेका मजदूरों और स्थायी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। SKMS (AITUC) बैलाडिला क्षेत्र में सबसे बड़ा और प्रभावशाली यूनियन माना जाता है।

अब सभी की नजरें NMDC कॉर्पोरेट ऑफिस हैदराबाद पर टिकी हैं कि वह इन मांगों पर कब तक और कैसे जवाब देता है। सूत्र बताते हैं कि यदि दिसंबर मध्य तक कोई ठोस पहल नहीं हुई तो SKMS बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है।

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