*दंतेवाड़ा में बैलाडीला लौह अयस्क परियोजना: 15.665 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण से मिलेगी नई ऊंचाई, प्रभावित परिवारों के लिए मजबूत पुनर्वास योजना*

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*दंतेवाड़ा में बैलाडीला लौह अयस्क परियोजना: 15.665 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण से मिलेगी नई ऊंचाई, प्रभावित परिवारों के लिए मजबूत पुनर्वास योजना*

दंतेवाड़ा, 26 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता): छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में खनिज संपदा को नई दिशा देने वाली बैलाडीला लौह अयस्क परियोजना को गति मिलने वाली है। बड़े बचेली तहसील के राजस्व ग्राम भांसी और पोरोकमेली में कुल 15.665 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जो लोडिंग संयंत्र, रेलवे साइडिंग और अन्य सहायक इकाइयों के निर्माण के लिए किया जाएगा। यह कदम न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए पारदर्शी पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) बड़े बचेली द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह अधिग्रहण भारत सरकार के खान मंत्रालय के आदेश (जीएसआर 697, दिनांक 30 सितंबर 2019) के अनुपालन में हो रहा है। इसके तहत बैलाडीला लौह अयस्क निक्षेप क्रमांक 4 के कुल 646.596 हेक्टेयर क्षेत्र को एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के पक्ष में खनन और पूर्वेक्षण के लिए आरक्षित किया गया था। दंतेवाड़ा जिले की यह महत्वाकांक्षी परियोजना लौह अयस्क उत्पादन को बढ़ावा देकर देश की इस्पात उद्योग को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

पुनर्वास योजना: प्रभावितों के हित में केंद्रित परियोजना के तकनीकी व्यवहारिता रिपोर्ट के आधार पर, भांसी ग्राम में 11.265 हेक्टेयर और पोरोकमेली ग्राम में 4.40 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 (एलएआरआर एक्ट) के प्रावधानों के तहत किया जाएगा। इसमें निजी राजस्व भूमि के अलावा आरक्षित वन क्षेत्र और राजस्व वन पट्टे भी शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह अधिग्रहण छत्तीसगढ़ सरकार की आदर्श पुनर्वास नीति, 2007 के दिशानिर्देशों पर आधारित होगा। पुनर्वास योजना का अनुमोदन बस्तर आयुक्त द्वारा किया जाएगा, जो अधिग्रहण की तिथि से प्रभावी हो जाएगी। योजना में प्रभावित परिवारों को नकद प्रतिकर, वैकल्पिक भूमि आवंटन, आवास निर्माण, रोजगार अवसर और कौशल विकास जैसे लाभ सुनिश्चित किए गए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी होंगी और प्रभावित पक्षकारों की सहमति अनिवार्य होगी।

आर्थिक विकास की नई संभावनाएं बैलाडीला परियोजना दंतेवाड़ा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड के सहयोग से विकसित होने वाली यह इकाइयां सैकड़ों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेंगी, साथ ही स्थानीय समुदायों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार का अवसर प्रदान करेंगी। जिला खनिज अधिकारी ने बताया, “यह परियोजना न केवल राष्ट्रीय खनिज उत्पादन को बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में भी योगदान देगी। हम प्रभावित परिवारों के साथ लगातार संवाद में हैं ताकि कोई असंतोष न रहे।”

स्थानीय निवासियों का मिश्रित प्रतिक्रिया है। भांसी ग्राम के एक किसान ने कहा, “प्रतिकर और पुनर्वास की व्यवस्था मजबूत हो तो हम सहयोग करने को तैयार हैं। यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेगी।” वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने वन क्षेत्र प्रभाव पर नजर रखने की मांग की है, जिस पर प्रशासन ने पर्यावरण मंजूरी सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है।

दंतेवाड़ा प्रशासन ने प्रभावित ग्रामवासियों से अपील की है कि वे जागरूक रहें और संबंधित कार्यालयों से संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए बड़े बचेली तहसील कार्यालय या जिला कलेक्टर कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को खनिज हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विकास और समावेशिता का संतुलन बनाए रखेगी।

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