*किरंदुल अब सिर्फ़ लौह अयस्क की खदान नहीं, छत्तीसगढ़ का एक ख़ूबसूरत टाउनशिप बन गया है!*
दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 28 नवंबर 2025
देश की नवरत्न कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड की किरंदुल आयरन ओर परियोजना इन दिनों एक अनूठे और प्रेरक परिवर्तन की मिसाल बन रही है। बस्तर की गोद में बसे इस औद्योगिक नगर को अब “ख़ूबसूरत किरंदुल” के नाम से जाना जा रहा है। परियोजना के कार्यकारी निदेशक (ईडी) श्री रविन्द्र नारायण की दूरदर्शी सोच, दिन-रात की मेहनत और उनकी पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों से किरंदुल का कायाकल्प हो रहा है।
आज सुबह ईडी श्री रविन्द्र नारायण खुद अपनी टीम के साथ किरंदुल के हृदय स्थल – बस स्टैंड क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करते नज़र आए। उनके साथ मुख्य प्रबंधक (कार्मिक) श्री के.एल. नागवेणी, वरिष्ठ प्रबंधक तनवीर जावेद, श्री एस.के. पाण्डेय सहित परियोजना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह टीम पिछले कई महीनों से शहर को नया रंग-रूप देने में जुटी हुई है।
*क्या-क्या बदल गया किरंदुल?*
गगनचुंबी 10 मंजिला आवासीय टावर – किरंदुल में अब ऊँची-ऊँची इमारतें आसमान को छू रही हैं।
डॉ. आंबेडकर पार्क में भव्य म्यूजिकल फाउंटेन – शाम ढलते ही रंग-बिरंगी लाइटों और संगीत के साथ पानी का नृत्य देखते ही बनता है।
शहीद चौक पर मजदूरों की मेहनत की प्रतिमा – यह चौक अब किरंदुल की पहचान बन चुका है। मेहनतकश मजदूरों को सलाम करते यह स्मारक हर आने-जाने वाले को गर्व से भर देता है।
24×7 शुद्ध पेयजल – एनएमडीसी किरंदुल परियोजना अब नगर के 80% घरों तक चौबीसों घंटे शुद्ध पेयजल पहुँचा रही है।
चौड़ी सड़कें, हरे-भरे पार्क, स्ट्रीट लाइट्स, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, आधुनिक बस स्टैंड – हर तरफ़ साफ़-सफ़ाई और सुंदरता का आलम है।
*माटी का लाल जिसने सबसे ज़्यादा मेहनत की – महेश संबेटा*
किरंदुल को यह नया रूप देने में एक नाम सबसे ऊपर आता है – श्री महेश संबेटा। किरंदुल की माटी में जन्मे यह अधिकारी परियोजना की रीढ़ हैं। 2024 में आई भयंकर बाढ़ (जलप्रलय) के दौरान भी इन्होंने दिन-रात डटकर राहत और पुनर्वास कार्य संभाला था। पूरा नगर आज भी इनकी प्रशंसा करते नहीं थकता। स्थानीय लोग कहते हैं, “महेश जी नहीं होते तो किरंदुल इतनी जल्दी संभल नहीं पाता।”
*ईडी रविन्द्र नारायण का विज़न*
ईडी श्री रविन्द्र नारायण ने पदभार संभालते ही घोषणा की थी – “किरंदुल सिर्फ़ उत्पादन का केंद्र नहीं, यह एक आदर्श शहर बनेगा।” उनकी निगरानी में हर विभाग एकजुट होकर काम कर रहा है। वे खुद हर छोटे-बड़े कार्य की मॉनिटरिंग करते हैं। चाहे पार्क का डिज़ाइन हो या पेयजल पाइपलाइन का लास्ट मीटर, हर चीज़ पर उनकी पैनी नज़र है।
*स्थानीय लोगों की जुबानी*
एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ अंधेरा और धूल ही धूल थी, आज शाम को पार्क में बैठकर फव्वारा देखते हैं तो मन खुश हो जाता है।”
एक युवती ने कहा, “10 मंजिला बिल्डिंग देखकर लगता है हम किसी बड़े शहर में रह रहे हैं। एनएमडीसी ने हमारा गर्व लौटा दिया।”
किरंदुल आज साबित कर रहा है कि खदान क्षेत्र भी देश के सबसे सुंदर और रहने योग्य शहर बन सकते हैं। यह परिवर्तन सिर्फ़ इमारतों और सड़कों का नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में आए खुशी और गर्व का परिवर्तन है।
एनएमडीसी किरंदुल परियोजना और उसके कर्मठ अधिकारियों – ख़ासकर ईडी श्री रविन्द्र नारायण, श्री महेश संबेटा और पूरी टीम को सलाम!
आपने साबित कर दिया कि अगर इरादे नेक हों और नेतृत्व मज़बूत हो तो पहाड़ भी हिला करते हैं और शहर भी ख़ूबसूरत बना करते हैं।
जय हिंद! जय छत्तीसगढ़! जय किरंदुल!

