*किरंदुल में बस चालकों की गुंडागर्दीः बच्चों की जान से खिलवाड़, प्रशासन मौन!*
किरंदुल, 30 नवंबर। रायपुर से किरंदुल पहुंचने वाली निजी बसों के चालक-परिचालक अपनी मनमानी के चलते पूरे शहर की सुबह को जहरीली बना रहे हैं। सुबह ठीक 8 बजे, जब चारों स्कूलों की घंटी बजने वाली होती है, ठीक उसी समय ये बसें मुख्य मार्ग के बीचों-बीच खड़ी मिलती हैं और यात्रियों को उतारने का नाटक 10 से 15 मिनट तक चलता रहता है। नतीजा? स्कूल जाने वाले सैकड़ों बच्चे और उनके अभिभावक ट्रैफिक जाम में फंस कर देरी से स्कूल पहुंचते हैं और स्कूल गेट बंद मिलने पर बच्चों को बाहर खड़ा कर दिया जाता है।
मनमानी का खुला खेल
जबकि बस अड्डे के बाहर पूरी जगह खाली पड़ी है, चालक जानबूझकर बस को मुख्य सड़क पर खड़ा करते हैं। वजह? बस बुकिंग एजेंट का निजी चार पहिया वाहन उसी जगह पर कब्जा जमाए रहता है। स्थानीय लोगों ने जब वाहन हटाने को कहा तो जवाब मिला – “मेरा बुकिंग ऑफिस है, मैं जहां मन करे वहां गाड़ी खड़ी करूंगा।” यानी सार्वजनिक जगह पर निजी कब्जा और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़!
हर दिन दुर्घटना का इंतजार
जाम में फंसे अभिभावक बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाने के लिए मजबूरन तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते हैं। पिछले कुछ महीनों में इसी जल्दबाजी में कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। मासूमों की जान जोखिम में डालकर बस मालिक और चालक मोटी कमाई कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही।
जनता ने पूछा – आखिर कब तक चलेगी यह गुंडागर्दी?
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं:
क्या बस अड्डे के बाहर जगह इसलिए खाली रखी जाती है कि बुकिंग एजेंट अपनी लग्जरी गाड़ी खड़ी कर सके?
ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को सुबह 8 बजे का यह तमाशा दिखाई नहीं देता?
बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कब लगेगी लगाम?
किरंदुल की जनता अब खुलकर कह रही है – “ये बस चालक और बुकिंग माफिया मिलकर हमारी सुबह को नर्क बना रहे हैं।” अगर प्रशासन ने अभी भी आंखें नहीं खोलीं तो जल्द ही कोई बड़ा हादसा होने पर इन्हीं मनमानी करने वालों के हाथ रक्त से रंग जाएंगे।
सवाल सिर्फ एक है – किरंदुल में बच्चों की जान सस्ती है या बस मालिकों-एजेंटों की जेबें भारी?
प्रशासन जागे, वरना कभी भी हो सकता है बड़ा हादशा!

