*किरंदुल नगरपालिका में ‘अदृश्य’ विधायक प्रतिनिधि का खेल! आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में “विधायक प्रतिनिधि” का उल्लेख, नियुक्ति आदेश कहां? राजपत्र के नियमों पर उठे गंभीर सवाल*
किरंदुल/दंतेवाड़ा। किरंदुल नगरपालिका एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक सवालों के घेरे में है। इस बार मामला नगरपालिका के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा प्रसारित किए गए एक संदेश से जुड़ा है, जिसमें “विशेष आमंत्रित” के रूप में विधायक प्रतिनिधि का उल्लेख किया गया है।
सवाल यह है कि जब किरंदुल नगरपालिका में अधिकृत विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर कोई सार्वजनिक आदेश सामने नहीं आया है, तो फिर आधिकारिक प्रोटोकॉल संदेश में विधायक प्रतिनिधि का उल्लेख किस आधार पर किया गया?
नियुक्ति नहीं तो आधिकारिक संदेश में नाम क्यों?
मामले को लेकर विपक्ष ने नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि विधायक प्रतिनिधि का पद वर्तमान में विधिवत भरा हुआ है तो उसकी नियुक्ति का आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं यदि पद रिक्त है तो नगरपालिका के आधिकारिक प्रोटोकॉल में “विधायक प्रतिनिधि” का उल्लेख आखिर किस आधार पर किया गया?
यही सवाल अब किरंदुल की राजनीतिक गलियों से निकलकर नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली तक पहुंच गया है।
राजपत्र के नियमों ने बढ़ाई पेचीदगी
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र में नगरीय निकायों में विधायक अथवा सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। आरोप है कि इन प्रावधानों के बावजूद किरंदुल नगरपालिका के आधिकारिक मंच पर ऐसे पद का उल्लेख किया जा रहा है, जिसकी वैध नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विशेष रूप से हालिया नियमों में जनप्रतिनिधियों के परिवार के सदस्यों को प्रतिनिधि अथवा समन्वयक बनाए जाने से संबंधित प्रतिबंधों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में किरंदुल नगरपालिका में विधायक प्रतिनिधि पद को लेकर पारदर्शिता और वैध नियुक्ति का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।
नवंबर 2024 में जितेंद्र गुप्ता को हटाया गया था
गौरतलब है कि नवंबर 2024 में दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी द्वारा जितेंद्र गुप्ता को किरंदुल नगरपालिका के विधायक प्रतिनिधि पद से हटाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद इस पद पर नई अधिकृत नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई।
वहीं फरवरी 2025 के नगरीय निकाय चुनाव के बाद भाजपा की रूबी शैलेन्द्र सिंह किरंदुल नगरपालिका अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। इसी बीच विधायक प्रतिनिधि पद को लेकर नए सिरे से उठ रहे सवालों ने राजनीतिक चर्चा को और हवा दे दी है।
राहुल महाजन का आरोप—“गुमशुदा पद को बनाए रखने पर तुला नगरपालिका प्रशासन”
जिला कांग्रेस कमेटी के जिला प्रवक्ता राहुल महाजन ने इस पूरे मामले पर तीखा हमला बोला है।
महाजन ने कहा कि पूर्व में उनके द्वारा यह सवाल उठाया गया था कि “विधायक चैतराम अटामी जी को किरंदुल में एक प्रतिनिधि तक नहीं मिल पा रहा है।” कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष के विरोध के बाद छत्तीसगढ़ राजपत्र के नियमों का हवाला देते हुए पूर्व नियुक्त शैलेन्द्र सिंह द्वारा भी अपने पद से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की बात उन्होंने कही।
राहुल महाजन का आरोप है कि इसके बावजूद भाजपा के लोगों में परिवारवाद का मोह इतना है कि वे यह मानने को तैयार नहीं हैं कि विधायक प्रतिनिधि का पद फिलहाल रिक्त है।
उन्होंने नगरपालिका प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “सीएमओ और नोडल अधिकारी की ऐसी सत्ता चाटुकारिता है कि वे इस गुमशुदा पद को बनाए रखने पर तुले हुए हैं।”
कांग्रेस ने पूछा—आखिर ‘अदृश्य’ प्रतिनिधि कौन?
कांग्रेस का मूल सवाल अब यही है कि किरंदुल नगरपालिका में अधिकृत विधायक प्रतिनिधि कौन है?
यदि नियुक्ति हुई है तो—
नियुक्ति आदेश कहां है?
नियुक्ति किस तारीख को हुई?
किस नियम के तहत हुई?
क्या नियुक्त व्यक्ति राजपत्र में निर्धारित पात्रता और प्रतिबंधों के अनुरूप है?
नगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड में उसका नाम दर्ज है या नहीं?
और यदि नियुक्ति नहीं हुई है तो—
नगरपालिका के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में “विधायक प्रतिनिधि” का उल्लेख किसके निर्देश पर और किस आधार पर किया गया?
मामला सिर्फ व्हाट्सएप संदेश का नहीं
यह विवाद महज एक व्हाट्सएप संदेश तक सीमित नहीं है। यह प्रोटोकॉल, प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन द्वारा निर्धारित नियमों के पालन से जुड़ा सवाल है।
अगर कोई व्यक्ति विधायक के अनौपचारिक प्रतिनिधि के रूप में किसी कार्यक्रम में मौजूद रहता है, तो उसे आधिकारिक दस्तावेज अथवा प्रोटोकॉल में “विधायक प्रतिनिधि” लिखने का अधिकार किसके पास है? और यदि वह विधिवत अधिकृत है तो उसकी नियुक्ति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
अब प्रशासन को देना होगा स्पष्ट जवाब
किरंदुल नगरपालिका के इस पूरे मामले में अब नगरपालिका प्रशासन, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नोडल अधिकारी, जिला प्रशासन और विधायक कार्यालय से स्पष्टता अपेक्षित है।
जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर “अदृश्य विधायक प्रतिनिधि” कौन है?
यदि पद रिक्त है तो उसे आधिकारिक प्रोटोकॉल में क्यों दिखाया जा रहा है? और यदि पद पर कोई व्यक्ति नियुक्त है तो उसकी वैध नियुक्ति का आदेश सामने क्यों नहीं है?
राजपत्र के नियम सभी के लिए समान हैं। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—नियमों का पालन होना चाहिए।
किरंदुल में अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि “विधायक प्रतिनिधि कौन है?”
बल्कि बड़ा सवाल यह है कि—
“जब प्रतिनिधि दिखाई नहीं देता, नियुक्ति आदेश दिखाई नहीं देता, तो आधिकारिक प्रोटोकॉल में यह पद दिखाई कैसे दे रहा है?”

